OSM पोर्टल की सुरक्षा खामियों पर घिरा CBSE, पारदर्शिता पर बहस तेज
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OSM पोर्टल की सुरक्षा खामियों पर घिरा CBSE, पारदर्शिता पर बहस तेज

CBSE के OSM मूल्यांकन सिस्टम में कथित गड़बड़ियों, साइबर सुरक्षा खामियों और निजीकरण को लेकर राहुल गांधी ने न्यायिक जांच की मांग की।


कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा सीबीएसई मूल्यांकन प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप और न्यायिक जांच की मांग हाल ही में प्रसारित कैपिटल बीट कार्यक्रम के एक एपिसोड का मुख्य विषय रहे। इस चर्चा में युवा हल्ला बोल आंदोलन के महासचिव रजत यादव, प्रोफेसर तनवीर ऐजाज़ और राजनीतिक कार्यकर्ता आयुष्मान पांडे शामिल हुए। चर्चा का केंद्र सीबीएसई की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली, निजी ठेकेदार कोएम्प्ट (Coempt) की भूमिका, तथा मूल्यांकन में त्रुटियों, डिजिटल सुरक्षा कमजोरियों और जवाबदेही को लेकर उठे सवाल रहे।

राहुल गांधी ने सीबीएसई परीक्षा परिणामों में “बड़े पैमाने पर छेड़छाड़” का आरोप लगाया और यह सवाल उठाया कि OSM का ठेका कोएम्प्ट को क्यों दिया गया। राहुल गांधी ने दावा किया कि यह कंपनी पहले 2019 में तेलंगाना में ग्लोब एरीना (Globe Arena) नाम से कार्य कर चुकी थी। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच और विशेष जांच दल (SIT) गठित कर जांच कराने की मांग भी की।

पैनल चर्चा में OSM प्रणाली के अंतर्गत होने वाली मूल्यांकन प्रक्रिया पर चिंताएँ व्यक्त की गईं, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप से अपलोड कर शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन जांचा जाता है। चर्चा में धुंधली स्कैन कॉपियों, गलत अपलोड और पुनर्मूल्यांकन के दौरान अंकन में कथित विसंगतियों की रिपोर्टों का उल्लेख किया गया।

OSM प्रणाली के लागू होने पर सवाल

चर्चा के दौरान 19 वर्षीय निसर्ग अधिकारी नामक युवक की एक पोस्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उसने दावा किया था कि उसने नैतिक हैकिंग (ethical hacking) के माध्यम से सीबीएसई OSM पोर्टल में सुरक्षा खामियां खोजीं और उनकी जानकारी CERT-In को दी। कार्यक्रम में उसके इस दावे पर चर्चा हुई कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कई कमजोरियों को ठीक नहीं किया गया।

पैनल ने इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन द्वारा उठाई गई साइबर सुरक्षा और पारदर्शिता संबंधी चिंताओं का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में संगठन के उस बयान को उद्धृत किया गया जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में मौजूद कमजोरियाँ निष्पक्षता, भरोसे और छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े करती हैं। चर्चा में यह भी सामने आया कि संचालन समिति के कुछ सदस्यों ने कथित रूप से सीबीएसई को पर्याप्त क्षेत्रीय परीक्षण और अतिरिक्त तकनीकी सुरक्षा उपायों के बिना OSM प्रणाली लागू न करने की चेतावनी दी थी। पैनल ने बैठक की कार्यवाही (minutes) का हवाला दिया, जिनमें इन चिंताओं का उल्लेख होने की बात कही गई।

साझा किए गए व्यक्तिगत अनुभव

पुनर्मूल्यांकन में कथित रूप से पाई गई विसंगतियों पर भी चिंता जताई गई। चर्चा में ऐसे मामलों का जिक्र हुआ जहां छात्रों ने दावा किया कि उनके कुछ उत्तरों को जांचा ही नहीं गया या उत्तर पुस्तिकाएं गलत तरीके से अपलोड की गईं। वेदांत नामक छात्र का एक उदाहरण भी दिया गया, जिसकी उत्तर पुस्तिका कथित रूप से गलत तरीके से अपलोड कर दी गई थी। चर्चा में उन मामलों का भी उल्लेख किया गया जहां स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं धुंधली थीं या पढ़ने में कठिनाई हो रही थी।

इस बात पर भी चर्चा हुई कि ऐसी समस्याओं का असर उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर किस प्रकार पड़ सकता है। यह सवाल उठाया गया कि क्या अंकों में मामूली अंतर भी प्रवेश और भविष्य के शैक्षणिक अवसरों को प्रभावित कर सकता है।

जांच की मांग पर रजत यादव का बयान

रजत यादव ने कहा कि OSM प्रणाली से जुड़े आरोपों की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह केवल 18 लाख छात्रों का मामला नहीं है, बल्कि 18 लाख परिवारों का मुद्दा है।”यादव ने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया, मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और निजी एजेंसियों को ठेके दिए जाने की प्रक्रिया की जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा, “एक विशेष एजेंसी को जांच करनी चाहिए कि इस कंपनी ने क्या किया, उनका प्रदर्शन कैसा था, शिक्षक कौन थे और मूल्यांकन कैसे किया गया।”उन्होंने परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को निजी कंपनियों को सौंपे जाने पर भी सवाल उठाए। यादव ने कहा, “सरकार नहीं चाहती कि जवाबदेही सीधे उस तक पहुंचे। यही कारण है कि हर परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया निजी विक्रेताओं को दे दी जाती है।”

शिक्षा व्यवस्था के निजीकरण पर बहस

शिक्षा और परीक्षा प्रणालियों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की भूमिका को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। प्रोफेसर तनवीर ऐजाज़ ने कहा कि किसी भी प्रणाली को पूरी तैयारी और परीक्षण के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा, “यदि वे किसी कार्यक्रम को पूरी तरह सुरक्षित और त्रुटिरहित तरीके से लागू करने के लिए तैयार नहीं हैं, तो उन्हें इसे शुरू नहीं करना चाहिए।”ऐजाज़ ने कहा कि सरकारों को छात्रों को प्रभावित करने वाली नई प्रणालियां लागू करने से पहले उनकी खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करना चाहिए।

उन्होंने शिक्षा संबंधी कार्यों के बढ़ते ठेकेदारीकरण की भी आलोचना की। ऐजाज़ ने कहा, “आप परीक्षा प्रणाली को केवल ठेके पर नहीं दे सकते।” उन्होंने विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के विस्तार को एक गंभीर चिंता बताया।

भरोसे और जवाबदेही को लेकर चिंता

चर्चा बार-बार सार्वजनिक संस्थानों में भरोसे के मुद्दे पर लौटती रही। ऐजाज़ ने कहा कि छात्र धीरे-धीरे सरकारी व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों पर विश्वास खो रहे हैं।उन्होंने कहा, “छात्र सरकार पर भरोसा खो रहे हैं। छात्र सार्वजनिक व्यवस्था पर भरोसा खो रहे हैं। छात्र शिक्षा प्रणाली पर भरोसा खो रहे हैं।”

कार्यक्रम में पुनर्मूल्यांकन प्रक्रियाओं के दौरान छात्रों और अभिभावकों पर पड़ने वाले मानसिक तनाव पर भी चर्चा हुई। ऐजाज़ ने कहा कि सरकारों को छात्रों की चिंताओं को दूर करना चाहिए और मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।चर्चा के दौरान साइबर सुरक्षा और डिजिटल तैयारी पर भी सवाल उठाए गए। कार्यक्रम में इस बात पर चिंता जताई गई कि क्या OSM प्रणाली लागू करने से पहले पर्याप्त प्रशिक्षण दिया गया था।

आयुष्मान पांडे ने बताया “बड़ा घोटाला”

राजनीतिक कार्यकर्ता आयुष्मान पांडे ने कार्यक्रम के दौरान इस विवाद को “बहुत बड़ा घोटाला” बताया और कहा कि शिक्षा को लाभ कमाने का माध्यम नहीं बनना चाहिए, बल्कि यह एक सार्वजनिक हित की व्यवस्था बनी रहनी चाहिए।उन्होंने कहा, “शिक्षा एक सार्वजनिक संपत्ति है। इसमें लाभ कमाने की मानसिकता लाई जा रही है।”

पांडे ने शिक्षा प्रणाली में निजी ठेकेदारों की भूमिका की आलोचना की और उन कंपनियों को ठेके दिए जाने पर सवाल उठाया जिन पर पहले से आरोप या जांच चल रही हो।उन्होंने OSM विवाद को शिक्षा नीति और सार्वजनिक संस्थानों से जुड़ी व्यापक चिंताओं का हिस्सा बताया। पांडे ने कहा, “अगर आप CBSE को ही खत्म कर देंगे और दुनिया का भरोसा उस पर से उठ जाएगा, तो हमारे पास बचेगा क्या?”

छात्रों का विरोध प्रदर्शन और भविष्य की चिंता

पैनल ने प्रश्नपत्र लीक और मूल्यांकन संबंधी मुद्दों को लेकर छात्रों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी चर्चा की। रजत यादव ने कहा कि देशभर में छात्र कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं।उन्होंने कहा, “छात्र सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं और लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं।”

कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि प्रभावित छात्रों को मुआवजा देना संभव है या नहीं। यादव ने कहा कि अंकों में मामूली अंतर भी छात्रों के प्रवेश और भविष्य के अवसरों को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसकी भरपाई करना कठिन है।ऐजाज़ ने सुझाव दिया कि छात्रों और नागरिक समाज संगठनों को जवाबदेही, निष्पक्षता और संस्थागत सुधारों की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “शिक्षा कभी राजनीतिक एजेंडे में नहीं रही। अब समय आ गया है कि शिक्षा को राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए।”


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