
ऊर्जा-रक्षा में भारत-यूएई के ऐतिहासिक समझौते, मिला अरबों का निवेश
शुक्रवार को कुल छह प्रमुख समझौतों में से सबसे महत्वपूर्ण समझौता इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच हुआ।
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में लगातार बढ़ते और गहराते सैन्य संघर्ष के बीच, भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने शुक्रवार को रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, दीर्घकालिक एलपीजी (LPG) आपूर्ति, रक्षा सहयोग और नौवहन (शिपिंग) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के दौरान अबू धाबी ने भारत में कुल 5 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 5 Billion) के विशाल निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। ये महत्वपूर्ण समझौते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच अबू धाबी में आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद धरातल पर उतरे हैं।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत
शुक्रवार को हस्ताक्षरित कुल छह प्रमुख समझौतों में से सबसे महत्वपूर्ण समझौता इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच हुआ एक रणनीतिक सहयोग समझौता है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करना है। इस समझौते के तहत पेट्रोलियम भंडारों के प्रबंधन में आपसी सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के भंडारण कपासिटी और बुनियादी ढांचे के विकास पर मिलकर काम किया जाएगा।
एक आधिकारिक सरकारी बयान के अनुसार, इस नए रणनीतिक समझौते के लागू होने से भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों (Strategic Petroleum Reserves) में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 30 मिलियन बैरल तक पहुंच जाएगी। इसके साथ ही, इस समझौते के तहत भारत की धरती पर रणनीतिक गैस भंडारों (Strategic Gas Reserves) की स्थापना का मार्ग भी पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
इसी ऊर्जा क्षेत्र के अंतर्गत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच एक और अलग और विशेष समझौता किया गया है। यह समझौता दोनों देशों की कंपनियों के बीच एलपीजी (रसोई गैस) की खरीद और बिक्री के नए अवसरों को विकसित करेगा। इसके तहत दोनों वैश्विक तेल कंपनियों के बीच एक दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था और दीर्घकालिक बिक्री-और-खरीद समझौते (Sale-and-Purchase Agreement) को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे भारत में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले इस कुकिंग फ्यूल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
सैन्य हार्डवेयर का होगा संयुक्त विकास
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, दोनों देशों ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी के व्यापक ढांचे (Framework) पर भी हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा क्षेत्र का यह नया फ्रेमवर्क मुख्य रूप से रक्षा औद्योगिक सहयोग, अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों के साझाकरण (Technology Sharing), नवाचार (Innovation) और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में आपसी तालमेल बढ़ाने पर केंद्रित है।
इस हस्ताक्षरित रक्षा ढांचे के तहत, भारत और संयुक्त अरब अमीरात सैन्य हार्डवेयर (सैन्य साजो-सामान) के संयुक्त विकास (Joint Development) की संभावनाओं को तलाशने के लिए पूरी तरह सहमत हुए हैं। इसके साथ ही कई अन्य बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील रक्षा क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने समझौतों को बताया 'महत्वपूर्ण'
भारत और यूएई के बीच ये कूटनीतिक और आर्थिक समझौते ऐसे समय में हुए हैं, जब पूरा पश्चिम एशिया गंभीर युद्ध और अशांति की चपेट में है। इस क्षेत्रीय संघर्ष के कारण भारत के भीतर कच्चे तेल (Crude Oil) और गैस की आपूर्ति बाधित होने को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। विशेषकर हॉरम्यूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भारत बेहद सतर्क है, जो कि देश के ऊर्जा आयात के लिए एक सबसे महत्वपूर्ण और लाइफलाइन समुद्री मार्ग माना जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच हुए इन समझौतों को ऊर्जा, रक्षा, बुनियादी ढांचा, शिपिंग और उन्नत प्रौद्योगिकियों (Advanced Technologies) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए "अति-महत्वपूर्ण और धुरी" (Pivotal) करार दिया है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि ये नए ऐतिहासिक कदम निश्चित रूप से भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को एक "नई और ऊर्जावान गति" (Fresh Boost) प्रदान करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई की अपनी इस कूटनीतिक यात्रा को "संक्षिप्त लेकिन असाधारण रूप से फलदायी और सफल" बताया। उन्होंने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि इस वार्ता के जो सकारात्मक परिणाम निकलकर सामने आए हैं, वे "दोनों देशों के बीच दोस्ती के अटूट बंधनों को और अधिक मजबूत करेंगे तथा आपसी विकास एवं समृद्धि को हासिल करने में बड़ा योगदान देंगे।" इसके साथ ही, यूएई द्वारा भारत में किए जाने वाले 5 अरब डॉलर के नए निवेश की घोषणा पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह कदम "दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगा।"
5 अरब डॉलर के निवेश का पूरा ब्यौरा
विदेश मंत्रालय (MEA) ने यूएई की इस 5 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता का विस्तृत ब्यौरा साझा किया है। मंत्रालय के अनुसार, इस निवेश योजना के अंतर्गत अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) और भारत के नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट फंड (NIIF) मिलकर भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र (Infrastructure Sector) में 1 अरब अमेरिकी डॉलर तक के निवेश के नए अवसरों की तलाश करेंगे और काम शुरू करेंगे।
मंत्रालय की रिपोर्ट में आगे बताया गया कि यूएई की प्रमुख बैंकिंग संस्था 'अमीरात एनबीडी' (Emirates NBD) भारत के आरबीएल बैंक (RBL Bank) में 3 अरब अमेरिकी डॉलर का एक बड़ा वित्तीय निवेश करेगी। इसके अतिरिक्त, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित प्रमुख वैश्विक कंपनी 'इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी' (IHC) भारत की वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी 'सम्मान कैपिटल' (Sammaan Capital) में 1 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगी। विदेश मंत्रालय ने इस निवेश प्रतिबद्धता को भारतीय बाजार को अधिक मजबूत बनाने और देश में बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया है। मंत्रालय ने इसे "भारत की विकास गाथा और समृद्धि के प्रति यूएई की निरंतर और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता" का एक जीवंत प्रतीक बताया।
निवेश और रणनीतिक विश्वास पर भारत के विदेश सचिव का बयान
इस ऐतिहासिक यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, "निवेश के क्षेत्र में, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पारंपरिक रूप से भारत के लिए हमेशा से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा निवेशक रहा है। अगर हम पिछले 25 वर्षों के संचयी आंकड़ों (Cumulative Data) को देखें तो यूएई भारत में निवेश करने वाला सातवां सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है।"
विदेश सचिव मिस्री ने आगे कूटनीतिक संबंधों पर बात करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री की यह यात्रा उस असाधारण और अटूट आपसी भरोसे तथा विश्वास का एक स्पष्ट प्रतिबिंब है, जो भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच के इस बेहद महत्वपूर्ण और खास रिश्ते को परिभाषित करता है।" उन्होंने दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र के महत्व पर विशेष जोर देते हुए कहा कि "ऊर्जा क्षेत्र हमेशा से ही भारत-यूएई संबंधों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मुख्य हिस्सा रहा है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति अल नाहयान के बीच यह उच्च स्तरीय वार्ता तब आयोजित हुई, जब प्रधानमंत्री अपनी पांच देशों की आधिकारिक विदेश यात्रा के पहले चरण के तहत अबू धाबी में कुछ समय के लिए रुके थे। अबू धाबी के बाद प्रधानमंत्री का यह दौरा उन्हें नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसी यूरोपीय ताकतों के पास भी ले जाएगा।
आधिकारिक बयान में आगे कहा गया है, "दोनों देश रक्षा औद्योगिक सहयोग को और गहरा करने के साथ-साथ नवाचार (इन्नोवेशन), उन्नत प्रौद्योगिकी, सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यासों, समुद्री सुरक्षा (मैरीटाइम सिक्योरिटी), साइबर डिफेंस, सुरक्षित संचार प्रणालियों (Secure Communications) और खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर अपनी आपसी साझेदारी को बढ़ाने के लिए पूरी तरह सहमत हुए हैं।"
गुजरात में बनेगा शिप रिपेयर सेंटर, एआई के लिए सुपर-कंप्यूटिंग क्लस्टर
दोनों देशों के बीच हुए अन्य महत्वपूर्ण समझौतों के तहत गुजरात के वाडिनार (Vadinar) में एक अत्याधुनिक जहाज मरम्मत केंद्र (Ship Repair Centre) स्थापित करने पर सहमति बनी है। इसके अलावा बंदरगाहों और तटीय बुनियादी ढांचे (Ports and Coastal Infrastructure) के विकास में सहयोग और जहाज मरम्मत के क्षेत्र में कौशल विकास (Skill Development) के लिए एक विशेष व्यवस्था की जाएगी। इसी कड़ी में भारत के कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited) और दुबई के ड्राईडॉक्स वर्ल्ड (Drydocks World) के बीच भी एक अलग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
तकनीकी मोर्चे पर, दोनों पक्षों ने भारत में एक विशाल 'सुपर-कंप्यूटिंग क्लस्टर' (Super-computing Cluster) स्थापित करने के लिए एक टर्म शीट (Term Sheet) पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षमताओं को कई गुना बढ़ाना है। इस पर टिप्पणी करते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, "यह कदम निश्चित रूप से भारत के राष्ट्रीय एआई मिशन (AI Mission) और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को एक नई और आधुनिक मजबूती प्रदान करेगा।"
डिजिटल ट्रेड कॉरिडोर हुआ शुरू, लॉजिस्टिक्स लागत में आएगी भारी कमी
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने यह भी जानकारी दी कि दोनों वैश्विक नेताओं ने दोनों देशों के सीमा शुल्क (कस्टम) और बंदरगाह अधिकारियों को आपस में जोड़ने वाले एक 'वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर' (Virtual Trade Corridor) के पूरी तरह चालू (Operationalise) होने का दिल से स्वागत किया है। यह डिजिटल कॉरिडोर दोनों देशों के बीच माल की आवाजाही को बेहद सुगम और सरल बनाएगा, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करेगा और पारगमन समय (Transit Time) में भारी कटौती करेगा।
इस डिजिटल ट्रेड कॉरिडोर के सुचारू संचालन से बेहतर सीमा शुल्क समन्वय और कार्गो दक्षता के माध्यम से दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक और व्यापारिक एकीकरण और अधिक गहरा होने की उम्मीद है। विदेश सचिव मिस्री ने कहा कि यह व्यवस्था दोनों देशों को "एक ऐसी दुनिया में अपनी आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन (Supply Chain Resilience) को मजबूत बनाने और विकसित करने में मदद करेगी, जहां वर्तमान में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में लगातार व्यवधान और रुकावटें देखी जा रही हैं।"
पीएम मोदी ने कहा- 'यूएई पर हमले स्वीकार्य नहीं'
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी गंभीर भू-राजनीतिक संकट और युद्ध की स्थिति पर भी अपने विचारों का गहन आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणियों में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, "हम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर होने वाले हमलों की पुरजोर निंदा करते हैं।" उन्होंने आगे स्पष्ट रूप से जोड़ा कि "जिस तरह से यूएई को निशाना बनाने का प्रयास किया गया है, वह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।"
उल्लेखनीय है कि संयुक्त अरब अमीरात, जहां एक बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा भी स्थित है, को भी इस क्षेत्रीय संघर्ष के शुरू होने के बाद से ईरानी हमलों और खतरों का सामना करना पड़ा है। इस बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण स्थिति को यूएई के नेतृत्व द्वारा "बेहद संयम और समझदारी" से संभालने की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की बहाली के लिए "हर संभव सहायता और सहयोग" देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत, यूएई के लड़ाकू विमानों ने दिया एस्कॉर्ट
इससे पहले दिन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अबू धाबी हवाई अड्डे पर पहुंचते ही यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने खुद प्रोटोकॉल तोड़कर व्यक्तिगत रूप से हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया, जहां भारतीय प्रधानमंत्री को एक औपचारिक 'गार्ड ऑफ ऑनर' (Ceremonial Guard of Honour) दिया गया। एक विशेष कूटनीतिक सम्मान के तहत, प्रधानमंत्री मोदी के विमान को यूएई की वायुसेना के सैन्य लड़ाकू विमानों (Military Jets) द्वारा हवा में एस्कॉर्ट भी किया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले 12 वर्षों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस खाड़ी देश की यह आठवीं आधिकारिक यात्रा थी।
यूएई से अपनी विदाई लेने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, "संयुक्त अरब अमीरात की एक संक्षिप्त लेकिन अत्यंत उत्पादक और सफल यात्रा का समापन हो रहा है। मैंने अपने भाई, महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत तथा गहरा करने के तरीकों पर बहुत व्यापक और सार्थक चर्चा की है।" अबू धाबी की अपनी इस संक्षिप्त और सफल यात्रा को पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अगले गंतव्य नीदरलैंड के लिए रवाना हो गए।
प्रधानमंत्री मोदी की यह अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा ऐसे समय में संपन्न हुई है, जब तेल उत्पादन नीतियों (Oil Production Policies), हॉरम्यूज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और इजरायल तथा ईरान से जुड़े क्षेत्रीय गठबंधनों को लेकर खाड़ी देशों के बीच आपसी मतभेद और दूरियां लगातार बढ़ रही हैं। ये ऐसे जटिल वैश्विक घटनाक्रम हैं, जिन्होंने पश्चिम एशिया में भारत के रणनीतिक और कूटनीतिक समीकरणों को काफी संवेदनशील और जटिल बना दिया है।

