
केंद्र सरकार पर भड़के राहुल गांधी ‘नेता प्रतिपक्ष कोई रबर स्टांप नहीं’
सीबीआई के निदेशक की चयन प्रक्रिया से नाखुश राहुल गांधी ने जताया रोष। अपने असहमति नोट में इन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चयन प्रक्रिया को महज औपचारिकता बना दिया
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को अगले सीबीआई निदेशक के चयन की प्रक्रिया पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय चयन समिति की बैठक में राहुल गांधी ने दो पन्नों का असहमति नोट सौंपते हुए कहा कि वह “पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया” का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
अपने असहमति नोट में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने चयन प्रक्रिया को महज औपचारिकता बनाकर रख दिया है और नेता प्रतिपक्ष किसी “रबर स्टांप” की तरह काम नहीं कर सकता।
उन्होंने लिखा, “महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध न कराकर सरकार ने चयन समिति को सिर्फ औपचारिकता तक सीमित कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष कोई रबर स्टांप नहीं है। मैं इस पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में शामिल होकर अपने संवैधानिक दायित्व से पीछे नहीं हट सकता। इसलिए मैं इस पर कड़े शब्दों में असहमति दर्ज करता हूं।”
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली इस समिति की बैठक प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर हुई। समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और राहुल गांधी सदस्य के रूप में शामिल हैं।
राहुल गांधी ने अपने नोट में सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए करती रही है।
उन्होंने लिखा, “मैं आपको चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में यह पत्र लिख रहा हूं ताकि सीबीआई के अगले निदेशक की सिफारिश से जुड़ी कार्यवाही पर अपनी असहमति दर्ज करा सकूं। आपकी सरकार ने भारत की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई का बार-बार दुरुपयोग किया है और इसका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों तथा आलोचकों को निशाना बनाने के लिए किया गया है।”
राहुल गांधी ने कहा कि इसी प्रकार की संस्थागत पकड़ को रोकने के लिए चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष को शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें प्रक्रिया में कोई सार्थक भूमिका नहीं दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार लिखित अनुरोध करने के बावजूद उन्हें पात्र उम्मीदवारों की सेल्फ-अप्रेजल रिपोर्ट और 360 डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गईं।
राहुल गांधी ने कहा, “इसके बजाय मुझसे उम्मीद की गई कि मैं समिति की बैठक के दौरान पहली बार 69 उम्मीदवारों के मूल्यांकन रिकॉर्ड देखूं। वहीं 360 डिग्री रिपोर्ट मुझे पूरी तरह देने से इनकार कर दिया गया।”
उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के इतिहास और प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के लिए इन दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा बेहद जरूरी थी।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बिना किसी कानूनी आधार के जानकारी छिपाना चयन प्रक्रिया का मजाक बनाना है और इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल सरकार द्वारा पहले से तय उम्मीदवार ही चुना जाए।
राहुल गांधी ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने पिछले वर्ष 5 मई को हुई बैठक में भी असहमति दर्ज कराई थी। इसके अलावा उन्होंने 21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के लिए कुछ सुझाव भी दिए थे, लेकिन अब तक उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला।
मौजूदा सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल 24 मई को समाप्त होने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार बैठक एक घंटे से अधिक चली, हालांकि चर्चाओं को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई।
सूत्रों का कहना है कि अगले सीबीआई निदेशक के नाम की घोषणा जल्द की जा सकती है। यह महत्वपूर्ण समिति अगले सीबीआई प्रमुख के चयन को अंतिम रूप देने के लिए जिम्मेदार होती है और चयन अधिकारियों के एक पैनल में से किया जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न राज्यों के कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी इस पद की दौड़ में शामिल हैं। जिन नामों पर विचार किए जाने की बात सामने आई है, उनमें पराग जैन, शत्रुजीत कपूर, योगेश गुप्ता, जीपी सिंह और प्रवीर रंजन शामिल हैं।
सीबीआई इस समय कई हाई-प्रोफाइल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों की जांच कर रही है।

