
CJI टिप्पणी विवाद: महुआ व कीर्ति आजाद कॉकरोच जनता पार्टी में हुए शामिल
इस व्यंग्यात्मक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को तब लोकप्रियता मिली, जब बेरोज़गार युवाओं से जुड़ी एक विवादित "कॉकरोच" टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई, जिसके बाद CJI को स्पष्टीकरण देना पड़ा।
Row over CJI remarks: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक मौखिक टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी और व्यंग्यात्मक अभियान में बदल गया है। सीजेआई द्वारा बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई एक कथित टिप्पणी के विरोध में इंटरनेट पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम से एक अनौपचारिक और व्यंग्यात्मक पेज शुरू किया गया है। देखते ही देखते इस अभियान ने इतना तूल पकड़ लिया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व क्रिकेटर व सांसद कीर्ति आजाद जैसे दिग्गज राजनेता भी सार्वजनिक रूप से इस डिजिटल मुहिम का हिस्सा बन गए हैं।
आखिर क्या है यह 'कॉकरोच जनता पार्टी' और क्यों बनी?
यह पूरा मामला पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान शुरू हुआ था। कथित तौर पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें कोई रोजगार या प्रोफेशन में जगह नहीं मिलती। वे मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर हर किसी पर हमला करने लगते हैं। इस शब्द के चयन पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई और इसके जवाब में एक्स (पहले ट्विटर) पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक पैरोडी अकाउंट बना दिया गया। इस पेज ने खुद को 'युवाओं का, युवाओं द्वारा और युवाओं के लिए' एक धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी और लोकतांत्रिक मोर्चा घोषित कर दिया है।
महज 24 घंटे में जुड़े हजारों सदस्य, रखा 5 सूत्री एजेंडा
इस अनूठे और व्यंग्यात्मक मोर्चे को सोशल मीडिया पर जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। लॉन्च होने के महज 24 घंटे के भीतर एक्स पर इसके 15,000 से अधिक फॉलोअर्स हो गए, और संगठन ने दावा किया है कि अब तक 40,000 से ज्यादा लोग इसके सदस्य बन चुके हैं। अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इस ग्रुप ने खुद को 'प्रणाली द्वारा भुला दिए गए बेरोजगारों और सुस्त लोगों की आवाज' बताया है। इस डिजिटल मोर्चे ने साल 2029 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपना एक '5-पॉइंट एजेंडा' भी जारी किया है और बीजेपी को छोड़कर देश के सभी विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से लोकतंत्र बचाने के लिए समर्थन मांगा है।
इस अनोखी पार्टी में सदस्यता के लिए क्या हैं शर्तें?
बेरोजगारी: व्यक्ति किसी मजबूरी, अपनी मर्जी या सिद्धांतों की वजह से बेरोजगार होना चाहिए।
शारीरिक सुस्ती: सदस्य शारीरिक रूप से सुस्त हो, भले ही उसका दिमाग लगातार तेजी से दौड़ता रहे।
हर वक्त ऑनलाइन: शौचालय के ब्रेक सहित दिन में कम से कम 11 घंटे इंटरनेट पर सक्रिय रहना अनिवार्य है।
बेहतरीन तंज कसना: सदस्य को हर जरूरी और गंभीर मुद्दे पर बेहद धारदार, ईमानदार और पेशेवर तरीके से अपनी बात रखनी आनी चाहिए।
बिना भेदभाव एंट्री: इस मोर्चे में शामिल होने के लिए किसी भी व्यक्ति की जाति, धर्म या लिंग की कोई जांच नहीं की जाती है।
टीएमसी नेताओं ने सोशल मीडिया पर मांगी सदस्यता
इस बढ़ते डिजिटल अभियान को उस समय बड़ी सियासी ताकत मिली जब टीएमसी नेता कीर्ति आजाद और महुआ मोइत्रा ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। 1983 वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य रहे कीर्ति आजाद ने एक्स पर पूछा कि इस पार्टी में शामिल होने के लिए क्या योग्यता चाहिए? इस पर पेज ने उनका स्वागत करते हुए लिखा कि '1983 का विश्व कप जीतना ही इसके लिए बहुत बड़ी योग्यता है।' इसके तुरंत बाद महुआ मोइत्रा ने भी मजाकिया लहजे में इसमें शामिल होने की इच्छा जताई, जिस पर इस पेज ने उन्हें 'लोकतंत्र के लिए लड़ने वाली योद्धा' बताते हुए इस कुनबे में शामिल कर लिया।
विवाद बढ़ता देख मुख्य न्यायाधीश ने दी सफाई
इस पूरे मामले पर चौतरफा आलोचना झेलने के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने खुद सामने आकर अपनी टिप्पणी पर स्थिति साफ की है। सीजेआई ने कहा कि उनकी मौखिक टिप्पणियों को मीडिया के एक वर्ग द्वारा पूरी तरह तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, जिससे उन्हें बेहद दुख हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा देश के बेरोजगार युवाओं की आलोचना करना बिल्कुल नहीं था। उन्होंने साफ किया कि वह उन लोगों की आलोचना कर रहे थे जो फर्जी और बोगस डिग्रियों के सहारे वकालत, मीडिया या सोशल मीडिया जैसे नोबल प्रोफेशन में घुस आते हैं और परजीवी की तरह काम करते हैं। सीजेआई ने युवाओं की तारीफ करते हुए खबरों को पूरी तरह निराधार बताया।
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