
हाईकोर्ट ने राहुल गांधी पर FIR के फैसले पर लगाई रोक, पलटा अपना फैसला, दोहरी नागरिकता का मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर दायर एक याचिका पर अपना वह आदेश फिलहाल रोक दिया है, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर चल रहे विवाद में एक नया मोड़ ला दिया है। हाईकोर्ट ने उस आदेश को रोक दिया है जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी दंडात्मक निर्देश देने से पहले आरोपी का पक्ष सुनना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
क्या था कोर्ट का पिछला रुख?
शुक्रवार को जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कर्नाटक के भाजपा सदस्य एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर सुनवाई की थी। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने खुली अदालत में यह आदेश निर्देशित किया था कि राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि राहुल गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं और उन्होंने संवैधानिक पदों पर रहते हुए जानकारी छिपाई है।
हालांकि, लिखित आदेश टाइप होने और हस्ताक्षरित होने से पहले ही अदालत ने अपनी राय बदल दी। न्यायाधीश ने पाया कि बिना नोटिस जारी किए और राहुल गांधी का पक्ष सुने बिना ऐसा आदेश देना कानूनी प्रक्रियाओं के खिलाफ हो सकता है।
हाईकोर्ट ने क्यों बदला अपना आदेश?
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने अपने लिखित आदेश में स्पष्ट किया कि फैसला सुरक्षित रखने के दौरान उनके संज्ञान में इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ का 2014 का एक महत्वपूर्ण निर्णय आया। इस पुराने फैसले के अनुसार, यदि कोई मजिस्ट्रेट सीआरपीसी (CrPC) की धारा 156(3) के तहत एफआईआर दर्ज करने के आवेदन को खारिज कर देता है, तो उस फैसले के खिलाफ 'क्रिमिनल रिवीजन' (आपराधिक पुनरीक्षण) की प्रक्रिया धारा 397 के तहत चलती है।
कोर्ट ने कहा, "धारा 397 के तहत पुनरीक्षण की कार्यवाही में, संभावित आरोपी या जिस व्यक्ति पर अपराध करने का संदेह है, उसे फैसला लेने से पहले सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।" इसी आधार पर जस्टिस विद्यार्थी ने कहा कि राहुल गांधी को नोटिस जारी किए बिना इस आवेदन पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता।
क्या हैं राहुल गांधी पर आरोप?
याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने अपनी याचिका में यूनाइटेड किंगडम (UK) में 2003 में पंजीकृत एक कंपनी 'बैकॉप्स लिमिटेड' (Backops Limited) के विवरण प्रस्तुत किए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि इस कंपनी के दस्तावेजों में राहुल गांधी ने कथित तौर पर अपनी राष्ट्रीयता 'ब्रिटिश' घोषित की थी।
शिशिर का दावा है कि उन्होंने जुलाई 2024 में रायबरेली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया। जब निचली अदालत ने भी FIR दर्ज करने की उनकी अर्जी खारिज कर दी, तो उन्होंने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के इस ताजा रुख से राहुल गांधी को फिलहाल राहत मिल गई है। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल, 2026 की तारीख तय की है। उस दिन अदालत यह तय करेगी कि राहुल गांधी को औपचारिक नोटिस कब भेजा जाए और मामले की कानूनी वैधता क्या है। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि यह देश के सबसे बड़े विपक्षी नेता की नागरिकता और चुनावी योग्यता से जुड़ा है।

