
RSS का राष्ट्रवाद ‘फर्जी’, अमेरिका में चाटुकारिता! राम माधव पर राहुल गांधी का तंज
बीजेपी नेता राम माधव के भारत-अमेरिका संबंधों पर बयान से विवाद बढ़ गया है। माफी के बावजूद कांग्रेस ने सरकार पर अमेरिकी दबाव में काम करने और हितों से समझौते का आरोप लगाया है।
भाजपा नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े राम माधव के भारत-अमेरिका संबंधों पर दिए गए बयान ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने वॉशिंगटन डी.सी. में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए, लेकिन इसके बावजूद सवाल उठाए जा रहे हैं कि भारत कहां कमी कर रहा है।
राम माधव ने अपने बयान में कहा कि भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद किया, रूस से तेल आयात रोकने पर सहमति जताई और अमेरिकी टैरिफ का भी ज्यादा विरोध नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि इन सबके बावजूद भारत की भूमिका पर प्रश्न क्यों खड़े किए जा रहे हैं।
हालांकि, उनके इस बयान पर विपक्ष की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद राम माधव ने सफाई देते हुए माफी मांग ली। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत ने कभी भी रूस से तेल आयात रोकने पर सहमति नहीं दी और 50% टैरिफ का भी जोरदार विरोध किया था।
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस बयान से साफ होता है कि सरकार ने संयुक्त राज्य अमेरिका को खुश करने के लिए भारत के हितों से समझौता किया है। पार्टी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दबाव में काम कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रीय सरेंडर संघ।नागपुर में फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद। USA में कोरी चाटुकारिता। राम माधव ने तो बस संघ का असली चेहरा ही उजागर किया है।
दरअसल, राम माधव हडसन इंस्टीट्यूट में आयोजित एक पैनल चर्चा में शामिल हुए थे, जहां उनके साथ पूर्व अमेरिकी राजनयिक एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड और अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल भी मौजूद थे। चर्चा के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने 50% टैरिफ को स्वीकार करने जैसा रुख अपनाया और नए ट्रेड डील में 18% टैरिफ भी माना, जिससे यह सवाल उठता है कि भारत आखिर किस मुद्दे पर पीछे है।इस पूरे घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका संबंधों और व्यापार नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जिसमें सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

