
विपक्ष की नई रणनीति: CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए फिर से तैयारी
महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद विपक्ष उत्साहित। मुख्य चुनाव आयुक्त पर पक्षपात का आरोप लगाकर 200 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ नए नोटिस की तैयारी।
Opposition Against CEC : महिला आरक्षण बिल (131वां संविधान संशोधन विधेयक) को संसद में गिराने के बाद उत्साहित विपक्षी दलों ने अब केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, विपक्षी पार्टियां अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए एक नया और प्रभावी नोटिस लाने की तैयारी कर रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्षता खो चुका है और कार्यपालिका के दबाव में काम कर रहा है।
पांच वरिष्ठ सांसद ड्राफ्ट तैयार करने में जुटे
समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के मुताबिक, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP) और डीएमके (DMK) सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों के कम से कम पांच वरिष्ठ सांसद इस नए नोटिस का मसौदा तैयार करने के लिए आपस में चर्चा कर रहे हैं। अभी यह तय होना बाकी है कि यह नोटिस लोकसभा में पेश किया जाएगा या राज्यसभा में, या फिर पिछली बार की तरह दोनों सदनों में एक साथ लाया जाएगा।
200 सांसदों के समर्थन का लक्ष्य
शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल की विफलता ने विपक्ष के हौसले बुलंद कर दिए हैं। विपक्षी नेताओं का मानना है कि पिछली बार उनके पास सांसदों की जो संख्या बताई गई थी, वह वास्तव में उससे कहीं अधिक है। सूत्रों का कहना है कि इस बार विपक्ष का लक्ष्य कम से कम 200 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाना है, ताकि सरकार और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जा सके। विपक्ष इस नोटिस के जरिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहता है।
CEC पर विपक्ष के गंभीर आरोप
विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर "संवैधानिक निष्ठा बनाए रखने में विफलता" और "कार्यपालिका की कठपुतली" के रूप में काम करने के कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
पक्षपाती कार्यप्रणाली: विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग केवल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाता है।
चुनावी धांधली की जांच में बाधा: आयोग पर चुनावी धोखाधड़ी की जांच को रोकने और पारदर्शिता खत्म करने के आरोप लगाए गए हैं।
मतदाता सूची में हेरफेर: बिहार और अन्य राज्यों में विशेष गहन संशोधन (SIR) अभ्यासों के माध्यम से बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करने का दावा किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी: विपक्ष का कहना है कि आयोग ने कई बार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में देरी की है।
पिछली बार क्यों खारिज हुए थे नोटिस?
इससे पहले भी विपक्ष ने CEC को हटाने के लिए नोटिस दिए थे, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें खारिज कर दिया था। सभापतियों का तर्क था कि:
विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप 'दुर्व्यवहार' के उस उच्च संवैधानिक मानदंड को पूरा नहीं करते, जो किसी CEC को हटाने के लिए आवश्यक है।
नियुक्ति संबंधी मुद्दे या पूर्व सरकारी सेवा को कदाचार नहीं माना जा सकता।
प्रशासनिक निर्णय और डेटा साझा करने जैसे मामले आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
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