मिसाल पेश करेंगे पीएम मोदी, प्रधानमंत्री के काफिले में 50% की कटौती
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फाइल फोटो।

मिसाल पेश करेंगे पीएम मोदी, प्रधानमंत्री के काफिले में 50% की कटौती

ईंधन संरक्षण की दिशा में पीएम मोदी की बड़ी पहल सामने आई है। प्रधानमंत्री के काफिले में 50% की कटौती अति विशिष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल और मितव्ययिता के बीच संतुलन है।


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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और संभावित ऊर्जा संकट के मद्देनजर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वयं के काफिले में 50 प्रतिशत तक की कटौती करने का निर्देश दिया है। आधिकारिक सूत्रों और समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) की रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्णय देशव्यापी मितव्ययिता अभियान और ईंधन बचत उपायों के हिस्से के रूप में लिया गया है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले विशिष्ट बल 'विशेष सुरक्षा समूह' (SPG) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि काफिले में वाहनों की संख्या कम की जाए, हालांकि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सुरक्षा प्रोटोकॉल और अनिवार्य सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता न हो।

इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर और अतिरिक्त खर्च पर रोक

प्रधानमंत्री ने न केवल काफिले के आकार को छोटा करने का निर्देश दिया है। बल्कि उन्होंने सुरक्षा बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के अधिकतम उपयोग पर भी बल दिया है। इसी के साथ उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने के लिए किसी भी नए वाहन की खरीद नहीं की जाएगी। इस निर्णय का कार्यान्वयन प्रधानमंत्री की हालिया गुजरात और असम यात्राओं के दौरान पहले ही देखा जा चुका है। गौरतलब है कि हैदराबाद में अपने संबोधन के तुरंत बाद ही प्रधानमंत्री ने इन उपायों को जमीनी स्तर पर लागू करने के आदेश दे दिए थे, जिसका उद्देश्य राष्ट्र के सामने एक व्यक्तिगत उदाहरण पेश करना है।

राष्ट्र के नाम सात बड़ी अपीलें और विदेशी मुद्रा संरक्षण

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सप्ताह सात प्रमुख अपीलें की हैं, जिन्हें पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण उत्पन्न आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया है कि वे निजी वाहनों के स्थान पर मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें ताकि पेट्रोल-डीजल की खपत कम हो सके। इसके अतिरिक्त, विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने लोगों से कम से कम एक साल तक सोने की खरीद से बचने और अनावश्यक विदेश यात्राओं को स्थगित करने का भी आह्वान किया है। उन्होंने सरकारी और निजी स्तर पर आभासी बैठकों (Virtual Meetings) को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया है।

राजनीतिक समर्थन और विपक्षी दलों का विरोध

प्रधानमंत्री की इस पहल को भाजपा नेताओं और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक समर्थन मिल रहा है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की है कि दिल्ली सरकार के मंत्री, विधायक और अधिकारी विभागीय कार्यों के लिए कम से कम वाहनों का उपयोग करेंगे और कारपूलिंग को प्राथमिकता देंगे। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में विपक्ष ने भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि एक तरफ प्रधानमंत्री बचत की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके नेता बड़ी संख्या में वाहनों के काफिले के साथ पदभार ग्रहण करने पहुँच रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री के संदेश का पालन सबसे पहले उनके अपने नेताओं को करना चाहिए।

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