पीएम मोदी की अपील पर भड़का विपक्ष, राहुल गांधी ने कहा- यह सरकार की विफलता
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पीएम मोदी की अपील पर भड़का विपक्ष, राहुल गांधी ने कहा- यह सरकार की विफलता

मिडिल ईस्ट संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नागरिकों से कम खर्च और सादगी अपनाने की अपील पर कांग्रेस, टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र को घेरा।


Opposition On Modi's save Energy Statement :मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से सादगी अपनाने और फिजूलखर्ची रोकने की भावुक अपील की है। हालांकि, प्रधानमंत्री की इस अपील ने देश में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) जैसे प्रमुख विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं का बोझ आम जनता के कंधों पर डाल रही है। राहुल गांधी समेत कई बड़े नेताओं ने इसे सरकार की नीतिगत हार बताया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को संकट से निपटने के ठोस उपाय करने चाहिए थे।



विपक्ष ने सरकार को घेरा
विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री की अपील को नीतिगत विफलता और खराब आर्थिक योजना का प्रमाण बताया है। कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार वैश्विक संकट से निपटने में नाकाम रही है। टीएमसी नेताओं ने भी सरकार की आर्थिक नीतियों और दूरदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

राहुल गांधी का तीखा हमला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पीएम मोदी के निर्देशों को सरकार की विफलता का सबूत बताया। राहुल ने कहा कि मोदी जी ने जनता से सोने और पेट्रोल के कम इस्तेमाल जैसे जो त्याग मांगे हैं, वे असल में सरकार की नाकामियों को छिपाने का तरीका हैं।

संसद सत्र बुलाने की मांग
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने पूछा कि आखिर किन कारणों से प्रधानमंत्री कार्यालय को इतने गंभीर निर्देश जारी करने पड़े। उन्होंने मांग की कि सरकार को तुरंत संसद सत्र बुलाना चाहिए। कार्ति के अनुसार, सरकार को देश को भरोसे में लेकर असल आर्थिक स्थिति बतानी चाहिए।

ऊर्जा हितों पर लापरवाही का आरोप
कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा कि महीनों से चल रही वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद सरकार ऊर्जा हितों को सुरक्षित नहीं कर पाई। उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील को अनैतिक बताया। वेणुगोपाल का आरोप है कि सरकार का ध्यान आर्थिक तैयारी के बजाय केवल चुनावों पर रहा है।

वीआईपी खर्चों पर उठे सवाल
टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने पूछा कि क्या भारत विदेशी मुद्रा भंडार के संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि अगर मंत्री सरकारी विमानों और बड़े काफिलों में चलते हैं, तो केवल आम जनता ही त्याग क्यों करे। गोखले ने चुनावी समय के बाद आई इस अपील पर भी सवाल उठाए।

प्रधानमंत्री की असल अपील क्या थी?
हैदराबाद में पीएम मोदी ने नागरिकों से सप्लाई चेन और बढ़ती महंगाई से निपटने में सहयोग मांगा था। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम, कम पेट्रोल-डीजल खर्च और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल पर जोर दिया। पीएम ने विदेशी शादियों और यात्राओं से बचने की भी सलाह दी थी।

सोने और विदेशी मुद्रा पर जोर
प्रधानमंत्री ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए एक साल तक सोना न खरीदने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके साथ ही खाद्य तेल और उर्वरकों के कम इस्तेमाल की भी सलाह दी।

मंत्रियों की अहम बैठक आज
मिडिल ईस्ट संकट को देखते हुए केंद्र सरकार अब हाई अलर्ट मोड पर है। आज सुबह 10:30 बजे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की बैठक होनी है। इसमें ईंधन आपूर्ति, महंगाई और आवश्यक वस्तुओं पर संकट के प्रभाव की समीक्षा होगी।


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