
परीक्षा पोर्टलों की सुरक्षा पर संकट, NTA और CBSE दोनों घेरे में
CBSE के OSM विवाद के बीच NTA के री-एग्जाम पोर्टल में सुरक्षा खामियों का दावा सामने आया है। डेटा सुरक्षा और तकनीकी गड़बड़ियों पर सवाल उठ रहे हैं।
देश की केंद्रीय शैक्षणिक संस्थाओं के डिजिटल प्लेटफॉर्म एक बार फिर सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर सवालों के घेरे में आ गए हैं। हाल ही में सीबीएसई (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विवाद सामने आने के बाद अब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के री-एग्जाम पोर्टल की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।युवा साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं और छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों ने भारत की प्रमुख परीक्षा संस्थाओं की डिजिटल व्यवस्था और डेटा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
NTA के री-एग्जाम पोर्टल पर गंभीर सुरक्षा खामियों का दावा
NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के बाद NTA पहले से ही पुनर्परीक्षा आयोजित करने की चुनौती का सामना कर रही है। इसी बीच 16 वर्षीय स्वयंभू साइबर सुरक्षा विश्लेषक रायलन अनिल ने NTA के री-एग्जाम पोर्टल में गंभीर सुरक्षा खामियों का दावा किया है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गई जानकारी में रायलन ने आरोप लगाया कि पोर्टल में बेहद कमजोर सुरक्षा व्यवस्थाओं के कारण एडमिनिस्ट्रेटिव और उम्मीदवारों से जुड़ा संवेदनशील डेटा जोखिम में था।
उनके अनुसार, कथित खामी के कारण हजारों परीक्षा केंद्रों, पर्यवेक्षकों (Observers), सेंटर कोऑर्डिनेटरों और अन्य अधिकारियों की व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर तक पहुंच संभव थी।हालांकि NTA ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन आरोपों ने छात्रों, शिक्षकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
एडमिन पैनल तक पहुंच की आशंका
साइबर शोधकर्ता का दावा है कि यह समस्या केवल डेटा देखने तक सीमित नहीं थी। कथित रूप से किसी अनधिकृत व्यक्ति को पोर्टल के केंद्रीय प्रशासनिक डैशबोर्ड तक पहुंच मिल सकती थी।
इससे पर्यवेक्षकों के रिकॉर्ड प्रबंधन, बड़े पैमाने पर डेटा डाउनलोड करने, नियुक्ति पत्र तैयार करने, सिस्टम टेम्पलेट अपलोड करने और प्रशासनिक सेटिंग्स में बदलाव जैसी संवेदनशील गतिविधियां प्रभावित हो सकती थीं।
इसी दौरान कई उपयोगकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि पोर्टल का लिंक अचानक "404 Not Found" त्रुटि दिखाने लगा, जिससे संदेह और बढ़ गया।
मजबूत डिजिटल सुरक्षा की जरूरत
NTA पर पहले से ही राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संचालन को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव बना हुआ है। ऐसे में नए आरोपों ने परीक्षा संस्थाओं के डिजिटल ढांचे की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि करोड़ों छात्रों और हजारों संस्थानों से जुड़ा डेटा संभालने वाले प्लेटफॉर्म पर अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
संसद तक पहुंचा CBSE का OSM विवाद
इधर, सीबीएसई के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठे विवाद ने अब संसदीय स्तर पर भी दस्तक दे दी है।
संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है जिनमें कक्षा 12 के छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी खामियों और अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
CBSE ने पहली बार स्वीकार कीं सुरक्षा कमजोरियां
शुरुआत में सीबीएसई ने सुरक्षा संबंधी आरोपों को एक अलग परीक्षण लिंक तक सीमित बताया था। हालांकि अब बोर्ड ने स्वीकार किया है कि वास्तविक OnMark प्लेटफॉर्म में भी कुछ सुरक्षा कमजोरियां मौजूद थीं, जिसका उपयोग उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए किया जाता है।बढ़ते दबाव के बीच सीबीएसई ने परिणामों के बाद पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है। छात्रों को आवेदन के लिए 6 जून तक का समय दिया गया है।
री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर भी तकनीकी दिक्कतें
पोर्टल शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर छात्रों ने लॉगिन फेल होने, स्क्रीन फ्रीज होने और सिस्टम एरर जैसी समस्याओं की शिकायतें शुरू कर दीं।कई छात्रों का कहना है कि लॉगिन और कैप्चा भरने के बाद पोर्टल पूरी तरह रुक जा रहा था। इससे कॉलेज प्रवेश और उत्तर पुस्तिका सत्यापन की समय-सीमा को लेकर छात्रों की चिंता बढ़ गई।
भुगतान और उत्तर पुस्तिकाओं में भी शिकायतें
कक्षा 12 के परिणाम घोषित होने के बाद हजारों छात्रों और अभिभावकों ने भुगतान संबंधी गड़बड़ियों की शिकायत की। इनमें पेमेंट गेटवे फेल होना, शुल्क का दो बार कट जाना, भुगतान की रसीद न मिलना और तकनीकी बाधाएं शामिल हैं।इसके अलावा, कई छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपियों में गंभीर त्रुटियों की भी शिकायत की। इनमें धुंधली स्कैनिंग, पन्नों का गायब होना, गणना संबंधी गलतियां और कुछ मामलों में दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका अपलोड होने जैसी समस्याएं शामिल हैं।
रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे पुनर्मूल्यांकन आवेदन
OSM प्रणाली के तहत मिले अपेक्षाकृत कम अंकों से असंतुष्ट छात्रों की संख्या इतनी अधिक रही कि सीबीएसई को रिकॉर्ड 4.04 लाख आवेदन प्राप्त हुए। इन आवेदनों के माध्यम से छात्रों ने 11 लाख से अधिक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच की मांग की।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की प्रमुख परीक्षा एजेंसियों की डिजिटल विश्वसनीयता, डेटा सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में NTA और CBSE दोनों को इन आरोपों और तकनीकी चुनौतियों पर स्पष्ट जवाब देना पड़ सकता है।

