UAPA केस में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, जमानत नियम और जेल अपवाद है
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UAPA केस में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, जमानत नियम और जेल अपवाद है

सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए मामले में जेल में बंद आरोपी को दी जमानत, कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज करने वाले फैसले से नजीर कमजोर नहीं हो सकती।


Supreme Court On Omar Khalid And Sharjeel Imam : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि कड़े यूएपीए कानून में भी जमानत ही नियम है। जेल में रखना सिर्फ एक अपवाद है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने साफ किया है कि किसी भी नागरिक को बिना ट्रायल के लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता है। यह फैसला आने वाले समय में देश की सभी अदालतों के लिए एक बड़ा कानूनी मार्गदर्शक साबित होगा। कोर्ट की इस टिप्पणी से देश के कानूनी गलियारों में एक नई बहस शुरू हो गई है।


पिछले फैसले पर कोर्ट ने जताई गंभीर आपत्ति
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की पीठ ने एक अहम टिप्पणी की है। उन्होंने पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने पर सवाल उठाए। दिल्ली दंगा मामले में इन दोनों नेताओं को पहले जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि पिछला फैसला सुप्रीम कोर्ट के ही पुराने बड़े फैसलों को कमजोर करता है। अदालत के अनुसार पुराना फैसला एक बड़ी पीठ के ऐतिहासिक सिद्धांतों के खिलाफ नजर आता है।

न्यायिक अनुशासन का पालन करना बेहद जरूरी
जस्टिस भुयान ने फैसला सुनाते हुए न्यायिक अनुशासन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दो जजों की पीठ तीन जजों की बड़ी पीठ के आदेश की अनदेखी नहीं कर सकती। 'केए नजीब' मामले का ऐतिहासिक फैसला सभी अदालतों के लिए पूरी तरह बाध्यकारी है। छोटे बेंच बड़े बेंच के फैसलों को घुमा नहीं सकते हैं। वे नियमों को अपनी मर्जी से नजरअंदाज भी नहीं कर सकते। कानून की नजर में सभी अदालतें और बेंच इस अनुशासन से बंधे हुए हैं।

सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को मिली कोर्ट से राहत
यह महत्वपूर्ण टिप्पणी अदालत ने जम्मू-कश्मीर के निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत देते हुए की। अंद्राबी जून 2020 से एक गंभीर नारको-टेरर मामले में जेल में बंद थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए इस मामले की जांच कर रही थी। जांच एजेंसी ने उन पर सीमा पार से हेरोइन तस्करी का आरोप लगाया था। एजेंसी का दावा था कि इस पैसे से लश्कर और हिजबुल जैसे संगठनों को फंडिंग मिलती थी।

हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट को दी सख्त हिदायत
अंद्राबी पर एनडीपीएस एक्ट और यूएपीए के तहत आपराधिक साजिश के आरोप थे। विशेष एनआईए अदालत और जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने पहले उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालतों ने आरोपों की गंभीरता और ट्रायल के शुरुआती चरण का हवाला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब इन फैसलों को पलटते हुए आरोपी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक जेल में रखना किसी भी तरह सही नहीं है।

सिर्फ आरोपों के आधार पर जेल में रखना गलत
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल प्रथम दृष्टया मामला होने से किसी को अनंत काल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। स्पीडी ट्रायल यानी त्वरित सुनवाई हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। धारा 43डी(5) के तहत लगी पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 से ऊपर नहीं हो सकती हैं। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने 'रिपोर्टेबल' माना है। जस्टिस नागरत्ना ने फैसले की तारीफ करते हुए इसे कानून स्पष्ट करने वाला बताया।


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