
हार के बाद ममता बनर्जी को याद आया इंडिया गठबंधन , बैठक का किया आवाहन
बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस से मांगा समर्थन, जून में होने वाली विपक्षी बैठक में सुलझेंगे आपसी कलह के बड़े मुद्दे।
Mamata Banerjee : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ममता बनर्जी को अचानक से राष्ट्रिय स्टार पर विपक्षी दलों को एकजुट करने की कवायद में जुट गयी हैं। इसी क्रम में ममता बनर्जी ने उस कांग्रेस से भी सहयोग की उम्मीद जताई है, जिसके साथ उसके रिश्ते ठीक नहीं रहे हैं। ज्ञात रहे कि इस विधानसभा चुनाव में टीएमसी को महज 80 सीटें ही मिल पायीं। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं। उन्हें उनके पुराने साथी शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव में मात दी। इस बड़े झटके के बाद ममता बनर्जी ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने विपक्षी इंडिया गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने की मांग की है। यह गठबंधन जुलाई 2023 में बनने के बाद से लगातार संघर्ष कर रहा है।
दिल्ली से मदद की आस में तृणमूल कांग्रेस का बड़ा कदम
इस चुनावी झटके ने ममता बनर्जी को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। वे पिछले 15 सालों से बंगाल में बीजेपी को रोक रही थीं। लेकिन अब वे अपने वजूद को बचाने के लिए दिल्ली का रुख कर रही हैं। वे कांग्रेस के सहयोग से अपनी राजनीतिक जमीन वापस पाना चाहती हैं। दोनों पार्टियों के बीच रिश्ते हमेशा से बहुत खराब रहे हैं। इसलिए ममता बनर्जी के इस नए रुख ने सबको हैरान कर दिया है।
बैठक को लेकर गठबंधन के बड़े सहयोगियों में भारी भ्रम
ममता बनर्जी की इस पहल पर अभी बाकी विपक्षी दलों ने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस के मीडिया विभाग ने इस बैठक की जानकारी होने से साफ इनकार किया है। हालांकि कांग्रेस के कुछ सूत्रों ने जून में बैठक होने के संकेत दिए हैं। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने भी इस संबंध में कोई जानकारी होने से मना किया है। सपा नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी सीधे अखिलेश यादव से बात करेंगी।
राहुल गांधी और ममता बनर्जी के बीच बेहद पेचीदा रिश्ते
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संबंध हमेशा से उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने टीएमसी पर तीखे हमले किए थे। हालांकि चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी ने ममता को दिलासा भी दिया था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी और चुनाव आयोग ने वोट चुराए हैं। इसी वजह से तृणमूल कांग्रेस की सीटें इतनी कम हुई हैं।
चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट पर विपक्ष के गंभीर आरोप
पिछले कुछ महीनों से पूरा विपक्ष चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमलावर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकारी एजेंसियां सत्ताधारी दल की मदद कर रही हैं। मतदाता सूचियों के विशेष संशोधन को लेकर भी भारी विवाद चल रहा है। विपक्ष का कहना है कि इस कवायद से उनके मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। इन तमाम विवादों के बीच गठबंधन के अंदर खींचतान मची है।
तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ी दरार
इंडिया गठबंधन के भीतर सिर्फ बंगाल ही नहीं बल्कि दक्षिण में भी कलह है। तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन अब पूरी तरह टूट चुका है। वहां कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके का समर्थन किया है। कांग्रेस की मदद से ही वहां टीवीके ने अपनी सरकार बनाई है। इस घटनाक्रम ने इंडिया गठबंधन की अंदरूनी कमजोरी को उजागर किया है।
संसद और राज्यों की राजनीति को अलग रखने की नीति
इन तमाम विवादों के बावजूद कांग्रेस का मानना है कि राज्यों की राजनीति अलग है। कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन को मजबूत रहना चाहिए। जैसे केरल में कांग्रेस और वामपंथी दल आमने-सामने चुनाव लड़ते हैं। लेकिन केंद्र में वे दोनों पार्टियां एक साथ खड़ी दिखाई देती हैं। यही नियम तृणमूल और समाजवादी पार्टी पर भी लागू होता है।
उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव के लिए नया समीकरण
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी तैयारियां तेज हो गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस और सपा मिलकर चुनाव लड़ेंगी। इंडिया गठबंधन के भीतर सीटों के लिहाज से सपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस और फिर डीएमके का नंबर आता है। उत्तर प्रदेश का चुनाव इस गठबंधन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा।
डीएमके के सख्त रुख से गठबंधन की मुश्किलें बढ़ीं
तमिलनाडु के सियासी घटनाक्रम के बाद डीएमके ने बड़ा कदम उठाया है। डीएमके ने संसद के दोनों सदनों में अलग बैठने की व्यवस्था मांगी है। इस कदम से डीएमके ने खुद को कांग्रेस से दूर कर लिया है। अब यह देखना होगा कि क्या डीएमके इस गठबंधन में बनी रहेगी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय डीएमके एनडीए का हिस्सा थी।
टीवीके की इंडिया गठबंधन में एंट्री की पूरी संभावना
तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज टीवीके भी अब इस गठबंधन में शामिल हो सकती है। चूंकि टीवीके और कांग्रेस का गठबंधन है इसलिए इसकी पूरी उम्मीद है। वर्तमान में टीवीके का कोई सांसद संसद में नहीं है। लेकिन अगले महीने तमिलनाडु में राज्यसभा की उपचुनाव सीटें खाली हो रही हैं। इस उपचुनाव के जरिए टीवीके अपनी पहली सीट हासिल कर सकती है।
बीजेपी को हराने का डर ही विपक्ष की असली ताकत
इंडिया गठबंधन के सामने इस समय भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्षेत्रीय दलों को डर है कि कांग्रेस राज्यों में जमीन नहीं छोड़ेगी। इसके बावजूद वे जानते हैं कि बीजेपी का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस जरूरी है। बीजेपी को हराने का डर ही इस पूरे गठबंधन को जोड़कर रख सकता है। ममता बनर्जी ने भी इसी बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया है।
संसद के भीतर एकजुटता बनाए रखने की आखिरी कोशिश
संसद के भीतर विपक्षी एकता को बनाए रखने के लिए बैठकें होती रही हैं। इन बैठकों में आम आदमी पार्टी भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है। पिछले संसद सत्र के दौरान बीजू जनता दल ने भी विपक्ष का साथ दिया था। अब देखना होगा कि ममता बनर्जी की इस नई पहल पर क्या जवाब मिलता है। क्या जून में यह महाबैठक हो पाएगी इस पर नजरें हैं।
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