
बिगड़ते समीकरण सुधारने की अमेरिकी कवायद, पीएम ने समझा रूबियो का संदेश
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पीएम मोदी से व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की। टैरिफ और भू-राजनीतिक तनाव के बीच रिश्ते सुधारने पर जोर रहा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की। ट्रंप के करीबी माने जाने वाले रूबियो की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका संबंधों में आई हालिया खटास को कम करना और रणनीतिक साझेदारी को फिर से मजबूती देना माना जा रहा है।
दरअसल, अमेरिका की टैरिफ नीतियों और पाकिस्तान व चीन के साथ उसके बढ़ते संपर्कों ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के रिश्तों में तनाव पैदा किया है। ऐसे समय में पश्चिम एशिया संकट और ईरान युद्ध के बीच रूबियो की यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को रफ्फू करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
भारत को ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने पर जोर
भारत यात्रा से पहले ही मार्को रूबियो ने संकेत दे दिए थे कि अमेरिका भारत को ऊर्जा निर्यात बढ़ाना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान भी उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों को भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम बताते हुए कहा कि इससे भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता ला सकता है।
रूबियो के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाजार को “बंधक” नहीं बनाने देगा। दरअसल, ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट ने भारत को रूसी तेल से दूर करने की अमेरिकी रणनीति को झटका दिया है।
टैरिफ विवाद से बढ़ी दूरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से भारत को अपने रणनीतिक सहयोगी के रूप में मजबूत करना चाहते हैं ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन और रूस के प्रभाव का मुकाबला किया जा सके। लेकिन, भारत पर लगाए गए भारी अमेरिकी टैरिफ ने दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचाया।हालांकि, कुछ टैरिफ बाद में अंतरिम समझौते के तहत वापस ले लिए गए, लेकिन व्यापक व्यापार समझौता अब तक फाइनल नहीं हो पाया है। फरवरी में दोनों देशों ने व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई थी, जिसका उद्देश्य भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाना था। हालांकि बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ रद्द किए जाने के बाद बातचीत की रफ्तार धीमी पड़ गई।
पाकिस्तान और चीन फैक्टर से बढ़ी चिंता
इस बीच अमेरिका का पाकिस्तान के साथ बढ़ता जुड़ाव भी भारत के लिए चिंता का कारण बना है। पाकिस्तान ईरान युद्ध को खत्म कराने की कोशिशों में अहम मध्यस्थ के रूप में उभरा है। वहीं, चीन के साथ अमेरिका के बदलते समीकरणों ने भी नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ाई हैं।द एशिया ग्रुप के दक्षिण एशिया विशेषज्ञ बसंत संघेरा ने कहा कि ट्रंप के नजरिये ने भारत में अमेरिका को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। उनके मुताबिक, दोनों देश अब उन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं जहां सहमति संभव है।
पीएम मोदी को व्हाइट हाउस आने का न्योता
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि मार्को रूबियो ने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निकट भविष्य में व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया है।बैठक के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत और अमेरिका वैश्विक शांति, सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।
क्वाड और रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
रूबियो अगले सप्ताह भारत में होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि व्यापार विवाद और पश्चिम एशिया संकट के कारण क्वाड समूह की सक्रियता पर असर पड़ा है।
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के रिचर्ड रोसो का कहना है कि व्यापार समझौते में देरी और लगातार बढ़ते तनाव का असर भारत-अमेरिका संबंधों के अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। बावजूद इसके, दोनों देश रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं।

