
व्यापार नहीं, अडाणी की रिहाई का सौदा हुआ! पीएम पर राहुल गांधी का हमला
कांग्रेस नेता ने एक्स (X) पर प्रधानमंत्री को बताया 'कॉम्प्रोमाइज्ड', अमेरिका द्वारा उद्योगपति के खिलाफ मुकदमा बंद करने की खबरों के बाद साधा निशाना...
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौता (Trade Deal) किया है, उसका एकमात्र उद्देश्य अरबपति व्यवसायी गौतम अडाणी की "रिहाई" सुनिश्चित करना था। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर हिंदी में पोस्ट करते हुए लिखा, "कॉम्प्रोमाइज्ड (समझौतावादी) पीएम ने कोई व्यापार सौदा नहीं किया, बल्कि अडाणी की रिहाई का सौदा किया है।" राहुल गांधी का यह तीखा बयान उन खबरों के सामने आने के बाद आया है, जिनमें कहा गया है कि अमेरिकी सरकार उस मुकदमे को निपटाने (Settle करने) पर सहमत हो गई है, जिसमें अडाणी पर कथित रिश्वतखोरी की बात छिपाने का आरोप लगाया गया था।
अमेरिकी अदालत के दस्तावेजों से हुआ खुलासा
गुरुवार को प्रकाशित अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिकी सरकार अडाणी के खिलाफ दायर उस मुकदमे को वापस लेने या निपटाने पर सहमत हो गई है, जिसमें उन पर निवेशकों को धोखा देने का आरोप था। मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि गौतम अडाणी ने निवेशकों से यह बात छिपाई कि भारत में उनकी कंपनी के विशाल सौर ऊर्जा (Solar Energy) प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए कथित तौर पर रिश्वतखोरी की योजना का सहारा लिया गया था। अमेरिकी न्याय विभाग और प्रतिभूतियों से जुड़े इस कानूनी मामले के सुलझने की खबरों ने भारत में एक बार फिर बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।
जयराम रमेश ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को रोकने पर उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के साथ उस "अत्यंत एकतरफा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते" पर सहमति क्यों जताई, जो वास्तव में अमेरिका के लिए एक बड़ी लूट की तरह था। जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, "यह भी साफ हो गया है कि उन्होंने राष्ट्रीय हित के बजाय राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों के आगे झुकते हुए 10 मई 2025 को अचानक 'ऑपरेशन सिंदूर' को क्यों रोक दिया था। खबरों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अब 'मोडाणी' के खिलाफ भ्रष्टाचार के सभी आरोप हटाने जा रहा है।" उन्होंने आगे सवालिया लहजे में पूछा कि प्रधानमंत्री और कितने 'कॉम्प्रोमाइज्ड' हो सकते हैं?
क्या था साल 2024 का यह अमेरिकी मुकदमा?
साल 2024 के अंत में अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) द्वारा दायर किए गए इस मुकदमे में अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी (जो समूह की नवीकरणीय ऊर्जा इकाई 'अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड' के निदेशक हैं) को नामजद किया गया था। मुकदमे में आरोप था कि उन्होंने 2020 से 2024 के बीच भारतीय सरकारी अधिकारियों को लगभग 265 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2,200 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने पर सहमति जताई थी। यह रिश्वत इसलिए दी जानी थी ताकि सौर ऊर्जा आपूर्ति के आकर्षक ठेके हासिल किए जा सकें, जिनसे अगले 20 वर्षों में 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का मुनाफा होने की उम्मीद थी।
अडाणी समूह ने आरोपों को किया था खारिज
अमेरिकी एजेंसी के मुकदमे में यह भी आरोप लगाया गया था कि अडाणी समूह ने अमेरिकी फर्मों सहित अन्य निवेशकों से झूठ बोलकर और अपनी रिश्वत विरोधी नीतियों के बारे में भ्रामक बयान देकर 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज और बॉन्ड जुटाए थे। हालांकि बंदरगाह से लेकर ऊर्जा क्षेत्र तक फैले इस विशाल भारतीय औद्योगिक घराने (Conglomerate) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया था। अब इस मामले में अमेरिकी प्रशासन के रुख बदलने को कांग्रेस ने सीधे तौर पर भारत-अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौतों से जोड़कर राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।

