
10 दिन में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में तीसरी बार वृद्धि
देश में शनिवार को पेट्रोल के दाम 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर बढ़े। पश्चिम एशिया संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर।
Hike In Petrol Price: देश में आम जनता पर महंगाई की फिर एक बार मार पड़ी है। तेल कंपनियों ने शनिवार को फिर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। आज पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। वहीं डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 10 दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में यह लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी की गयी है। इसके साथ ही सीएनजी की कीमतों में भी एक बार फिर इजाफा कर दिया गया है। इस बार सीएनजी के दामों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। पिछले 8 दिनों में CNG के दामों में 4 रूपये की वृद्धि हो चुकी है। इंधन के दामों में इस लगातार वृद्धि से आम नागरिकों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ता दिख रहा है।
10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम
पिछले 10 दिन वाहन चालकों की जेब पर काफी भारी साबित हुआ है। आज की नई दरों के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 99.51 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। वहीं दिल्ली में अब एक लीटर डीजल के लिए लोगों को 92.49 रुपये चुकाने होंगे। इससे पहले 16 मई और 19 मई को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए थे। पहले ईंधन के दाम सीधे 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। उसके बाद फिर से करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। वहीँ CNG की बात करें तो मई के महीने में यह तीसरी बार है, जब सीएनजी के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले 17 मई को सीएनजी के रेट 1 प्रति रुपए किलोग्राम बढ़े थे। इससे पहले शुक्रवार यानि 15 मई को सीएनजी की कीमतों में 2 रुपए प्रति किलोग्राम का इजाफा किया गया था। दिल्ली में सीएनजी की कीमत अब 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। वहीं उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में अब सीएनजी के नए दाम 89.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं। इस बढ़ोतरी से ऑटो, कैब और कमर्शियल वाहन चालकों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
कच्चे तेल और CNG की कीमतों में बड़ा उछाल
तेल कंपनियों के अनुसार इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। वैश्विक बाजार में इस समय कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य संकट के कारण सप्लाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) मार्ग पर जारी तनाव ने संकट को और ज्यादा गहरा कर दिया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम लगातार ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं।
भारत पर बढ़ रहा है आर्थिक दबाव
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम 113 से 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए हैं। इसके कारण भारत का आयात खर्च काफी बढ़ गया है। खुदरा ईंधन की कीमतें लंबे समय तक स्थिर रहने के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को भारी घाटा उठाना पड़ रहा था। आरबीआई और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने पहले ही संकेत दिए थे कि वैश्विक संकट लंबा खिंचने पर कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी हो जाएगी।
देश के प्रमुख शहरों में नई कीमतें
इस नई बढ़ोतरी के बाद देश के अलग-अलग महानगरों में ईंधन की दरें अलग-अलग स्तर पर पहुंच गई हैं। कोलकाता में पेट्रोल और डीजल के दाम सबसे ऊंचे स्तरों में से एक पर बने हुए हैं। मुंबई और चेन्नई में भी ईंधन की कीमतें अब आम जनता को ज्यादा परेशान कर रही हैं। राज्यों में लगने वाले स्थानीय टैक्स यानी वैट (VAT) की वजह से हर शहर में तेल की कीमतें अलग होती हैं। कीमतों में इस बढ़ोतरी से माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन के किराए बढ़ने की भी पूरी आशंका है।
आम जनता की बढ़ रही मुश्किलें
पेट्रोल और डीजल के महंगे होने का सीधा असर हर वर्ग की जेब पर पड़ता है। निजी वाहन इस्तेमाल करने वाले नौकरीपेशा लोगों का रोज का सफर अब और खर्चीला हो जाएगा। इसके अलावा डीजल महंगा होने से देश में लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ जाती है। माल ढुलाई महंगी होने से आने वाले दिनों में फल, सब्जी और अन्य जरूरी घरेलू सामानों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इससे बाजार में समग्र खुदरा महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
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