
LPG की सप्लाई सुधरने में लग सकते हैं 4 साल, बढ़ सकती हैं गैस की कीमतें
मार्च के मध्य से अब तक 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये का उछाल आया है। इससे न केवल आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ा है, बल्कि होटल, रेस्तरां पर भी लागत का दबाव बढ़ गया है।
भारत में रसोई गैस (LPG) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों परिवारों के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बाधित हुई LPG सप्लाई चेन को पूरी तरह से बहाल होने में तीन से चार साल का लंबा समय लग सकता है। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को पहुंचा नुकसान है।
क्यों पैदा हुआ यह संकट?
भारत अपनी LPG खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। युद्ध शुरू होने से पहले, इस आयात का 90 प्रतिशत हिस्सा 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के रास्ते भारत आता था। हालांकि, ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और हॉर्मुज में की गई नाकाबंदी ने इस सप्लाई लाइन को तोड़ दिया है।
सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "सप्लायर्स से मिले इनपुट्स के अनुसार, बहाली में कम से कम तीन साल लगेंगे। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि प्रोडक्शन अस्थायी रूप से रुका है या तेल के कुओं को स्थायी नुकसान पहुंचा है।"
कीमतों पर पड़ रहा है सीधा असर
सप्लाई में आ रही बाधा का असर पहले ही भारतीय बाजारों में दिखने लगा है। मार्च के मध्य से अब तक 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये का उछाल आया है। इससे न केवल आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ा है, बल्कि होटल, रेस्तरां और छोटे उद्योगों (MSMEs) पर भी लागत का दबाव बढ़ गया है।
भारत की खाड़ी देशों पर निर्भरता
वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत की 92% LPG सप्लाई यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान जैसे देशों से आती थी। इसमें अकेले यूएई की हिस्सेदारी 41% और कतर की 22% थी। चूंकि ये देश सीधे तौर पर क्षेत्रीय तनाव की चपेट में हैं, इसलिए माल ढुलाई (Freight) की लागत और बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि हुई है, जिसका सीधा बोझ कीमतों पर पड़ रहा है।
सरकार की क्या है तैयारी?
सप्लाई की कमी को दूर करने के लिए सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है:
स्रोतों का विविधीकरण (Diversification): खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से LPG मंगाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
घरेलू उत्पादन में वृद्धि: रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपना LPG उत्पादन अधिकतम करें।
भंडारण क्षमता: भारत के पास वर्तमान में केवल 15 दिनों की खपत के बराबर स्टोरेज क्षमता है, जिसे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं की सप्लाई में कोई बड़ी रुकावट न आए। हालांकि, जब तक वैश्विक हालात नहीं सुधरते, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति का जोखिम बना रहेगा।

