
खाड़ी संकट के बीच भारत की बड़ी तैयारी: 12,980 करोड़ के इंश्योरेंस पूल को मंजूरी
राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया संकट पर की समीक्षा बैठक। समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए 'मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल' और नए तेल आयात स्रोतों पर दिया जोर।
Unstable West Asia: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच भारत ने अपनी सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया है। शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक उच्च स्तरीय मंत्रिसमूह (IGoM) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि स्थिति बेहद "अस्थिर" है। सरकार ने किसी भी अचानक होने वाले संकट से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं।
अचानक युद्ध भड़कने की स्थिति के लिए रहें तैयार: रक्षा मंत्री
राजनाथ सिंह ने बैठक में जमीनी स्थिति को अनिश्चित बताते हुए आगाह किया कि भारत को न केवल तनाव कम होने की उम्मीद रखनी चाहिए, बल्कि किसी भी तरह की तनाव के दोबारा बढ़ने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसी भी संभावित जोखिम को कम करने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठा रही है। बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।
60 दिनों का तेल बैकअप और सप्लाई चेन की सुरक्षा
इस बैठक में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ी और राहत भरी जानकारी साझा की गई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन बाधित होने के बावजूद भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (ATF) का 60 दिनों से अधिक का स्टॉक मौजूद है। वहीं, एलएनजी (LNG) का 50 दिन और एलपीजी (LPG) का 40 दिन का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। अप्रैल और मई 2026 के लिए आयात की जरूरतें भी काफी हद तक सुरक्षित कर ली गई हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने की रणनीति
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब भारत केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है। जोखिम को कम करने के लिए सरकार ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों से कच्चे तेल और गैस के आयात के स्रोत बढ़ा दिए हैं। इससे होर्मुज में किसी भी नाकेबंदी या गोलीबारी की स्थिति में भारत की घरेलू आपूर्ति पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।
'भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल' को मिली मंजूरी
व्यापार को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने 12,980 करोड़ रुपये की सॉवरेन गारंटी के साथ 'भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल' बनाने को मंजूरी दी है। यह फैसला इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि युद्ध जैसी स्थिति में विदेशी बीमा कंपनियां भारी प्रीमियम वसूलती हैं या कवरेज देने से मना कर देती हैं। अब इस घरेलू पूल के जरिए भारतीय जहाजों को किफायती और निरंतर बीमा कवर मिलता रहेगा, जिससे आयात-निर्यात में कोई बाधा नहीं आएगी।
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