
NCPI में विलय से बदलेगा संसद का गणित? NDA को मिल सकती है नई ताकत
टीएमसी के 20 बागी सांसदों के NCPI में शामिल होने के बाद NDA की संसदीय ताकत बढ़ सकती है, जबकि INDIA गठबंधन को झटका लग सकता है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों द्वारा अलग गुट बनाकर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि इन सांसदों ने एक नए राजनीतिक मंच के जरिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का फैसला किया है।
NCPI त्रिपुरा की एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है, जिसने 2023 के विधानसभा चुनाव में 'सात स्ट्रोक वाले इंक पेन' चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा था। अब तक इस पार्टी का न तो संसद में कोई प्रतिनिधित्व था और न ही किसी राज्य विधानसभा में उसका कोई विधायक था। लेकिन यदि 20 सांसद इस पार्टी के साथ आते हैं, तो इसकी राजनीतिक स्थिति अचानक बदल सकती है।
लोकसभा में NDA की ताकत बढ़ने के संकेत
बताया जा रहा है कि इन सांसदों के समर्थन से NDA की लोकसभा में संख्या और मजबूत हो सकती है। इससे सत्तारूढ़ गठबंधन को महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत फैसलों पर अधिक राजनीतिक बढ़त मिल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि NDA के समर्थन में सांसदों की संख्या बढ़ती है, तो सरकार के लिए संसद में विभिन्न विधेयकों को पारित कराने की राह अपेक्षाकृत आसान हो सकती है। खासतौर पर संवैधानिक संशोधन और बड़े राजनीतिक महत्व वाले विधेयकों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
दलबदल कानून से बचने की रणनीति?
बागी सांसदों के बारे में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने दलबदल विरोधी कानून के तहत निर्धारित दो-तिहाई बहुमत के प्रावधान का पालन करते हुए यह कदम उठाया है। माना जा रहा है कि इस रणनीति का उद्देश्य सांसदों की सदस्यता को सुरक्षित रखते हुए नए राजनीतिक मंच के माध्यम से अपनी भूमिका बनाए रखना है।हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अंतिम फैसला संवैधानिक और संसदीय प्रक्रियाओं के आधार पर ही होगा।
INDIA गठबंधन पर पड़ सकता है असर
यदि यह राजनीतिक पुनर्संरेखण वास्तविक रूप लेता है, तो इसका सबसे बड़ा प्रभाव विपक्षी INDIA गठबंधन पर पड़ सकता है। विपक्षी खेमे की संख्या में कमी आने से संसद के भीतर उसकी राजनीतिक ताकत प्रभावित हो सकती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इससे NDA को आगामी संसद सत्रों में रणनीतिक बढ़त मिल सकती है, जबकि विपक्ष को अपनी एकजुटता बनाए रखने के लिए नई रणनीति तैयार करनी पड़ सकती है।
फिलहाल इस संभावित राजनीतिक बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं। यदि बागी सांसदों का NCPI में विलय और NDA को समर्थन आधिकारिक रूप से सामने आता है, तो यह न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों और संसद की नजर बनी रहेगी।

