
SC का बड़ा फैसला, बंगाल में वोटर लिस्ट से जिनके कटे नाम, उनके लिए आउट-ऑफ-टर्न होगी सुनवाई
पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची से नाम कटने के विवाद पर बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जिन वोटरों के नाम SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए हैं, उनकी अपीलों पर प्राथमिकता से सुनवाई की जाए।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों का घमासान जारी है, लेकिन इस चुनावी शोर के बीच एक बड़ी कानूनी लड़ाई भी लड़ी जा रही है। सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उन मतदाताओं के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है, जिनके नाम 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से काट दिए गए थे। कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनल को आदेश दिया है कि ऐसे मामलों में जल्द से जल्द और 'आउट-ऑफ-टर्न' (प्राथमिकता के आधार पर) सुनवाई की जाए।
डायमंड हार्बर का मामला और कोर्ट का हस्तक्षेप
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच एक ऐसे मतदाता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसका नाम पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल सीट 'डायमंड हार्बर' की मतदाता सूची से हटा दिया गया था। डायमंड हार्बर में इस समय मतदान की प्रक्रिया चल रही है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उसका नाम तुरंत मतदाता सूची में बहाल किया जाए ताकि वह अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
अदालत को बताया गया कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को संपन्न हो चुका है, जबकि अगले चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होनी है। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
ट्रिब्यूनल को सौंपी जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने नोट किया कि याचिकाकर्ता पहले ही इस महीने की शुरुआत (2 अप्रैल, 2026) में संबंधित अपीलीय ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटा चुका है। बेंच ने इस स्तर पर मामले के मेरिट (गुण-दोष) पर गौर करने के बजाय, इसे ट्रिब्यूनल के पास ही रहने दिया लेकिन एक सख्त निर्देश के साथ। बेंच ने कहा, "हम इस रिट याचिका का निपटारा करते हुए अपीलीय ट्रिब्यूनल से अनुरोध करते हैं कि वह याचिकाकर्ता की अपील पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करे और जल्द से जल्द फैसला ले।"
यह आदेश 24 अप्रैल को दिए गए उस निर्देश की अगली कड़ी है, जिसमें शीर्ष अदालत ने सभी अपीलीय ट्रिब्यूनल को उन लोगों की शिकायतों पर तुरंत सुनवाई करने को कहा था, जिनके नाम पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
रिकॉर्ड मतदान और सीएम ममता की याचिका
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में हुए भारी मतदान पर खुशी जाहिर की। राज्य में 152 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए हुए पहले चरण के मतदान में 92.72 प्रतिशत का रिकॉर्ड टर्नआउट दर्ज किया गया। सुप्रीम कोर्ट उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका समेत कई अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो राज्य में मतदाता सूची के संशोधन (SIR) से संबंधित थीं।
वोट डालने का अधिकार और ट्रिब्यूनल की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल अपील लंबित होने से किसी को वोट देने का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट के आदेश के अनुसार, केवल वे लोग ही वोट डाल पाएंगे जिनके पक्ष में अपीलीय ट्रिब्यूनल ने फैसला सुना दिया है। पहले चरण के लिए यह समयसीमा 21 अप्रैल थी और दूसरे चरण के लिए 27 अप्रैल तय की गई थी।
विशाल सेटअप: 60 लाख दावे और 700 न्यायिक अधिकारी
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का विवाद काफी बड़े स्तर पर है। राज्य में करीब 60 लाख दावे और आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इस भारी भरकम संख्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 19 विशेष ट्रिब्यूनल का गठन किया है। इन ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता पूर्व न्यायिक अधिकारी कर रहे हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड से लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को इन दावों के निपटारे के लिए तैनात किया गया है।

