
सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को राहत नहीं, असम कोर्ट जाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को अंतरिम राहत देने से इनकार कर उन्हें अग्रिम जमानत के लिए असम की अदालत जाने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) की पत्नी पर लगाए गए आरोपों से जुड़े मामले में 20 अप्रैल तक किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई से संरक्षण की मांग की थी।शीर्ष अदालत ने खेड़ा को निर्देश दिया कि वह इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए असम की सक्षम अदालत का रुख करें।
क्या है मामला?
5 अप्रैल को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खेड़ा ने मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइंया सरमा (Riniki Bhuyan Sharma) पर कई पासपोर्ट और विदेशों में संपत्ति होने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि इन जानकारियों का उल्लेख सरमा के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया।हालांकि, मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों पर गौर किया। अदालत ने असम की उस अदालत को, जहां खेड़ा याचिका दायर करेंगे, यह निर्देश भी दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट और तेलंगाना हाई कोर्ट की किसी भी टिप्पणी से प्रभावित न हो।साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने असम की अदालतों से कहा कि खेड़ा की याचिका पर जल्द सुनवाई की जाए।
तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर रोक
इससे पहले 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने Telangana High Court के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी।
सरकार का पक्ष
असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यह क्षेत्राधिकार (टेरिटोरियल जूरिस्डिक्शन) का मामला है और खेड़ा ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख क्यों किया।
कानूनी धाराएं
खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 175 (चुनाव से जुड़ा गलत बयान), 35 (निजी रक्षा का अधिकार) और 318 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

