
परिसीमन पर टकराव, क्या सरकार की तैयारी विपक्ष से कमजोर रही?
महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन बिल पर विपक्ष की एकजुटता से मोदी सरकार को झटका लगा। इंडिया गठबंधन ने रणनीतिक ताकत दिखाते हुए 230 वोटों से विधेयक को रोक दिया।
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर संसद में तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिला। विपक्षी दलों ने अभूतपूर्व एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सरकार के इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित होने से रोक दिया। करीब 230 सांसदों ने बिल के खिलाफ मतदान किया, जिसके चलते यह विधेयक पास नहीं हो सका। लंबे समय बाद विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन ने न केवल अपना संख्या बल दिखाया, बल्कि रणनीतिक तैयारी के दम पर सरकार के एजेंडे को भी प्रभावी ढंग से चुनौती दी।
पत्र के बाद कांग्रेस की सक्रियता
16 मार्च को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे गए पत्र के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई। इस पत्र का उद्देश्य महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष के साथ सहमति बनाना था, लेकिन कांग्रेस ने इसे एक राजनीतिक रणनीति के रूप में लेते हुए सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी।
सर्वदलीय बैठक की मांग
सरकार द्वारा महिला आरक्षण पर समर्थन मांगने के जवाब में खरगे ने समर्थन जताते हुए सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर पांच राज्यों के चुनावों के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। साथ ही उन्होंने सरकार से औपचारिक रूप से ऐसी बैठक आयोजित करने की मांग की और समानांतर रूप से विपक्षी दलों के साथ संवाद भी तेज कर दिया।
विशेष सत्र से एक दिन पहले खरगे के आवास पर एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस, वाम दल, समाजवादी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित लगभग 20 दलों के नेता शामिल हुए। इस बैठक में स्पष्ट रणनीति बनाई गई कि किसी भी स्थिति में विधेयक को पारित नहीं होने दिया जाएगा।
रणनीतिक लामबंदी
विपक्ष ने अपनी रणनीति के तहत सभी सांसदों की पूर्ण उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के कारण कुछ सांसदों की संभावित अनुपस्थिति की आशंका जताई।इस पर राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि यदि पूरी संख्या नहीं जुटाई गई तो इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा। इसके बाद शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने भरोसा दिलाया कि वे ममता बनर्जी से बातचीत कर सभी सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे।
तमिलनाडु में चुनाव प्रचार में व्यस्त डीएमके प्रमुख एम. के. स्टालिन ने भी अपने सांसदों को एक दिन पहले ही दिल्ली भेज दिया। वहीं उमर अब्दुल्ला और कपिल सिब्बल जैसे नेताओं ने बैठक में यह चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक पारित हो गया, तो परिसीमन की प्रक्रिया विपक्ष के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि विपक्ष अब पहले की तुलना में अधिक संगठित और रणनीतिक तरीके से सरकार का मुकाबला कर रहा है। महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर यह एकजुटता आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

