सरकार की मंशा परिसीमन की थी, प्रियंका गांधी बोलीं- महिला आरक्षण तो बहाना
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सरकार की मंशा परिसीमन की थी, प्रियंका गांधी बोलीं- महिला आरक्षण तो बहाना

महिला आरक्षण संशोधन बिल 17 अप्रैल को लोकसभा में गिर गया। इसे विपक्ष अपनी बड़ी जीत बता रहा है। इस विषय पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने बड़ी बात कही है।


महिला आरक्षण संशोधन बिल पर मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा में मोदी सरकार संशोधन बिल पारित कराने के लिए आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सकी। बिल के गिरने के बात एनडीए के नेता विपक्ष को जिम्मेदार बता रहा है। एनडीए का कहना है कि कांग्रेस और दूसरे दलों की तरफ जिस तरह से विरोध किया गया उससे साफ है कि यह महिलाओं के विरोधी हैं। वहीं विपक्ष का कहना है कि हमने परिसीमन बिल को गिराया है। महिला आरक्षण को लेकर कोई विरोध था ही नहीं। हकीकत तो यह है कि सत्ता पक्ष यानी मोदी सरकार अहंकारी है और अपने छिपे एजेंडे को लागू कराना चाहती थी। इस विषय पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने एक बार फिर प्रेस कांफ्रेंस के जरिए निशाना साधा।

प्रियंका गांधी ने कहा सच तो यह है कि मोदी सरकार की मंशा परिसीमन की थी,महिला आरक्षण तो बहाना था। वो अभी भी यह कहती हैं कि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में ही 543 सीटों पर सरकार 33 फीसद महिला आरक्षण की व्यवस्था कर दे। कांग्रेस या दूसरे दलों को आपत्ति नहीं है। दरअसल सत्ता पक्ष के लोग महिलाओं के संवेदनशील नहीं हैं। दिल्ली में ओलंपिक की महिला खिलाड़ियों के साथ क्या हुआ, हाथरस में क्या हुआ,मणिपुर में क्या हुआ। मौजूदा सरकार इन विषयों पर खामोश है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि जहां तक इस विषय पर सत्ता पक्ष के विरोध की बात है तो वो करें, उन्हें कौन रोका है। आप सच को छिपा कर नहीं रख सकते। 12 साल पहले क्या हुआ था उससे आगे बढ़ने की जरूरत है। आप सच को छिपा कर नहीं रख सकते। देश की जनता अब सब कुछ समझ रही है। प्रियंका गांधी ने कहा, ' इसमें दो मत नहीं कि नरेंद्र मोदी दबाव में हैं। वो यह जानते थे कि महिला आरक्षण संशोधन बिल पारित नहीं होगा। लेकिन ध्यान भटकाने के लिए मोदी सरकार की तरफ से कोशिश की गई।' उनके भाई ने अगर भारत-अमेरिका डील का जिक्र किया है तो गलत क्या है।'
प्रियंका गांधी ने कहा कि हकीकत यह है कि लोकसभा में संशोधन बिल महिला आरक्षण के संबंध में नहीं है बल्कि परिसीमन था। वो एक बार कह रही है कि 2023 की व्यवस्था को लागू करें। सरकार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में क्यों नहीं बदलाव कर सकती है। उसी व्यवस्था के तहत ओबीसी, एससी, एसटी समाज को भी हक दिया जा सकता है।
परिसीमन पर बीजेपी सरकार का रवैया साफ नहीं है। असम के साथ जम्मू-कश्मीर परिसीमन को देखिए। बीजेपी की तरफ से विपक्षी नेताओं की सीटों को निशाना बनाया गया। बीजेपी के लोग परिसीमन आयोग बना कर अपने तीन लोगों को बैठाना चाहते हैं। अब ऐसे में हम कैसे भरोसा करें। जम्मू-कश्मीर को देखिए एक विधानसभा का एक हिस्सा एकतरफ और दूसरा हिस्सा दूसरी तरफ। ऐसे में परिसीमन का मकसद ही नाकाम हो जाता है। इंदिरा जी के समय अगर परिसीमन को फ्रीज किया गया तो उसके पीछे वजह यह थी उत्तर और दक्षिण भारत में विभाजन ना हो। यही नहीं छोटे छोटे राज्यों के हित भी सुनिश्चित किए जा सकें।
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