
27 साल बाद घर वापसी? ममता और शरद पवार के कांग्रेस में विलय की अटकलें
TMC और NCP (SP) के कांग्रेस में विलय के दावों से देश की सियासत गरमाई. नाना पटोले का बड़ा हिंट, अशोक गहलोत बोले राहुल गांधी को सर्वमान्य नेता स्वीकार करें.
Congress TMC NCP Merger: भारतीय राजनीति के गलियारों में इस समय एक ऐसी महा-उलटफेर की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है, जो अगर हकीकत में बदली तो देश का सियासी नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी अंदरूनी संकट और महाराष्ट्र की बदलती सियासी बिसात के बीच यह बेहद मजबूत कयास लगाए जा रहे हैं कि कभी कांग्रेस से अलग होकर बनी क्षेत्रीय पार्टियां अब वापस अपने 'मूल घर' यानी कांग्रेस में विलय करने की योजना बना रही हैं.
हालांकि, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने गुरुवार को इन चर्चाओं को "बुनियाद अफवाह" कहकर खारिज कर दिया, लेकिन महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने एक बेहद स्पष्ट और बड़ा हिंट देकर सियासी हलचल को चरम पर पहुंचा दिया है. पटोले ने साफ शब्दों में पत्रकारों से कहा:
"समान विचारधारा वाले दल कांग्रेस के साथ विलय की तैयारी कर रहे हैं. शरद पवार और ममता बनर्जी कांग्रेस में अपनी पार्टियों के विलय को लेकर मन बना रहे हैं. मैं स्पष्ट कर दूं कि यह कोई गठबंधन नहीं, बल्कि पूर्ण विलय होगा."
नाना पटोले का दावा: पवार का प्रस्ताव पहले से तैयार; मतों के बिखराव को रोकना मकसद
नाना पटोले ने दावा किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के प्रमुख शरद पवार की ओर से विलय का प्रस्ताव काफी पहले ही आ चुका था, जो कुछ कारणों से टल गया था.
उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि देश में इस समय जिस तरह की राजनीति चल रही है, उसे देखते हुए धर्मनिरपेक्ष (Secular) और बहुलवादी (Pluralistic) विचारधारा वाले सभी दलों को एक मंच पर आना होगा ताकि विपक्ष के वोटों के बड़े पैमाने पर होने वाले बिखराव को रोका जा सके. पटोले के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रक्रिया अब आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है.
संजय राउत की 'पिच' और सुप्रिया सुले का रहस्यमयी 'रेनकोट' वाला जवाब
इस महा-विलय की पटकथा की शुरुआत कुछ दिनों पहले शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने की थी. राउत ने सार्वजनिक रूप से शरद पवार से अपील की थी कि वे कांग्रेस से टूटकर बनी छोटी क्षेत्रीय पार्टियों को वापस देश की सबसे पुरानी पार्टी में मिलाने की अगुवाई करें. राउत ने कहा था कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस का मजबूत होना सबसे जरूरी है.
सुप्रिया सुले का दिलचस्प जवाब:
संजय राउत के इस 'महा-प्रस्ताव' को बेहद अच्छा बताते हुए शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने बेहद कूटनीतिक और रहस्यमयी (Cryptic) अंदाज में जवाब दिया था. उन्होंने प्रस्ताव को खारिज न करते हुए कहा— "पहले बारिश तो होने दीजिए, फिर देखेंगे कि छाता लेना है या रेनकोट." यह बयान साफ करता है कि परदे के पीछे खिचड़ी पक रही है.
अशोक गहलोत की खुली अपील: 'राहुल गांधी को देश का नेता मानें, तभी बदलेगा वोटिंग पैटर्न'
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने भी इस मुहिम को खुला समर्थन देते हुए क्षेत्रीय दलों के सामने एक बड़ी शर्त रख दी है. गहलोत ने कहा:
राहुल गांधी की लीडरशिप: "संजय राउत की बात में दम है और अब वह समय आ गया है. कांग्रेस से अलग होकर क्षेत्रीय दल बनाने वाले सभी नेताओं को वापस आना चाहिए और पूरे दिल से राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार करना चाहिए."
देश में जाएगा साफ मैसेज: गहलोत का तर्क है कि जब पूरे देश में यह साफ संदेश जाएगा कि 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के एकमात्र नेता राहुल गांधी हैं, तभी देश की जनता विपक्ष पर भरोसा करेगी. जनता एक तरफ नरेंद्र मोदी और दूसरी तरफ राहुल गांधी को देख रही है. साझा नेतृत्व का यह संदेश देश का वोटिंग पैटर्न पूरी तरह बदल देगा.
फ्लैशबैक: क्यों अलग हुए थे ममता और पवार? आज क्यों आई ये नौबत?
ममता बनर्जी और शरद पवार दोनों ही कभी कांग्रेस के कद्दावर नेता थे, जिन्होंने वैचारिक और व्यक्तिगत मतभेदों के चलते अपनी अलग राह चुनी थी:
ममता बनर्जी (1998): ममता ने पश्चिम बंगाल में वामपंथियों से लड़ने के लिए कांग्रेस से अलग होकर 1998 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गठन किया था.
शरद पवार (1999): पवार ने सोनिया गांधी के 'विदेशी मूल' के मुद्दे पर बगावत की थी और पीए संगमा व तारिक अनवर के साथ मिलकर 1999 में एनसीपी (NCP) बनाई थी. (तारिक अनवर बाद में कांग्रेस में लौट आए थे).
आज विलय की मजबूरी क्यों?
शरद पवार की पार्टी को साल 2023 में तब सबसे बड़ा झटका लगा जब उनके अपने भतीजे अजीत पवार ने बगावत कर दी और पार्टी का नाम व चुनाव चिन्ह छीनकर बीजेपी के साथ चले गए. ठीक इसी तरह का अंदरूनी सांगठनिक संकट आज ममता बनर्जी की टीएमसी भी झेल रही है. क्षेत्रीय क्षत्रपों को समझ आ रहा है कि बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे का मुकाबला अकेले-अकेले करना मुमकिन नहीं है.
बैठकों का दौर: कांग्रेस चाहती है कि पहला कदम TMC उठाए
इस हफ्ते दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में बैक-टू-बैक हुई दो हाई-प्रोफाइल बैठकों ने इन अफवाहों को पंख दिए हैं:
पहली बैठक: मंगलवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की.
दूसरी बैठक: बुधवार को टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बेहद गोपनीय बैठक हुई.
सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी के सामने साफ किया कि टीएमसी विपक्ष के कुनबे में एक बेहद मजबूत गठबंधन चाहती है और वे राहुल की लीडरशिप को स्वीकार करते हैं. हालांकि, कांग्रेस ने अपना रुख बेहद सधा हुआ रखा है. कांग्रेस आलाकमान का कहना है कि किसी भी तरह के मर्जर (विलय) का आधिकारिक प्रस्ताव टीएमसी की ओर से ही आना चाहिए, कांग्रेस अपनी तरफ से इसके लिए कोई दबाव नहीं बना रही है.
Next Story

