सुप्रीम कोर्ट: कॉकरोच जनता पार्टी विवाद को भावुकता से न लें
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सुप्रीम कोर्ट: 'कॉकरोच जनता पार्टी' विवाद को भावुकता से न लें

सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ जांच वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई से किया इनकार, सीजेआई बोले कि इस मामले को ज्यादा भावुकता से न लें।


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Supreme Court On Cockroach Janta Party: चीफ जस्टिस की टिप्पणी को आधार बनाकर जमीन तैयार करने में जुटी कॉकरोच जनता पार्टी पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस डिजिटल संगठन के खिलाफ जांच की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई से साफ मना कर दिया। याचिका में संगठन से जुड़े कथित फर्जी वकीलों की जांच कराने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले को सुना। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील एनके गोस्वामी से कहा कि इस विषय को इतनी भावुकता से न लें। यह पूरा विवाद अदालत की एक पुरानी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुआ था।


अदालत की टिप्पणियों के गलत इस्तेमाल पर वकील ने जताई भारी चिंता
याचिकाकर्ता के वकील एनके गोस्वामी ने अदालत के सामने अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि सीजेआई के स्पष्टीकरण के बाद भी भ्रामक प्रचार जारी है। सोशल मीडिया पर अदालत की टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। इस पर सीजेआई सूर्य कांत ने दोबारा कहा कि इसे दिल पर लेने की जरूरत नहीं है। अदालत ने इस मामले को नियमित प्रक्रिया के तहत देखने की बात कही।

सोशल मीडिया पर बेहद कम समय में लोकप्रिय हुआ यह नया संगठन
यह पूरा मामला एक डिजिटल और व्यंग्यात्मक अभियान से शुरू हुआ था। देखते ही देखते यह अभियान देश का एक बड़ा सोशल मीडिया मूवमेंट बन गया। इस 'कॉकरोच जनता पार्टी' की शुरुआत बोस्टन के एक रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने की थी। सोशल मीडिया पर लोगों ने व्यवस्था के प्रति अपना गुस्सा निकालने के लिए इसे जरिया बनाया।

इंस्टाग्राम पर इस नई पार्टी ने स्थापित किए लोकप्रियता के नए रिकॉर्ड
इस डिजिटल संगठन को सोशल मीडिया पर बहुत कम समय में भारी समर्थन मिला है। महज कुछ ही दिनों के भीतर इसके इंस्टाग्राम पेज पर 18 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हो गए। इस संख्या ने देश के बड़े राजनीतिक दलों के पेजों को भी पीछे छोड़ दिया। उदाहरण के लिए बीजेपी के इंस्टाग्राम पेज पर इस समय करीब 8.8 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

फर्जी लॉ डिग्री और अदालती कार्यवाही के व्यावसायिक उपयोग पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान एक अन्य वकील ने भी अदालत के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कोर्ट से फर्जी लॉ डिग्री के मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की। वकील ने कहा कि कोर्ट रूम की चर्चाओं का इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। इस पर सीजेआई ने जवाब दिया कि मामले में कोई बड़ी आपात स्थिति नहीं है।

अदालती टिप्पणियों से पब्लिसिटी बटोरने के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
याचिका में उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है जो कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का फायदा उठाते हैं। याचिका के अनुसार कोर्ट रूम के बयानों का इस्तेमाल पब्लिसिटी अभियानों के लिए किया जा रही है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि फर्जी डिग्री के सहारे वकालत करने वाले लोग न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

सीजेआई की एक पुरानी टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था पूरा विवाद
इस विवाद की शुरुआत 15 मई को उस समय हुई थी, जब एक वकील की वरिष्ठता से जुड़े मामले की सुनवाई चल रही थी। उस दौरान सीजेआई ने कथित तौर पर 'कॉकरोच' और 'परजीवी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म हुआ।

मुख्य न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी पर जारी किया था लिखित स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ने के बाद 16 मई को मुख्य न्यायाधीश ने इस पर अपनी स्थिति साफ की थी। उन्होंने एक कड़ा स्पष्टीकरण जारी कर कहा था कि मीडिया की खबरों से उन्हें दुख पहुंचा है। सीजेआई ने साफ किया कि उन्होंने देश के युवाओं की कोई आलोचना नहीं की थी। उनकी टिप्पणी सिर्फ उन लोगों के लिए थी जो फर्जी डिग्री लेकर वकालत में आ रहे हैं।






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