
मोदी कैबिनेट में बड़ा बदलाव तय? कई मंत्रियों की बदल सकती है जिम्मेदारी
नरेंद्र मोदी सरकार के संभावित कैबिनेट फेरबदल में कई बड़े मंत्रालयों में बदलाव, सहयोगी दलों और RSS को प्रतिनिधित्व, साथ ही युवा, महिला और OBC नेताओं पर फोकस रहने के संकेत हैं।
9 जून 2024 को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपनी नई केंद्रीय मंत्रिपरिषद का गठन दो स्पष्ट संदेशों के साथ किया था।पहला संदेश यह था कि अमित शाह, राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, एस. जयशंकर समेत कई वरिष्ठ मंत्रियों को उनके पुराने मंत्रालयों में ही बरकरार रखकर सरकार ने प्रशासनिक निरंतरता का संकेत दिया। इसके साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के बहुमत में आई कमी को सरकार की कार्यशैली या मंत्रियों की कथित नाकामी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
दूसरा बड़ा संदेश सहयोगी दलों को लेकर था। प्रधानमंत्री मोदी के पहले दो कार्यकालों के मुकाबले तीसरे कार्यकाल की मंत्रिपरिषद में भाजपा के सहयोगी दलों के करीब एक दर्जन नेताओं को मंत्री बनाया गया। इसे इस बात का संकेत माना गया कि अब सहयोगियों को मंत्री पद देना राजनीतिक उदारता नहीं, बल्कि मजबूरी बन गया है, क्योंकि भाजपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी।
अब मोदी 3.0 सरकार के पहले बड़े कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। भाजपा और एनडीए से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह फेरबदल केवल मंत्रियों की अदला-बदली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अगले चार वर्षों की सरकार की राजनीतिक दिशा और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति भी तय करेगा। इससे पहले होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।
हालांकि यह देखना भी अहम होगा कि क्या इस फेरबदल के जरिए सरकार बेरोजगारी, लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक जैसे मुद्दों पर किसी तरह की जवाबदेही भी तय करती है या नहीं। पिछले कुछ समय से इन मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर रहा है।
माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र, जो जुलाई के मध्य के आसपास शुरू हो सकता है, उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में बड़ा बदलाव कर सकते हैं। इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लेकर हो रही है।
क्या वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी जाएगी?
सरकार के आर्थिक मोर्चे पर प्रदर्शन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि संभावित फेरबदल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी वापस ली जा सकती है। हालांकि, भाजपा और सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि ऐसा होता भी है, तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि निर्मला सीतारमण को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, ऐसा कदम सरकार की विफलता या अक्षमता की स्वीकारोक्ति माना जाएगा, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 12 वर्षों से लगातार बचते रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय मिल सकता है
सूत्रों का दावा है कि यदि निर्मला सीतारमण से वित्त मंत्रालय लिया जाता है, तो उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया जा सकता है। इस स्थिति में वह मौजूदा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जगह लेंगी।भाजपा के रणनीतिकार इस बदलाव को पदावनति (डिमोशन) के बजाय "नई चुनौती" के रूप में पेश कर सकते हैं। निर्मला सीतारमण देश की सबसे लंबे समय तक लगातार वित्त मंत्री रहने वाली नेता हैं।
धर्मेंद्र प्रधान का क्या होगा?
यदि निर्मला सीतारमण शिक्षा मंत्रालय संभालती हैं, तो सबसे बड़ा सवाल मौजूदा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर होगा।पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान को किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं, कुछ सूत्रों का कहना है कि उन्हें मंत्रिमंडल से हटाकर पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
पहली नजर में यदि धर्मेंद्र प्रधान मंत्रिमंडल से बाहर होते हैं, तो इसे विपक्ष और छात्रों की ओर से लगातार उठ रही उनकी इस्तीफे की मांग के आगे सरकार के झुकने के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी इसे युवाओं की भावनाओं का सम्मान करने वाले फैसले के रूप में पेश कर सकती है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसा कदम विपक्ष की उस रणनीति को भी कमजोर कर सकता है, जिसके तहत वह संसद में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरने और देशभर में अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।
निर्मला सीतारमण की जगह कौन?
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रमुख मंत्रालयों की जिम्मेदारी पूर्व नौकरशाहों को सौंपने की अपनी रणनीति आगे भी जारी रख सकते हैं।इसी क्रम में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास का नाम संभावित नए वित्त मंत्री के रूप में चर्चा में है। यदि फेरबदल में निर्मला सीतारमण से वित्त मंत्रालय लिया जाता है, तो शक्तिकांत दास उनके संभावित उत्तराधिकारी हो सकते हैं।
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इस बार फेरबदल केवल मंत्रालयों के बंटवारे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए सरकार और संगठन दोनों के स्तर पर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश होगी।
अश्विनी वैष्णव और हरदीप पुरी की जिम्मेदारियां घट सकती हैं
सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार में नौकरशाही से राजनीति में आए कम से कम दो मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बड़ी कटौती की जा सकती है।फिलहाल रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय संभाल रहे अश्विनी वैष्णव से एक बड़ा मंत्रालय वापस लिया जा सकता है।वहीं केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को या तो मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है या फिर उन्हें अपेक्षाकृत कम महत्व वाला मंत्रालय सौंपा जा सकता है।
RSS की पसंद के नेताओं को मिल सकती है जगह
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में संभावित कैबिनेट विस्तार में RSS की पसंद के कुछ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।बताया जा रहा है कि RSS मध्य प्रदेश भाजपा के एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, महाराष्ट्र से हाल ही में चुने गए एक राज्यसभा सांसद और बिहार के एक वरिष्ठ लोकसभा सांसद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में देखना चाहता है।
संगठन और सरकार में होगा बड़ा फेरबदल
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में सूत्रों का कहना है कि 2029 तक जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां के कुछ केंद्रीय मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है।इसके साथ ही लंबे समय से संगठन में काम कर रहे कुछ नेताओं को केंद्र सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है।
पंजाब में चुनावी जिम्मेदारी मिल सकती है रवनीत बिट्टू को
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को इस महीने राज्यसभा का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया। अब उन्हें अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी संगठन में भेजा जा सकता है।वहीं पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता तरुण चुघ, जिन्हें हाल ही में राज्यसभा भेजा गया है, उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
दल बदलकर आए सांसदों पर अभी फैसला बाकी
पिछले तीन महीनों में आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) छोड़कर एनडीए में शामिल हुए कई सांसदों के भविष्य पर भी सबकी नजर रहेगी।सूत्रों के अनुसार, RSS और भाजपा का एक वर्ग चाहता है कि इन नेताओं को फिलहाल मंत्रिमंडल में जगह न दी जाए। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह चुनावी जरूरतों को देखते हुए कुछ अपवाद करने के पक्ष में बताए जा रहे हैं।
पंजाब से AAP छोड़कर आए सांसद को मिल सकता है मौका
भाजपा के पास पंजाब में बड़े नेताओं की कमी को देखते हुए अप्रैल में आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सांसदों में से कम से कम एक नेता को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में राज्य मंत्री बनाया जा सकता है।
तृणमूल छोड़कर आए सांसदों को नहीं मिल सकती जगह
हालांकि तृणमूल कांग्रेस छोड़कर हाल ही में एनडीए के साथ आए 20 सांसदों को फिलहाल मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना कम बताई जा रही है।सूत्रों का कहना है कि RSS और भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई का एक वर्ग मानता है कि इन सांसदों से दूरी बनाए रखना बेहतर होगा। उनका तर्क है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार केवल ममता बनर्जी के शासन के खिलाफ जनाक्रोश की वजह से नहीं हुई, बल्कि इन सांसदों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी जनता की नाराजगी का कारण थे।
शिंदे गुट को मिल सकता है बड़ा इनाम
सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना चाहती है कि उद्धव ठाकरे गुट के छह लोकसभा सांसदों को अपने साथ लाने के बदले उसे मोदी सरकार में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिले।बताया जा रहा है कि यदि शिंदे गुट को कैबिनेट में जगह मिलती है तो केवल उन्हीं सांसदों को मंत्री बनाया जाएगा, जो 2024 का लोकसभा चुनाव शिंदे शिवसेना के टिकट पर जीतकर आए थे।
चूंकि जून 2024 में शिंदे गुट को कैबिनेट मंत्री का पद नहीं मिला था, इसलिए इस बार एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। इसके अलावा पार्टी को मौजूदा राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव के अलावा एक और राज्य मंत्री का पद भी मिल सकता है।
नीतीश कुमार को भी मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
एनडीए के सहयोगी दलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार की भूमिका पर भी सबकी नजर रहेगी।सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल में राज्यसभा सदस्य बनने के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ चुके नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री मोदी केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते हैं। यदि ऐसा होता है तो अश्विनी वैष्णव से लिया गया कोई बड़ा मंत्रालय उन्हें सौंपा जा सकता है।
फेरबदल का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश
सूत्रों का कहना है कि इस कैबिनेट फेरबदल के जरिए भाजपा युवाओं, पिछड़े वर्गों और महिलाओं को बड़ा प्रतिनिधित्व देने का संदेश देना चाहती है।संभावना है कि एक दर्जन से अधिक राज्य मंत्रियों को हटाकर उनकी जगह युवा सांसदों को मौका दिया जाए। इनमें पहली बार लोकसभा पहुंचे कुछ सांसद भी शामिल हो सकते हैं।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिपरिषद में महिलाओं की संख्या बढ़ा सकते हैं। इसे लोकसभा और विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने की उनकी राजनीतिक पहल से जोड़कर देखा जा रहा है।
यूपी चुनाव पर भी रहेगा पूरा फोकस
भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश सबसे अहम चुनावी राज्य बना हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी जुलाई 2021 की तरह इस बार भी विभिन्न पिछड़ी जातियों के सांसदों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हैं।भाजपा का मानना है कि उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग उसकी चुनावी सफलता की सबसे मजबूत नींव है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी इस सामाजिक आधार को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

