राहुल गांधी को मिली बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR की मांग वाली याचिका की खारिज
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राहुल गांधी को मिली बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR की मांग वाली याचिका की खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका के खारिज होने से राहुल गांधी को कानूनी मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार (1 मई) को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ कथित तौर पर राष्ट्रद्रोही और विवादित टिप्पणी के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस विक्रम डी. चौहान की पीठ ने यह आदेश सुनाते हुए संभल की निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसने पहले ही इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया था।

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद साल 2025 में दिए गए एक कथित बयान से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के नए कार्यालय के उद्घाटन समारोह के दौरान एक ऐसा बयान दिया था जो देश की संप्रभुता और अखंडता पर चोट करता है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा था, "अब हम केवल भाजपा और आरएसएस से नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि हम भारतीय राज्य (Indian State) से लड़ रहे हैं।" सिमरन गुप्ता ने इसी बयान को आधार बनाते हुए दावा किया कि यह टिप्पणी सीधे तौर पर 'देशद्रोह' (Sedition) की श्रेणी में आती है और इसका उद्देश्य देश को अस्थिर करना था।

अदालत की कार्यवाही और दलीलें

याचिकाकर्ता ने पहले संभल की एक अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की गुहार लगाई थी। हालांकि, संभल कोर्ट ने सबूतों और कानून की व्याख्या के आधार पर इस याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस तरह के बयान से जनता की भावनाएं आहत हुई हैं और यह बयान पूरी तरह से राष्ट्र-विरोधी है। उन्होंने मांग की कि पुलिस को राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करने का आदेश दिया जाए।

हाईकोर्ट का रुख

सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने याचिका को मेरिट के आधार पर खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि संभल कोर्ट ने जो फैसला सुनाया था, वह कानूनी रूप से सही था और उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिलता। इस फैसले के साथ ही राहुल गांधी को उन आरोपों से फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है, जिसमें उन्हें राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा था।

सियासी गलियारों में चर्चा

कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले का स्वागत किया है। पार्टी समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी के बयान का गलत अर्थ निकाला गया था। उनका तर्क है कि 'भारतीय राज्य' से लड़ने का मतलब संवैधानिक संस्थाओं पर सत्ताधारी दल के कथित नियंत्रण के खिलाफ लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ना था, न कि देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना। वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष का मानना है कि ऐसे बयानों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि धूमिल होती है।

यह मामला ऐसे समय में आया है जब देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक आलोचना की सीमाओं पर बहस छिड़ी हुई है। हाईकोर्ट के इस आदेश ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर बिना ठोस आधार के आपराधिक मामले दर्ज नहीं किए जा सकते।

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