
अमित शाह ने दूर की दक्षिण के राज्यों की टेंशन, आंकड़ों से समझाया, परिसीमन के बाद कैसे बढ़ेगी उनकी पावर?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में दक्षिण भारतीय राज्यों की उन आशंकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें परिसीमन के बाद उनकी राजनीतिक शक्ति कम होने का दावा किया जा रहा था।
Amit Shah In Parliament : संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन (Delimitation) को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार ने दक्षिण भारतीय राज्यों को एक बड़ा आश्वासन दिया है। गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि लोकसभा सीटों के विस्तार से दक्षिण के राज्यों का प्रभाव कम नहीं होगा, जैसा कि विपक्ष द्वारा दावा किया जा रहा है।
अमित शाह का आंकड़ों वाला प्रहार
गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे उस नैरेटिव (बयानबाजी) पर प्रहार किया जिसमें कहा जा रहा था कि उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण की ताकत घट जाएगी। शाह ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी:
वर्तमान स्थिति: मौजूदा 543 सीटों में से दक्षिण के राज्यों के पास 129 सांसद हैं, जो कुल सदन का 23.76% है।
भविष्य की स्थिति: नई लोकसभा में दक्षिण के राज्यों से 195 सांसद होंगे, जिससे उनका प्रतिनिधित्व बढ़कर 23.97% हो जाएगा।
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि न केवल सीटों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि पूरे सदन में दक्षिण का 'वेटेज' (Weightage) भी थोड़ा बढ़ेगा।
किस राज्य को कितनी मिलेंगी सीटें?
गृह मंत्री ने विस्तार से बताया कि परिसीमन के बाद प्रमुख दक्षिणी राज्यों की तस्वीर कैसी होगी-
कर्नाटक: सीटें 28 से बढ़कर 42 हो जाएंगी। (अनुपात 5.15% से बढ़कर 5.44%)
आंध्र प्रदेश: सीटें 25 से बढ़कर 38 हो जाएंगी। (अनुपात 4.60% से बढ़कर 4.65%)
तेलंगाना: सीटें 17 से बढ़कर 26 हो जाएंगी। (अनुपात 3.13% से बढ़कर 3.18%)
तमिलनाडु: सीटें 49 से बढ़कर 59 हो जाएंगी। (अनुपात 7.18% से बढ़कर 7.23%)
केरल: सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी। (अनुपात लगभग 3.67% पर बरकरार रहेगा)
इन आंकड़ों के जरिए शाह ने यह साबित करने की कोशिश की कि दक्षिण का कोई भी राज्य नुकसान में नहीं रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी की 'गारंटी'
चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्ष की आशंकाओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत बिल्कुल साफ है और वे इस बात की 'गारंटी' देने को तैयार हैं कि परिसीमन की प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा।
पीएम मोदी ने कहा, "मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूँ कि चाहे उत्तर हो, दक्षिण हो, पूर्व हो या पश्चिम... यह निर्णय लेने की प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी। पिछली सरकारों के समय जो अनुपात तय हुआ था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, बल्कि सीटों का विस्तार उसी अनुपात में होगा ताकि संतुलन बना रहे।"
विपक्ष का विरोध और सरकार का जवाब
विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि दक्षिण के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है, इसलिए जनसंख्या आधारित परिसीमन से उन्हें नुकसान होगा। इसके जवाब में सरकार का कहना है कि सीटों की कुल संख्या में इतनी बड़ी वृद्धि (लगभग 850 सीटें) की जा रही है कि किसी भी राज्य की हिस्सेदारी कम होने का सवाल ही नहीं उठता।

