
राघव चड्ढा को BJP में जाना पड़ा भारी, एक झटके में खोए 10 लाख फॉलोअर्स
राघव चड्ढा ने खुद को एक पारंपरिक राजनेता के बजाय एक आधुनिक और सुलभ नेता के रूप में पेश किया था। उन्होंने उन मुद्दों को उठाया जिनसे युवा सीधे जुड़ते हैं।चाहे वह ट्रैफिक जाम हो, एयरपोर्ट पर खाने की बढ़ती कीमतें हों या पिता बनने पर मिलने वाली छुट्टी।
भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया को लोकप्रियता का पैमाना माना जाता है, और इस मोर्चे पर 37 वर्षीय राघव चड्ढा हमेशा से एक विजेता रहे हैं। लेकिन, शुक्रवार (24 अप्रैल) को जैसे ही उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से हाथ मिलाया, उनके डिजिटल साम्राज्य में दरारें साफ नजर आने लगीं। राजनीति में पाला बदलने के फैसले ने चड्ढा को उनके सबसे बड़े समर्थक वर्ग Gen Z और युवाओं के बीच कटघरे में खड़ा कर दिया है।
10 लाख फॉलोअर्स का 'सफाई अभियान'
सोशल मीडिया ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में जबरदस्त गिरावट आई है। बीजेपी जॉइन करने से पहले उनके पास करीब 14.6 मिलियन (1.46 करोड़) फॉलोअर्स थे, जो कुछ ही घंटों में घटकर 13.8 मिलियन (1.38 करोड़) के करीब रह गए। यानी करीब 8 से 10 लाख लोगों ने उन्हें अनफॉलो कर दिया। इंटरनेट पर #UnfollowRaghavChadha का हैशटैग तेजी से वायरल हो रहा है, जो यह दर्शाता है कि उनकी नई राजनीतिक पारी से युवा मतदाता खुश नहीं हैं।
Gen Z के 'रोल मॉडल' की बदलती छवि
राघव चड्ढा ने खुद को एक पारंपरिक राजनेता के बजाय एक आधुनिक और सुलभ नेता के रूप में पेश किया था। उन्होंने उन मुद्दों को उठाया जिनसे युवा सीधे जुड़ते हैं चाहे वह ट्रैफिक जाम हो, एयरपोर्ट पर खाने की बढ़ती कीमतें हों या पिता बनने पर मिलने वाली छुट्टी (Paternity Leave)।
उनकी लोकप्रियता तब चरम पर थी जब उन्होंने गिग वर्कर्स (डिलीवरी पार्टनर्स) की समस्याओं को समझने के लिए खुद 'ब्लिंकिट' (Blinkit) डिलीवरी बॉय बनकर काम किया था। उनके इस प्रयोग ने न केवल सुर्खियां बटोरीं, बल्कि कंपनियों को अपनी 10-मिनट की डिलीवरी पॉलिसी पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर भी किया। लेकिन अब, वही प्रशंसक उन्हें 'अवसरवादी' करार दे रहे हैं।
क्या बीजेपी में जाने का दांव पड़ा उल्टा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने राघव चड्ढा को अपनी टीम में इसलिए शामिल किया ताकि वे शहरी युवाओं और Gen Z वोटर्स को लुभा सकें। चड्ढा की शादी बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से होने के कारण उनका 'ग्लैमर कोशेंट' भी काफी ऊंचा है। लेकिन शुरुआती रुझान बताते हैं कि यह रणनीति सफल नहीं रही है। समर्थकों का मानना है कि चड्ढा ने उन सिद्धांतों से समझौता किया है, जिनकी वजह से उन्हें पसंद किया जाता था।
AAP के साथ तल्खी और 'डिलीटेड' पोस्ट का विवाद
राघव चड्ढा की AAP से विदाई अचानक नहीं थी। हफ्तों से चल रही खींचतान के बीच उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता के पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से ही अटकलें थीं कि वे कुछ बड़ा करेंगे। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने उन पर बड़ा आरोप लगाया है। भारद्वाज के मुताबिक, चड्ढा ने बीजेपी जॉइन करने से पहले अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी की आलोचना करने वाले पुराने पोस्ट डिलीट कर दिए हैं। अब उनके प्रोफाइल पर मोदी से जुड़े जो कुछ पोस्ट बचे हैं, वे सभी उनके पक्ष में हैं।
भविष्य की राह: 'Gen Z पार्टी' का विचार?
इन सबके बीच राघव चड्ढा डिजिटल रूप से सक्रिय बने हुए हैं। हाल ही में उन्होंने एक रील शेयर की जिसमें एक यूजर ने उन्हें अपनी खुद की "Gen Z पार्टी" शुरू करने का सुझाव दिया था। चड्ढा ने इसे एक "दिलचस्प विचार" बताया है। हालांकि, बीजेपी के साथ उनकी नई पारी कितनी लंबी चलेगी और क्या वे अपने खोए हुए फॉलोअर्स और विश्वास को वापस पा सकेंगे, यह आने वाले समय में दिल्ली की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल होगा।

