कौन हैं वो 8 सांसद, जिन्होंने राघव चड्ढा के साथ-साथ छोड़ा AAP का साथ
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कौन हैं वो 8 सांसद, जिन्होंने राघव चड्ढा के साथ-साथ छोड़ा AAP का साथ

राघव चड्ढा ने साफ किया कि आम आदमी पार्टी के कुल 10 राज्यसभा सांसद हैं। कानून के मुताबिक, यदि 2/3 सांसद (यानी कम से कम 7 सांसद) एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती।


शुक्रवार की दोपहर भारतीय राजनीति के इतिहास में एक बड़े अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। आम आदमी पार्टी के 'पोस्टर बॉय' और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने न केवल पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, बल्कि अपने साथ 7 अन्य सांसदों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का सनसनीखेज ऐलान कर दिया है। इस कदम ने दिल्ली और पंजाब की सत्ता के गलियारों में कंपकंपी पैदा कर दी है।

"आदर्शों की बलि चढ़ गई पार्टी"

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा काफी भावुक लेकिन दृढ़ नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी पर निशाना साधा। चड्ढा ने कहा, "आम आदमी पार्टी उन बुनियादी मूल्यों और आदर्शों से पूरी तरह भटक गई है, जिनके लिए इसे अन्ना आंदोलन की कोख से पैदा किया गया था। आज मैं भारी मन से इस पार्टी से दूर जा रहा हूं और वास्तविक जनता की सेवा की ओर बढ़ रहा हूं।"

2/3 बहुमत का खेल: दलबदल कानून को दी मात?

राजनीति के जानकार इस घटनाक्रम को 'मास्टरस्ट्रोक' कह रहे हैं। राघव चड्ढा ने दावा किया कि उनके साथ राज्यसभा के कुल 10 सांसदों में से 8 सांसद (दो-तिहाई से अधिक) मौजूद हैं। कानूनन, यदि दो-तिहाई निर्वाचित सदस्य एक साथ पाला बदलते हैं, तो उन पर 'दलबदल विरोधी कानून' (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता की तलवार नहीं लटकती। राघव ने साफ किया कि उन्होंने मर्जर (विलय) की सभी कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है।

कौन-कौन से सांसद जा रहे हैं भाजपा में?

राघव चड्ढा के साथ जाने वाले सांसदों की लिस्ट में कई बड़े नाम शामिल हैं। उनके मुताबिक, 3 सांसद उनके साथ ही मौजूद हैं, जबकि अन्य ने भी अपनी सहमति दे दी है। भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों के नाम इस प्रकार हैं:

राघव चड्ढा: (खुद मुख्य चेहरा और रणनीतिकार)

स्वाति मालीवाल: (दिल्ली से राज्यसभा सांसद, जनवरी 2024 में चुनी गई थीं)

अशोक कुमार मित्तल: (पंजाब से सांसद, जिन्हें हाल ही में पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी)

हरभजन सिंह: (पूर्व क्रिकेटर और पंजाब से सांसद)

संदीप पाठक: (पंजाब से सांसद और AAP के बड़े संगठन मंत्री)

विक्रमजीत सिंह साहनी: (पंजाब से सांसद)

संजीव अरोड़ा: (पंजाब से सांसद)

बलबीर सिंह सीचेवाल: (पंजाब से सांसद)

अशोक मित्तल का जाना सबसे चौंकाने वाला

इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू अशोक मित्तल का इस्तीफा है। गौर करने वाली बात यह है कि महज 15 दिन पहले ही पार्टी ने राघव चड्ढा को हटाकर अशोक मित्तल को राज्यसभा में 'डिप्टी लीडर' की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन 15 दिनों के भीतर ही मित्तल ने भी राघव के साथ कदम मिलाते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया। इनके अलावा सूची में हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक और अन्य बड़े नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

BJP के लिए बड़ी जीत, केजरीवाल के लिए संकट

बीजेपी के लिए यह साल की सबसे बड़ी उपलब्धि है। चड्ढा जैसे युवा और पढ़े-लिखे चेहरे का साथ आना पार्टी को पंजाब में मजबूती देगा, जहां बीजेपी अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, अरविंद केजरीवाल के लिए यह एक व्यक्तिगत और राजनीतिक सदमा है। राघव चड्ढा उनके सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में से एक थे।

राघव चड्ढा ने साफ किया कि उनकी लड़ाई अब एक नए मंच से होगी। उन्होंने कहा कि देश को इस समय 'स्थिरता' की जरूरत है, न कि 'अराजकता' की। इस इस्तीफे के बाद अब पंजाब और दिल्ली की राजनीति में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। क्या यह इस्तीफा पंजाब सरकार के लिए भी खतरे की घंटी है? इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा।

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