
शशि थरूर का बड़ा बयान: नेहरू-इंदिरा के बराबर प्रभावशाली हैं पीएम मोदी
कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर ने पीएम मोदी के 12 साल के कार्यकाल का किया आकलन। आर्थिक तरक्की की तारीफ, संस्थाओं पर चिंता।
Shashi Tharoor On PM Modi Government: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद डॉ. शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कामकाज का गहराई से आकलन करते हुए एक विशेष लेख लिखा है। इस लेख में उन्होंने पीएम मोदी की नेतृत्व क्षमता की तुलना देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से की है। थरूर ने स्पष्ट रूप से माना है कि आजादी के बाद देश के तीन सबसे प्रभावशाली नेताओं में पीएम मोदी निस्संदेह नेहरू और इंदिरा के साथ खड़े हैं और उनकी विरासत भी उन्हीं की तरह आने वाले समय में भारत की राह तय करेगी।
शशि थरूर के कार्यालय ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (Twitter) पर अंतरराष्ट्रीय पब्लिकेशन 'प्रोजेक्ट सिंडिकेट' में छपे इस लेख को री-पोस्ट किया है, जिसकी राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।
आर्थिक आधुनिकीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर में जबरदस्त तरक्की
डॉ. शशि थरूर ने पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार के तहत हुए बुनियादी और आर्थिक बदलावों की खुलकर सराहना की है:
बदला देश का ढांचा: थरूर ने अपने लेख में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश के आर्थिक आधुनिकीकरण और सरकारी क्षमता (गवर्नेंस डिलीवरी) को बढ़ाने के मामले में जबरदस्त प्रगति हुई है।
नेहरू का रिकॉर्ड: उन्होंने जिक्र किया कि 10 जून को नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने पहले आम चुनाव के बाद लगातार 4,398 दिनों तक पद संभालने वाले जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है।
असरदार नेतृत्व: हालांकि नेहरू ने आजादी के तुरंत बाद चुनाव से पहले भी पांच साल देश की कमान संभाली थी और इंदिरा गांधी ने कुल मिलाकर उनसे अधिक समय तक सेवा की थी (लेकिन लगातार नहीं), फिर भी मोदी का प्रभाव आज उन्हीं के समकक्ष है।
'तरक्की के साथ संस्थागत गिरावट पर भी जताई चिंता'
एक मंझे हुए विपक्षी नेता की तरह डॉ. शशि थरूर ने तारीफ के साथ-साथ सरकार के कामकाज से जुड़ी कुछ गंभीर चिंताओं को भी इस लेख में रेखांकित किया है:
संस्थाओं की स्वतंत्रता: थरूर ने आर्थिक प्रगति की सराहना करने के साथ ही यह भी लिखा कि इसी दौर में देश के भीतर संस्थागत स्वतंत्रता (Institutional Independence) के मामले में निराशाजनक गिरावट देखी गई है।
अल्पसंख्यकों का मुद्दा: उन्होंने लेख में यह अंदेशा भी जताया कि विकास की इस रफ्तार के बीच अल्पसंख्यकों को साथ लेकर चलने (Inclusivity) के मामले में कमी आई है।
भविष्य की रूपरेखा: कांग्रेस सांसद के मुताबिक, मोदी सरकार का यह मिला-जुला रिकॉर्ड इस बात की सबसे अहम जानकारी देता है कि 21वीं सदी में भारत वैश्विक मंच पर कैसे आगे बढ़ेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शशि थरूर अक्सर प्रधानमंत्री की नेतृत्व क्षमता और उनकी वैश्विक नीतियों के व्यावहारिक पहलुओं की तारीफ करते रहे हैं, जिसे लेकर कई बार कांग्रेस के भीतर उनके विरोधी असहज भी हो जाते हैं। लेकिन थरूर का यह ताजा लेख आर्थिक विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच का एक बेहद संतुलित विश्लेषण पेश करता है।
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