अब 543 से बढ़कर 850 होंगी लोकसभा सीटें! केंद्र सरकार ला रही है परिसीमन विधेयक
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अब 543 से बढ़कर 850 होंगी लोकसभा सीटें! केंद्र सरकार ला रही है परिसीमन विधेयक

सरकार के इस नए खाके के मुताबिक, लोकसभा की कुल 850 सीटों में से 815 सीटें विभिन्न राज्यों से होंगी, जबकि शेष 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित होंगी।


देश की राजनीतिक संरचना में एक ऐतिहासिक बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने लोकसभा सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। मंगलवार (14 अप्रैल) को सामने आए प्रस्ताव के अनुसार, सरकार लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना बना रही है।

850 सीटों का खाका

सरकार के इस नए खाके के मुताबिक, लोकसभा की कुल 850 सीटों में से 815 सीटें विभिन्न राज्यों से होंगी, जबकि शेष 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) के लिए आरक्षित होंगी। इस बड़े बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है।

संसद के मौजूदा बजट सत्र को इसी उद्देश्य के लिए बढ़ा दिया गया है। 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक सदन की तीन दिवसीय विशेष बैठक बुलाई गई है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार गुरुवार (16 अप्रैल) को संसद में परिसीमन से संबंधित महत्वपूर्ण विधेयक (Bills) पेश करेगी। इस संबंध में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक सांसदों के बीच सर्कुलेट कर दिया गया है।

स्टालिन की मोदी सरकार को कड़ी चेतावनी

केंद्र सरकार के इस एकतरफा प्रस्ताव ने दक्षिण भारत के राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके (DMK) प्रमुख एम.के. स्टालिन ने इस प्रस्ताव पर अत्यंत तीखी प्रतिक्रिया दी है और केंद्र सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

मंगलवार को जारी एक वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री स्टालिन ने मोदी सरकार को आगाह किया कि यदि परिसीमन की आड़ में तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुँचाया गया या उत्तर भारत के राज्यों की राजनीतिक शक्ति को असमान रूप से बढ़ाया गया, तो तमिलनाडु में "महाआंदोलन" होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ "पूरी ताकत के साथ विरोध" किया जाएगा, जिससे पूरा तमिलनाडु ठप हो जाएगा।

'गुप्त प्रक्रिया' और एकतरफा फैसले का आरोप

स्टालिन ने केंद्र सरकार पर परिसीमन प्रक्रिया को रहस्य के घेरे में रखने और एकतरफा कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में कहा, "भाजपा नीत केंद्र सरकार बिना डीएमके तो दूर, किसी भी राजनीतिक दल या किसी भी राज्य सरकार से परामर्श किए, एकतरफा आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है।"

उन्होंने इस प्रक्रिया पर गहरा शक जताते हुए कहा, "हमें यह भी नहीं पता कि यह परिसीमन अभ्यास कैसे किया जाने वाला है। प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन के संबंध में अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।" स्टालिन ने जोर देकर कहा कि जब इस पूरी प्रक्रिया के चारों ओर गोपनीयता का पर्दा है, तो यह संदेह केवल मजबूत होता है कि इसके नीचे कोई गंभीर खतरा छिपा है। उन्होंने कहा कि दक्षिण के राज्यों के लोग इस गुप्त प्रक्रिया को लेकर गहरे शक और चिंता में हैं।

परिसीमन का विवाद: जनसंख्या vs प्रतिनिधित्व

परिसीमन का मुद्दा भारत में हमेशा से संवेदनशील रहा है। लोकसभा सीटों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक) ने पिछले दशकों में जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में शानदार काम किया है, जबकि उत्तर भारत के कई राज्यों की जनसंख्या तेजी से बढ़ी है।

दक्षिण के राज्यों को डर है कि यदि 2026 के बाद नए सिरे से परिसीमन होता है और सीटों की संख्या बढ़ती है, तो जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों (दक्षिण) की सीटें कम हो जाएंगी और जनसंख्या बढ़ाने वाले राज्यों (उत्तर) की सीटें बढ़ जाएंगी। इससे राष्ट्रीय राजनीति में दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व कमजोर होगा और हिंदी भाषी उत्तरी राज्यों का वर्चस्व बढ़ जाएगा। स्टालिन का विरोध इसी आशंका पर आधारित है।

अब सबकी नजरें 16 अप्रैल को संसद में पेश होने वाले विधेयक पर टिकी हैं, जहाँ केंद्र सरकार को दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं का जवाब देना होगा।

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