क्या फिर होगा किसान आंदोलन? ट्रेड डील, किसानों के मुद्दे पर नई राजनीतिक जंग शुरू
राहुल गांधी ने बजट सत्र के पहले चरण के आखिरी दिन संसद में ही किसान यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की. जिसके बाद मोदी सरकार के मंत्रियों ने राहुल पर हमला बोला है.
क्या मोदी सरकार को फिर से देश में किसान आंदोलन होने का डर सता रहा है? क्या यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट के तीन वरिष्ठ मंत्री भारत अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के विरोध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ किसानों के प्रतिनिमंडल से मुलाकात के बाद उनपर जोरदार हमला बोल रहे हैं?
दरअसल भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं. प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका के आगे सरेंडर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा नरेंद्र 'सरेंडर' मोदी ने भारत के किसानों के साथ विश्वासघात किया और किसान ये बात समझ चुके हैं. उन्होंने कहा, भारत अमेरिका के बीच ये सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि हमारे अन्नदाताओं की आजीविका पर सीधा हमला है.
किसान यूनियनों के साथ राहुल गांधी की मुलाकात
13 फरवरी 2026 को राहुल गांधी ने बजट सत्र के पहले चरण के आखिरी दिन संसद में ही किसान यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की. इस मुलाकात को लेकर X पर राहुल ने लिखा, संसद में आज किसान यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात में उनकी चिंता साफ़ दिखाई दी. महंगाई, बढ़ती लागत और MSP की अनिश्चितता से जूझ रहे किसानों को अब भारी सब्सिडी और मशीनी ताक़त से लैस विदेशी फसलों के सामने बिना तैयारी के खड़ा किया जा रहा है. उन्होंने लिखा, यह बराबरी की लड़ाई नहीं, बल्कि एकतरफ़ा दबाव है. सरकार के खोखले आश्वासन अब नहीं चलेंगे. किसानों के भविष्य का सौदा उनकी सहमति के बिना नहीं हो सकता है. राहुल ने कहा, कुछ भी हो जाए, मैं और कांग्रेस पार्टी भारत के अन्नदाताओं के हक, सुरक्षा और सम्मान के लिए उनके साथ खड़े हैं.
अमित शाह बोले, राहुल गांधी हर रोज बोल रहे झूठ
राहुल के इस पोस्ट के बाद Carpet Bombing के जरिए उनपर जुबानी हमला शुरू हो गया है. गृह मंत्री अमित शाह से लेकर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल पर निशाना साधते हुए ट्रेड डील को लेकर गुमराह करने का आरोप लगाया है. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, राहुल गांधी ने हर रोज झूठ बोलने की परंपरा की शुरुआत की है. उन्होंने कहा, पीएम मोदी ने यूरोपीय यूनियन, इंग्लैंड और अमेरिका के साथ किए गए ट्रेड डील से मछुआरों को बड़ा फायदा होने वाला है. लेकिन राहुल गांधी मछुआरों और किसानों को गुमराह करना चाहते हैं. वे झूठ बोलकर भ्रमित करना चाहते हैं. मैं आज मंच से राहुल गांधी जी को जवाब देता चाहता हूं वे ट्रेड डील की बारिकियों को देखें. अमित शाह ने कहा, पीएम मोदी ने ट्रेड डील और FTA से हमारे किसानों और मछुआरों को 100 फीसदी प्रोटेक्शन दिया है. हमारे किसानों और मछुआरों को कोई नुकसान नहीं होने वाला है.
पीयूष गोयल ने कहा, भ्रम फैला रहे राहुल
अमित शाह ही नहीं पीयूष गोयल ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा गुमराह करने का आरोप लगाया. पीयूष गोयल ने कहा, कांग्रेस आज निराश है, भ्रम फैलाने के अलावा उनके पास कोई योजना नहीं है. झूठ और फरेब के अलावा हमारी आलोचना करने के लिए भी उनके पास मुद्दा नहीं है. पीयूष गोयल ने कहा, मैं देख रहा हूं एक के बाद एक रोज झूठी बातें बोलकर हमारे अन्नदाता को भ्रमित कर रहे हैं. पर मुझे विश्वास है राहुल गांधी जैसे खारिज (Discredited) नेता और उनके सहयोगी पार्टी टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी लाख कोशिश कर लें लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को देश की सेवा, 140 करोड़ लोगों के सपने को साकार करने और विकसित व समृद्ध भारत बनाने से रोक नहीं सकते.
शिवराज सिंह चौहान ने भी बोला हमला
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राहुल ने हमला बोलते हुए कहा, राहुल गांधी लगातार झूठ बोल रहे हैं. बेशर्मी से झूठ बोल रहे हैं और वीडियो से भी उनका झूठ साफ सामने नजर आ रहा है. झूठ बोलकर किसानों को गुमराह करने की असफल कोशिश कर रहे हैं. लेकिन मैं दावे के साथ कहना चाहता हूं, भारत -अमेरिका के बीच जो ट्रेड डील हुआ है उसमें देशहित को सर्वोपरि रखा गया है. हमारे किसान, स्टार्टअप, मछुआरों के हितों की रक्षा की गई है. उन्होंने कहा, झूठ कितना भी जोर से बोला जाए, वह सच नहीं बन जाता है. बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी से मिलने वाले किसान नेताओं को लेकर कहा कि किसानों के भेष में राहुल ने कांग्रेस नेताओं के साथ मुलाकात की है.
कपास किसानों - टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को राहुल का साथ
लेकिन राहुल यहीं नहीं रूके. भारत अमेरिका ट्रेड डील को उन्होंने अब देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा करार दिया है. उन्होंने 14 फरवरी को एक पोस्ट में लिखा,18% टैरिफ बनाम 0% - आइए समझाता हूं, कैसे झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इसपर भ्रम फैला रहे हैं. उन्होंने लिखा, बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्यात पर 0% टैरिफ का फायदा दिया जा रहा है शर्त बस इतनी है कि वो अमेरिकी कपास आयात करे.
भारत के गारमेंट्स पर 18% टैरिफ की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बांग्लादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया - “अगर यही फायदा हमें भी चाहिए, तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी.”
राहुल बोले, संकट में कपास किसान
राहुल ने पूछा, आखिर, ये बात तब तक देश से छुपाई क्यों गई? और, ये कैसी नीति है? क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है - या फिर “आगे कुआं, पीछे खाई” की हालत में फंसाने वाला जाल? अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे. अगर नहीं मंगवाते, तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा. और, अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है. भारत में टेक्सटाइल उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं. करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी इन्हीं पर टिकी है. इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोज़गारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना. उन्होंने कहा, एक दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा सौदा करती जो कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स - दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती. लेकिन इसके ठीक उलट, नरेंद्र “सरेंडर” मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाला साबित हो सकता है.
किसानों के आंदोलन को कांग्रेस का समर्थन?
बहरहाल 12 फरवरी को जब ट्रेड यूनियन ने देशव्यापी हड़ताल की तो केंद्र सरकार के ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा कानून को खत्म करना भी हड़ताल का बड़ा मुद्दा था. तो किसान यूनियन भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में इस हड़ताल में शामिल हुए. अब राहुल गांधी के साथ किसान नेताओं की मुलाकात ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है. 2020 में जब तीन कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली की सीमा पर जब किसान आंदोलन चल रहा था तो कांग्रेस केवल नैतिक समर्थन दे रही थी. लेकिन ये माना जा रहा है कि मनेरगा कानून के बाद भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में अगर किसान मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे तो कांग्रेस खुलकर आंदोलन का समर्थन कर सकती है.

