
होर्मुज संकट के बीच विझिंजम पोर्ट बना ग्लोबल हब, 100 जहाजों की कतार
तिरुवनंतपुरम का विझिंजम पोर्ट बना दुनिया का नया ट्रांसशिपमेंट हब। शशि थरूर ने कहा- होर्मुज संकट के कारण ग्लोबल शिपिंग का रुख अब भारत की ओर मुड़ा है।
Vizhinjam Port, Kerala: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने वैश्विक समुद्री व्यापार को हिलाकर रख दिया है। 29 फरवरी से शुरू हुए इस संकट के कारण दुनिया भर की शिपिंग कंपनियां अब एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प की तलाश में हैं। ऐसे में केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित विझिंजम पोर्ट भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक संजीवनी बनकर उभरा है।
होर्मुज का विकल्प बना तिरुवनंतपुरम का विझिंजम
तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस बंदरगाह की सफलता के आंकड़े साझा करते हुए खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि होर्मुज संकट के कारण वैश्विक शिपिंग का रुख तिरुवनंतपुरम की ओर मुड़ गया है। वर्तमान में विझिंजम पोर्ट पर 100 जहाजों की भारी आवाजाही है, जो या तो अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं या कतार में खड़े हैं।
शशि थरूर का पोस्ट: "दुनिया की जरूरत बना यह पोर्ट"
थरूर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि विझिंजम पोर्ट अब भारत का दुनिया के लिए 'ट्रांसशिपमेंट' का सटीक जवाब बन गया है। उन्होंने कहा:
"आज विझिंजम में हालात बदल रहे हैं। होर्मुज में जारी रुकावटों के कारण दुनिया एक भरोसेमंद गेटवे की तलाश में है और विझिंजम ने इस जरूरत को पूरा किया है। मार्च 2026 में ही इस पोर्ट पर 61 जहाजों को हैंडल किया गया, जो एक नया रिकॉर्ड है।"
क्यों खास है विझिंजम पोर्ट?
विझिंजम पोर्ट भारत का पहला डीप वॉटर ट्रांसशिपमेंट हब है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे दुनिया के चुनिंदा बंदरगाहों की श्रेणी में खड़ा करती हैं:
प्राकृतिक गहराई: इस पोर्ट की गहराई 20 मीटर तक है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े मालवाहक जहाजों (Mega-max ships) को संभालने में सक्षम बनाती है।
विदेशी निर्भरता खत्म: पहले भारत आने वाले बड़े जहाजों को कोलंबो या सिंगापुर में माल उतारना पड़ता था, जहाँ से छोटे जहाजों के जरिए सामान भारत आता था। अब बड़े जहाज सीधे विझिंजम आ सकते हैं।
बढ़ती क्षमता: पहले फेज में इसकी क्षमता 10 लाख TEU (20 फीट लंबे कंटेनर) की है, जो पूरी तरह तैयार होने पर 62 लाख TEU तक पहुँच जाएगी।
अदाणी ग्रुप और केरल सरकार का प्रोजेक्ट: 8,800 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पोर्ट का उद्घाटन मई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
वैश्विक समुद्री व्यापार में नया 'दिग्गज'
विझिंजम पोर्ट अब सिंगापुर और कोलंबो जैसे ग्लोबल हब्स को सीधी टक्कर दे रहा है। होर्मुज संकट ने अनजाने में ही सही, लेकिन इस बंदरगाह की उपयोगिता को समय से पहले ही वैश्विक मंच पर साबित कर दिया है। थरूर के अनुसार, एक समय में 5 बड़े जहाजों को एक साथ संभालने का काम यहाँ युद्धस्तर पर चल रहा है। यह भारत की समुद्री ताकत और भविष्य की आर्थिक रणनीति के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो रहा है।
Next Story

