
टेलीग्राम बैन पर भड़के सीईओ पावेल डुरोव, भारत सरकार पर लगाया बड़ा आरोप
टेलीग्राम बैन पर भड़के सीईओ पावेल डुरोव, कहा- 15 करोड़ भारतीयों को मिली सजा। एनटीए प्रमुख अभिषेक सिंह ने बताया परीक्षा की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम।
Telegram Ban : भारत सरकार द्वारा टेलीग्राम (Telegram) पर लगाए गए देशव्यापी अस्थायी प्रतिबंध पर ऐप के संस्थापक और सीईओ पावेल डुरोव ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सीधे सरकार के फैसले को कटघरे में खड़ा करते हुए डुरोव ने लिखा, "भारत के आईटी मंत्रालय ने सिर्फ इसलिए टेलीग्राम को एक हफ्ते के लिए बैन कर दिया क्योंकि कुछ यूजर्स ने लीक हुए परीक्षा प्रश्नपत्र शेयर किए थे। यह उन इनसाइडर्स (अंदरूनी सूत्रों) को पकड़ने के बजाय, जिन्होंने वास्तव में परीक्षा सामग्री लीक की, भारत के 15 करोड़ से अधिक आम टेलीग्राम यूजर्स को सामूहिक रूप से सजा देने जैसा है। इस बैन से कुछ भी नहीं रुका है; पेपर लीक की गतिविधियां अब दूसरे ऐप्स पर शिफ्ट हो गई हैं।"
India’s IT ministry banned Telegram for one week because some users shared leaked exam questions.
— Pavel Durov (@durov) June 16, 2026
This punishes 150M+ ordinary Telegram users in India — not the insiders who leaked the exam materials.
And the ban hasn't stopped anything. The leaks just moved to other apps. https://t.co/CzQWN4mXfb
NEET-UG 2026 री-एग्जाम की सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा एक्शन
22 जून तक ऐप पर लगी रोक, गूगल प्ले स्टोर से हटाया गया टेलीग्राम
यह पूरा विवाद आगामी 21 जून को होने वाले NEET-UG 2026 री-एग्जाम की सुरक्षा से जुड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आईटी एक्ट, 2000 की धारा 69A के तहत आदेश जारी कर टेलीग्राम ऐप को 22 जून 2026 तक अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर की गई इस कार्रवाई के बाद गूगल ने ऐप को अपने प्ले स्टोर से हटा दिया है, और एप्पल द्वारा भी जल्द ही इस आदेश का अनुपालन करने की उम्मीद है। इसके अलावा, सरकार ने टेलीग्राम को 30 जून तक भारत में 'मैसेज एडिटिंग फीचर' को भी पूरी तरह ब्लॉक करने के लिए कहा है।
NTA की दलील: 'मैसेज एडिट' फीचर का खेल खत्म करना जरूरी था
महानिदेशक अभिषेक सिंह बोले- "अफवाहें रोकने के लिए उठाया गया कदम"
एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बात करते हुए स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई के पीछे कोई नया पेपर लीक नहीं हुआ है। असल में, सोशल मीडिया पर घूम रहे फर्जी मैसेज और अफवाहों के कारण छात्रों में भारी मानसिक तनाव पैदा हो रहा था, जिसे रोकना अनिवार्य था। एनटीए ने बताया कि टेलीग्राम का 'मैसेज एडिटिंग फीचर' एक बड़ा लूपहोल बन चुका था। इसके जरिए चैनल एडमिनिस्ट्रेटर पुराने मैसेजों के टाइम-स्टैम्प को बदले बिना उनके अंदर मौजूद पीडीएफ फाइलों को असली प्रश्नपत्रों से बदल देते थे। इससे परीक्षा के बाद ऐसा फर्जी 'सबूत' तैयार किया जाता था, जिससे लगे कि पेपर परीक्षा से पहले ही लीक हो गया था। महानिदेशक ने भरोसा दिया कि 21 जून की परीक्षा बिना किसी कदाचार के संपन्न कराई जाएगी।
तकनीकी विशेषज्ञों और छात्र संगठनों में छिड़ी बहस
आईआईटी कानपुर के निदेशक और एथिकल हैकर्स के बीच बंटी राय
सीईओ पावेल डुरोव के बयानों के बाद देश के तकनीकी और शैक्षणिक हलकों में गंभीर सवाल उठ रहे हैं:
मनिंद्र अग्रवाल (निदेशक, आईआईटी कानपुर): उन्होंने डुरोव की आलोचना को खारिज करते हुए सरकार के तर्क का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम में बिना 'Edited' लिखे पोस्ट को चुपचाप बदल देने का फीचर बेहद खतरनाक है, जो अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नहीं है। यह बिना किसी रोक-टोक के फर्जी दावों को हवा दे रहा था।
निसर्ग अधिकारी (एथिकल हैकर, IIT-K C3iHub): उन्होंने सरकार के इस कदम को अप्रभावी बताते हुए डुरोव की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "टेलीग्राम को इस तरह रोकना मुमकिन नहीं है, क्योंकि इसके फीचर्स यूजर्स को प्रॉक्सी और अन्य बाईपास तरीकों का इस्तेमाल करने की अनुमति देते हैं।"
सार्थक सिद्धांत (18 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता): उन्होंने इस फैसले की तार्किकता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि किसी संचार माध्यम में गलत जानकारी है, तो क्या पूरे प्लेटफॉर्म को ही बंद कर देना चाहिए? वहीं इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने इसे एक 'बैंड-एड सॉल्यूशन' (कमजोर और अस्थायी उपाय) करार दिया है जो असंवैधानिक चिंताओं को जन्म देता है।

