
हजारों डॉक्टरों का हल्ला बोल, NEET-SS काउंसलिंग रिफंड पर बढ़ा बवाल
NEET-SS काउंसलिंग की लाखों की जमा राशि महीनों से अटकी है। अब परेशान डॉक्टरों ने पारदर्शिता और जल्द रिफंड के लिए कोर्ट का रुख किया है।
देशभर के हजारों युवा डॉक्टर आरोप लगा रहे हैं कि मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के पास उनकी करोड़ों रुपये की रिफंडेबल काउंसलिंग जमा राशि महीनों से अटकी हुई है। यह मामला NEET सुपर स्पेशियलिटी (NEET-SS) काउंसलिंग चक्र पूरा होने के काफी समय बाद भी लंबित है, जिससे डॉक्टरों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, बार-बार शिकायतें की जा रही हैं और अब मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
MCC के नियमों के तहत NEET-SS काउंसलिंग में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को 2 लाख रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी राशि (कुल 2.5 लाख रुपये, जिसमें कुछ हिस्सा नॉन-रिफंडेबल होता है) जमा करनी होती है। यह राशि इस बात को सुनिश्चित करने के लिए होती है कि उम्मीदवार सीट ब्लॉक न करें। काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद, चाहे सीट मिले या न मिले, नियमों का पालन करने पर यह रकम वापस कर दी जानी चाहिए।
कर्ज लेकर जमा की राशि
कई उम्मीदवारों का कहना है कि पिछले दो काउंसलिंग चक्रों की रिफंड राशि महीनों से लंबित है और MCC की ओर से न कोई स्पष्ट जानकारी दी जा रही है, न कोई समयसीमा और न ही शिकायतों का समाधान हो रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले 347 उम्मीदवारों में शामिल शाश्वत लोहिया ने बताया कि उन्हें यह राशि जमा करने के लिए कर्ज लेना पड़ा।
उन्होंने कहा, “2024 में हमने 2 लाख रुपये जमा किए थे, जो मैंने 14 प्रतिशत ब्याज पर ओवरड्राफ्ट लेकर दिए। 8-10 महीने बीत चुके हैं, जबकि हमें 3 महीने में पैसा वापस मिलना चाहिए था।”
संवाद की कमी से बढ़ी परेशानी
लोहिया ने बताया कि देरी जितनी परेशान करने वाली है, उससे ज्यादा चिंता की बात संवाद की कमी है। “सबसे खराब बात यह है कि कोई जवाबदेही नहीं है। न कोई समयसीमा है, न कोई स्पष्टीकरण और न ही कोई जानकारी। हम पूरी तरह अंधेरे में हैं,”। उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने हर संभव तरीका अपनाया—ईमेल, फोन कॉल, आरटीआई और सोशल मीडिया पर अधिकारियों को टैग करना—लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
धीमी गति से हो रहा रिफंड
अब कुछ रिफंड शुरू हुए हैं, लेकिन प्रक्रिया बेहद धीमी है। लोहिया के अनुसार, “हर दिन केवल 5-6 लोगों को ही पैसा मिल रहा है। इस गति से सभी को रिफंड मिलने में बहुत समय लगेगा।”
कुछ को दो चक्रों का भी नहीं मिला पैसा
केरल के एर्नाकुलम के उम्मीदवार प्रणव आरके ने बताया कि उन्हें 2024 और 2025 दोनों काउंसलिंग चक्रों की राशि अब तक नहीं मिली है।उन्होंने कहा, “2024 में मुझे सीट नहीं मिली थी, इसलिए 2 लाख रुपये वापस मिलने चाहिए थे। 2025 में मुझे CMC वेल्लोर में सीट मिली, जिसे मैंने स्वीकार कर लिया। नियमों के अनुसार दोनों बार की राशि मुझे मिलनी चाहिए, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं मिला।”
प्रणव ने बताया कि यह पैसा उनके परिवार की बचत से आया था। “4 लाख रुपये कोई छोटी रकम नहीं है। इतने लंबे समय तक पैसा फंसा रहने से हमारी आर्थिक योजना प्रभावित होती है,” उन्होंने कहा।
करियर पर पड़ा असर
आंध्र प्रदेश की डॉक्टर सुप्रिया पुलिवर्थी के लिए यह देरी उनके करियर निर्णयों को भी प्रभावित कर रही है। उन्होंने बताया कि कम स्टाइपेंड और अन्य खर्चों के कारण उन्हें अपने भाई से पैसे उधार लेने पड़े।“मैंने सोचा था कि एक-दो महीने में पैसा वापस कर दूंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगले काउंसलिंग चक्र के लिए मुझे फिर से 2 लाख रुपये की व्यवस्था करनी पड़ी। इस तरह कुल 4 लाख रुपये फंस गए,”।
सुप्रिया ने बताया कि इस अनिश्चितता के कारण उन्हें नौकरी छोड़कर घर पर रहकर परीक्षा की तैयारी करनी पड़ी, जिससे उनकी आय भी बंद हो गई। “आपको समझ नहीं आता कि आगे क्या होगा। कोई जवाब देने वाला नहीं है, और यह स्थिति बेहद असहाय बना देती है,” उन्होंने कहा।
उठे सवाल
उम्मीदवारों का अनुमान है कि हजारों डॉक्टर इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं और प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपये महीनों से अटके हुए हैं। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी राशि पर मिलने वाले ब्याज का क्या हो रहा है।
कोर्ट पहुंचा मामला
अब यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंच गया है, जहां याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि रिफंड में देरी मनमानी और आर्थिक कठिनाई पैदा करने वाली है। उन्होंने तत्काल रिफंड, समयबद्ध प्रक्रिया और काउंसलिंग सिस्टम में पारदर्शिता की मांग की है।याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इस मामले की सुनवाई 4 मई को निर्धारित है।

