असम केस में पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ीं, सुप्रीम कोर्ट ने बेल पर लगाई रोक
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असम केस में पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ीं, सुप्रीम कोर्ट ने बेल पर लगाई रोक

असम केस में पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांजिट जमानत पर रोक लगाते हुए आधार कार्ड और अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाए।


बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उन्हें ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज मानहानि और जालसाजी के आरोपों से जुड़ा है।यह एफआईआर हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनीकी भुइयां शर्मा की शिकायत पर दर्ज की गई थी। पवन खेड़ा ने उन पर कई विदेशी पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था, जिसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने असम सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक लगा दी।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पवन खेड़ा असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो इस स्टे आदेश का उस पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

असम सरकार की दलीलें

असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यह मामला तेलंगाना हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आताउन्होंने कहा कि जिस अपराध का आरोप है, उसमें अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है, लेकिन हाई कोर्ट ने इस पहलू को नजरअंदाज किया।

आधार कार्ड पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में याचिका दायर करते समय अपनी पत्नी के आधार कार्ड का इस्तेमाल किया, ताकि वहां का अधिकार क्षेत्र स्थापित किया जा सके।इस पर तुषार मेहता ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि दस्तावेजों से स्पष्ट है कि उनकी पत्नी दिल्ली में रहती हैं और यह मामला अपनी सुविधा के अनुसार कोर्ट चुनने का प्रयास है।सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि गलत या भ्रामक दस्तावेज पेश कर अदालत के अधिकार क्षेत्र का अनुचित लाभ उठाया गया है।

कोर्ट का आदेश

सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी और मामले में नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

क्या है पूरा मामला?

असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई उनके उस बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने रिनीकी भुइयां शर्मा पर विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति होने का आरोप लगाया था।7 अप्रैल को असम पुलिस उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची थी, लेकिन वे वहां नहीं मिले। इसके बाद उन्होंने 10 अप्रैल को तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया, जहां उन्हें एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिली थी।हालांकि, असम सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर अब शीर्ष अदालत ने रोक लगा दी है।

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