
क्या पासपोर्ट अब नागरिकता का सबूत नहीं? केंद्र सरकार के बयान ने बढ़ाई उलझन
पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण न मानने के केंद्र के बयान से लोगों में उलझन बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे नागरिकता के दस्तावेजों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट यात्रा करने का दस्तावेज़ है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के बाद देशभर में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। लोगों का सवाल है कि जब पासपोर्ट जारी करने से पहले सरकार कई स्तरों पर जांच करती है, तो फिर उसे नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं माना जा रहा?
द फेडरल के एडिटर-इन-चीफ एस. श्रीनिवासन ने इस मुद्दे पर कहा कि सरकार का यह स्पष्टीकरण न केवल अनावश्यक था, बल्कि गलत समय पर भी आया। उनके अनुसार, आम लोगों को इससे यही संदेश जाएगा कि सरकार अब पासपोर्ट को भी नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं कर रही है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि पासपोर्ट व्यक्ति की पहचान और विदेश यात्रा का दस्तावेज़ है, लेकिन यह नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।
कानूनी और व्यावहारिक अंतर
श्रीनिवासन का कहना है कि कानून में राष्ट्रीयता (Nationality) और नागरिकता (Citizenship) के बीच अंतर हो सकता है, लेकिन आम भारतीय के लिए इसका कोई खास व्यावहारिक महत्व नहीं है।उन्होंने बताया कि पासपोर्ट अधिनियम की धारा 20 के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है, लेकिन ऐसे मामले बेहद दुर्लभ हैं। उनके अनुसार, 99.999 प्रतिशत भारतीयों को पासपोर्ट तभी मिलता है, जब उनकी पूरी तरह जांच-पड़ताल हो चुकी होती है।
पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया होती है कड़ी
भारतीय पासपोर्ट जारी करने से पहले आवेदक को जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाण, शैक्षणिक दस्तावेज, पुलिस सत्यापन और संविधान के प्रति निष्ठा की घोषणा जैसे कई दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं।श्रीनिवासन का तर्क है कि इतनी विस्तृत जांच के बाद जारी किया गया पासपोर्ट सामान्य परिस्थितियों में नागरिकता का भरोसेमंद प्रमाण माना जाना चाहिए।
पूर्व राजदूत ने भी उठाया सवाल
पूर्व राजदूत विवेक काटजू का भी मानना है कि पहले कुछ विशेष देशों, जैसे रंगभेद काल के दक्षिण अफ्रीका या इज़राइल (जब भारत के राजनयिक संबंध नहीं थे), की यात्रा पर प्रतिबंध के कारण पासपोर्ट जारी करने में अलग नियम थे। लेकिन अब वे परिस्थितियां समाप्त हो चुकी हैं, इसलिए पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण मानने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
समय पर भी उठे सवाल
श्रीनिवासन का कहना है कि यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण चल रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इसका संबंध इसी प्रक्रिया से है या यह केवल एक सामान्य टिप्पणी थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों पर इस स्पष्टीकरण का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन देश के भीतर नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेजों को लेकर एक नई और अनावश्यक बहस जरूर शुरू हो गई है।

