
Meta की गलती या राजनीतिक दबाव? राहुल गांधी की रील पर घमासान
राहुल गांधी और सीएम विजय की वायरल रील हटने पर कांग्रेस ने डिजिटल सेंसरशिप का आरोप लगाया, जबकि सरकार और Meta ने तकनीकी गलती बताया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के शपथग्रहण समारोह के बाद राहुल गांधी की इंस्टाग्राम रील को कुछ समय के लिए ब्लॉक किए जाने पर अब बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना ने डिजिटल सेंसरशिप, Meta के मॉडरेशन सिस्टम और सरकार की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चेन्नई में हुए शपथ समारोह के बाद शेयर की गई इस रील ने महज एक घंटे के भीतर 1.2 करोड़ से ज्यादा व्यूज़ हासिल कर लिए थे, लेकिन इसके तुरंत बाद यह अचानक इंस्टाग्राम पर दिखाई देना बंद हो गई।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि रील को आईटी नियमों के तहत हटाया गया, जबकि सरकारी सूत्रों ने किसी भी तरह की भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि Meta के आंतरिक मॉडरेशन सिस्टम ने गलती से पोस्ट को फ्लैग कर दिया था। इस पूरे विवाद पर The Federal के कार्यक्रम Capital Beat में कांग्रेस नेता रुचिरा चतुर्वेदी, टीवीके प्रतिनिधि विवेक गणनानंदन और राजनीतिक रणनीतिकार अंकित लाल ने विस्तार से चर्चा की।चर्चा की शुरुआत में एंकर ने बताया कि सरकारी सूत्रों ने साफ किया है कि इस मामले में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और यह Meta की तकनीकी गलती हो सकती है।
कांग्रेस नेता रुचिरा चतुर्वेदी ने दावा किया कि सिर्फ राहुल गांधी का अकाउंट ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स से जुड़े पोस्ट भी ब्लॉक किए गए थे। उनके मुताबिक भारी सार्वजनिक नाराजगी और Meta से लगातार अपील के बाद ही रील को बहाल किया गया।उन्होंने कहा कि पोस्ट अपलोड होने के एक घंटे के भीतर 1.2 करोड़ से ज्यादा बार देखी गई और फिर अचानक सस्पेंड कर दी गई। कुछ घंटों बाद Meta ने इसे रहस्यमय तरीके से वापस बहाल कर दिया।
रुचिरा ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जब इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए पूछा कि उनकी रील क्यों हटाई गई, तो वह स्टोरी भी कुछ समय के लिए गायब कर दी गई थी। बाद में उसे भी बहाल कर दिया गया। उनका कहना था कि अगले दिन भी कांग्रेस के सोशल मीडिया अकाउंट्स से विजय के शपथ समारोह से जुड़े पोस्ट हटाए जाने जैसी घटनाएं जारी रहीं।कांग्रेस ने Meta और सरकार दोनों की सफाई पर सवाल उठाए। रुचिरा चतुर्वेदी ने कहा कि असल वजह अब तक स्पष्ट नहीं है। आमतौर पर इसे तकनीकी गड़बड़ी या फॉल्स पॉजिटिव कहकर टाल दिया जाता है, लेकिन ब्लॉकिंग मैसेज में आईटी नियमों और कानूनी मांगों का हवाला दिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के महीनों में विपक्षी नेताओं और कांग्रेस के सोशल मीडिया अकाउंट्स को बार-बार निशाना बनाया गया है। उनके मुताबिक यह व्यापक डिजिटल सेंसरशिप अभियान का हिस्सा है, जहां राजनीतिक व्यंग्य, टिप्पणी और सामान्य राजनीतिक खबरों तक को हटाया जा रहा है।
रुचिरा ने सरकार की उस योजना की भी आलोचना की, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट हटाने के लिए दिए जाने वाले समय को 36 घंटे से घटाकर तीन घंटे तक करने की बात कही जा रही है। उनका कहना था कि इतने बड़े फैसले बिना पर्याप्त चर्चा और संसदीय बहस के लागू किए जा रहे हैं।
टीवीके प्रतिनिधि विवेक गणनानंदन ने इस विवाद को राहुल गांधी और विजय के एक साथ सार्वजनिक मंच पर आने से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में युवा मतदाताओं और समर्थकों के बीच इस तस्वीर और वीडियो को लेकर जबरदस्त उत्साह था।उन्होंने कहा कि लोग राहुल गांधी और विजय की जोड़ी को एक नए राजनीतिक संकेत के तौर पर देख रहे हैं। उनके मुताबिक कांग्रेस द्वारा विजय सरकार को समर्थन देने के बाद इस रील की लोकप्रियता लोगों की राजनीतिक जिज्ञासा को दिखाती है।
गणनानंदन ने आरोप लगाया कि संभव है रील की पहुंच को सीमित करने के पीछे राजनीतिक मकसद रहा हो ताकि कांग्रेस और टीवीके के संभावित गठबंधन पर चर्चा को रोका जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि पोस्ट किसने हटाया।राजनीतिक रणनीतिकार अंकित लाल ने कहा कि इस पूरे मामले के पीछे दो संभावनाएं हो सकती हैं। पहली, सरकार ने आधिकारिक माध्यमों से कंटेंट को फ्लैग किया हो, या दूसरी, Meta का एआई आधारित मॉडरेशन सिस्टम गलत तरीके से सक्रिय हो गया हो।
उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में Meta ने मानव मॉडरेटर्स पर निर्भरता कम करते हुए एआई आधारित मॉडरेशन सिस्टम को ज्यादा महत्व दिया है। अंकित लाल ने सरकार के सहयोग पोर्टल का भी जिक्र किया, जिसके जरिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कंटेंट को सीमित करने के अनुरोध भेजे जा सकते हैं।
उनका दावा था कि कई बार Meta पहले कंटेंट ब्लॉक कर देता है और बाद में जांच करता है कि उसने किसी नीति का उल्लंघन किया या नहीं।साथ ही उन्होंने कहा कि यह मामला एआई मॉडरेशन सिस्टम की खामियों को भी उजागर करता है। अंकित लाल ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे मामले अक्सर विपक्षी नेताओं के साथ ही क्यों सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी एआई आधारित मॉडरेशन सिस्टम में मजबूत मानवीय निगरानी जरूरी है और पूरी दुनिया को सिर्फ एआई के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
चर्चा के दौरान ऑनलाइन राजनीतिक संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी चिंता जताई गई। अंकित लाल ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां मॉडरेशन फैसलों को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने में विफल रही हैं।उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष के नेता को ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, तो आम कंटेंट क्रिएटर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
रुचिरा चतुर्वेदी ने कहा कि विपक्ष अब इस मुद्दे पर कानूनी कार्रवाई, संसद और सार्वजनिक मंचों पर आवाज उठाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभी संभावित कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।वहीं विवेक गणनानंदन ने इसे ऑनलाइन राजनीतिक चर्चाओं को प्रभावित करने की एक बड़ी कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि असली चर्चा इस बात पर होनी चाहिए थी कि राहुल गांधी और विजय का साथ भारतीय राजनीति में क्या संकेत देता है।उन्होंने यह भी कहा कि भले ही कंटेंट कुछ समय के लिए हटाया गया हो, लेकिन उससे लोगों की राजनीतिक दिलचस्पी खत्म नहीं की जा सकती।
आखिर में पैनल ने माना कि भले ही रील बाद में बहाल कर दी गई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पारदर्शिता, एआई आधारित सेंसरशिप और सरकारों तथा बड़ी टेक कंपनियों के रिश्तों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

