सुप्रीम कोर्ट ने कहा-हाईवे से पार्किंग हटाएं, NHAI और राज्य सरकारों को अल्टीमेटम
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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बड़े सड़क सुरक्षा सुधारों का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा-हाईवे से पार्किंग हटाएं, NHAI और राज्य सरकारों को अल्टीमेटम

अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए NHAI और राज्यों को 60 दिन का अल्टीमेटम दिया, अवैध पार्किंग और अनधिकृत ढांचों को हटाने के निर्देश


सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए देशभर में कई दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों की पार्किंग पर प्रतिबंध भी शामिल है। यह कदम तब उठाया गया जब शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही या बुनियादी ढांचे की कमी के कारण हाईवे खतरनाक नहीं बनने चाहिए।

न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग भारत की कुल सड़कों का केवल 2 प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन इन पर लगभग 30 प्रतिशत सड़क दुर्घटना मौतें होती हैं।

प्रणालीगत विफलता पर टिप्पणी

सड़क परिवहन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सड़कों को सुरक्षित बनाने के निर्देश देते हुए पीठ ने कहा कि अवैध पार्किंग या ब्लैकस्पॉट जैसी टाली जा सकने वाली खतरनाक स्थितियों के कारण एक भी व्यक्ति की मौत होना, राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की विफलता है।

अदालत ने कहा: “टाली जा सकने वाली परिस्थितियों जैसे अवैध पार्किंग या ब्लैकस्पॉट के कारण एक भी जान का जाना राज्य की सुरक्षा कवच की विफलता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन का अधिकार’ केवल जीवन छीनने से सुरक्षा नहीं देता, बल्कि यह राज्य पर यह सकारात्मक जिम्मेदारी भी डालता है कि वह ऐसा सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करे, जहां मानव जीवन सुरक्षित और सम्मानित हो।”

यह आदेश 13 अप्रैल को पारित किया गया।

सुओ मोटू मामला

अदालत ने यह आदेश स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए दर्ज मामले में दिया। यह मामला 2 और 3 नवंबर 2025 को राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में हुई सड़क दुर्घटनाओं के बाद दर्ज किया गया था, जिनमें 34 लोगों की मौत हुई थी। इन हादसों के पीछे प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी ढांचे की गंभीर खामियां जिम्मेदार बताई गई थीं।

लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि

पीठ ने कहा:“यात्रियों की सुरक्षा, गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत राज्य की जिम्मेदारी है। इसलिए इन अंतरिम निर्देशों के माध्यम से मूल समस्याओं को दूर करना आवश्यक है, जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत जारी किया गया है।”

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी आर्थिक या प्रशासनिक बाधा मानव जीवन के महत्व से ऊपर नहीं हो सकती और दिए गए सख्त समयसीमा इस संवैधानिक दायित्व की गंभीरता को दर्शाती है।

हाईवे पर पार्किंग पर सख्त रोक

अदालत ने निर्देश दिया कि कोई भी भारी या वाणिज्यिक वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग के कैरिजवे या पक्के किनारे (शोल्डर) पर पार्क या खड़ा नहीं किया जाएगा, सिवाय निर्धारित पार्किंग बे, ले-बाय या वे-साइड सुविधाओं के।

इस निर्देश के पालन के लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) का उपयोग किया जाएगा, जिसमें रियल-टाइम अलर्ट राज्य पुलिस को भेजे जाएंगे। GPS आधारित टाइम-स्टैम्प फोटो सबूत जुटाए जाएंगे। इंटीग्रेटेड e-चालान सिस्टम लागू होगा

सड़क किनारे ढांचों पर कार्रवाई

अदालत ने कहा:“इन निर्देशों का पालन NHAI, राज्य पुलिस, और राज्य परिवहन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी करेंगे। संबंधित जिलों के जिलाधिकारी नियमित निरीक्षण और पेट्रोलिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करेंगे। इन निर्देशों का पालन 60 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है।”

एक महत्वपूर्ण निर्देश यह भी है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के राइट ऑफ वे (ROW) के भीतर किसी भी नए ढाबे, भोजनालय या व्यावसायिक ढांचे के निर्माण या संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक रहेगी।

पीठ ने निर्देश दिया:“जिलाधिकारी 60 दिनों के भीतर सभी नए और मौजूदा अवैध ढांचों को CNH Act और 7 अगस्त 2025 की SOP के तहत हटाना सुनिश्चित करेंगे।”

साथ ही, कोई भी विभाग, प्राधिकरण या स्थानीय निकाय हाईवे सेफ्टी ज़ोन में बिना NHAI/PWD की पूर्व अनुमति के कोई लाइसेंस, NOC या व्यापार अनुमति जारी या नवीनीकृत नहीं करेगा। पहले से जारी लाइसेंसों की 30 दिनों के भीतर समीक्षा की जाएगी।

पेट्रोलिंग और निगरानी पर जोर

अदालत ने आगे निर्देश दिया कि हर जिले में, जहां से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है, वहां 15 दिनों के भीतर एक जिला हाईवे सुरक्षा टास्क फोर्स गठित की जाए। इसमें जिला प्रशासन, पुलिस, NHAI (या संबंधित एजेंसी), PWD और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे।

इसके अलावा हाईवे पर निगरानी और पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी। अवैध पार्किंग पर सख्त नजर रखी जाएगी। ATMS (कैमरा, स्पीड डिटेक्टर, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम) लागू किया जाएगा।

ट्रक ले-बाय सुविधाएं विकसित की जाएंगी। दुर्घटना ब्लैकस्पॉट और लाइटिंग सुधार पर काम होगा और विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा

अनुपालन की समयसीमा

अदालत ने सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) को निर्देश दिया कि वह विभिन्न राज्यों और एजेंसियों से डेटा लेकर 75 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश करे।

पीठ ने कहा:“सभी संबंधित प्राधिकरण इन निर्देशों के पालन के लिए आपसी समन्वय सुनिश्चित करें। यदि किसी प्रकार की समस्या आती है, तो पक्ष अदालत का रुख कर सकते हैं।”

अदालत ने इस मामले को दो महीने बाद अनुपालन समीक्षा के लिए सूचीबद्ध किया है।

गौरतलब है कि पिछले साल 15 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों को रोकने के लिए देशव्यापी दिशानिर्देश बनाने पर विचार किया था।

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