
सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस 'महेंद्रगिरि' ने भरी हुंकार, मझगांव डॉक का कमाल
मझगांव डॉक द्वारा निर्मित छठा स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' भारतीय नौसेना को सौंपा गया। 75% स्वदेशी सामग्री और सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस यह युद्धपोत आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
भारतीय नौसेना की ताकत में और इजाफा हुआ है। अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और उन्नत सेंसरों से लैस स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट, 'महेंद्रगिरि', नौसेना को सौंप दिया गया है। इससे पहले गुरुवार (30 अप्रैल) को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) में नीलगिरी-क्लास (प्रोजेक्ट 17A) के इस छठे जहाज की सुपुर्दगी की गई।अधिकारियों के अनुसार, यह डिलीवरी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में 'आत्मनिर्भरता' हासिल करने की दिशा में एक "महत्वपूर्ण मील का पत्थर" है।
बहुमुखी और बहु-मिशन प्लेटफॉर्म
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “प्रोजेक्ट 17A के फ्रिगेट्स बेहद बहुमुखी और बहु-मिशन प्लेटफॉर्म हैं, जिन्हें समुद्री क्षेत्र की वर्तमान और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। यह अत्याधुनिक फ्रिगेट नौसैनिक डिजाइन, स्टील्थ (रडार से बचने की क्षमता), मारक क्षमता, स्वचालन और उत्तरजीविता में एक लंबी छलांग को दर्शाता है। यह युद्धपोत निर्माण में 'आत्मनिर्भर भारत' का एक गौरवशाली प्रतीक है।”
'महेंद्रगिरि' की प्रमुख विशेषताएं
पीढ़ीगत छलांग: यह स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट पिछली शिवालिक-श्रेणी (P17) की तुलना में स्टील्थ फीचर्स, उत्तरजीविता और युद्ध क्षमता के मामले में कहीं अधिक उन्नत है।
युद्ध क्षमता: यह जहाज एंटी-सरफेस (सतह-विरोधी), एंटी-एयर (हवा-विरोधी) और एंटी-सबमरीन (पनडुब्बी-विरोधी) युद्ध प्रणालियों सहित व्यापक हथियार प्रणालियों से लैस है, जिसमें सुपरसोनिक मिसाइलें भी शामिल हैं।
शक्तिशाली प्रोपल्शन: यह 'कंबाइंड डीजल और गैस' (CODOG) प्रोपल्शन प्लांट द्वारा संचालित है, जो डीजल इंजन और गैस टर्बाइन की शक्ति को जोड़ता है।
उच्च स्वचालन: इसमें अत्याधुनिक IPMS (इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम) है, जो उच्च स्तर के स्वचालन को सक्षम बनाता है और परिचालन दक्षता में सुधार करता है।
स्वदेशी सामग्री: इसका लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा स्वदेशी है, जिसमें MDSL के साथ 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) का सहयोग शामिल है।
निर्माण और सुपुर्दगी
महेंद्रगिरि (यार्ड 12654) MDSL द्वारा निर्मित इस श्रेणी का चौथा जहाज है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की एक विज्ञप्ति के अनुसार, स्वीकृति दस्तावेज पर MDSL के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) और पूर्वी नौसेना कमान के मुख्य स्टाफ अधिकारी (तकनीकी) रियर एडमिरल गौतम मरवाहा ने हस्ताक्षर किए।कैप्टन जगमोहन ने कहा कि महेंद्रगिरि उन्नत युद्ध क्षमताओं से लैस एक अत्याधुनिक युद्धपोत है और भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण शक्ति का एक मजबूत प्रतीक है।
डिजाइन और रोजगार सृजन
वारशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा डिजाइन किए गए P17A फ्रिगेट्स एकीकृत निर्माण के दर्शन पर आधारित हैं। P17A जहाजों को P17 (शिवालिक-श्रेणी) की तुलना में उन्नत हथियार और सेंसर सूट के साथ फिट किया गया है।महेंद्रगिरि पिछले 17 महीनों के भीतर नौसेना को दिया जाने वाला छठा P17A जहाज है। इस परियोजना ने न केवल सैन्य शक्ति को बढ़ाया है, बल्कि रोजगार के बड़े अवसर भी पैदा किए हैं। इस परियोजना के माध्यम से लगभग 4,000 कर्मियों को प्रत्यक्ष और 10,000 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है।
इससे पहले 3 अप्रैल को इसी श्रेणी के चौथे जहाज 'तारागिरि' को नौसेना में शामिल किया गया था, जबकि 30 मार्च को कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा पांचवां जहाज 'दूनागिरि' नौसेना को सौंपा गया था।

