
महिला आरक्षण बिल पर सरकार की परीक्षा, जानें-आंकड़ों का समीकरण कितना मजबूत?
संसद में महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन समेत तीन बिल केंद्र सरकार पेश करने जा रही है। इसमें दो बिल में बदलाव के लिए दो तिहाई सांसदों की जरूरत पड़ेगी।
संसद में आज एक साथ तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने हैं, जिनका सीधा संबंध महिला आरक्षण और परिसीमन प्रक्रिया से है। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किया जाए और सीटों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया जाए। इसी उद्देश्य से आज से संसद का विशेष सत्र शुरू हो रहा है, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
इस विशेष सत्र के दौरान लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव भी पेश किया जाएगा। इसके अलावा सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए एक अलग विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत महिलाओं को मिलने वाला आरक्षण जनगणना और परिसीमन से जुड़ा हुआ है। केंद्र सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू करने और उसी के साथ महिला आरक्षण को लागू करने की योजना बना रही है।
इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को संसद में पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा। परिसीमन विधेयक को छोड़कर बाकी दो संविधान संशोधन विधेयक हैं, जिन्हें पारित करने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। लोकसभा में यह आंकड़ा 360 के आसपास है, जबकि सत्ताधारी एनडीए के पास 293 सदस्य हैं, जिससे उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। वहीं राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा 163 है, जबकि एनडीए की मौजूदा ताकत लगभग 142 बताई जा रही है।
विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे परिसीमन और 2029 के चुनावों से जोड़ने के कारण वह इन विधेयकों का विरोध कर रहा है। विपक्षी दलों का तर्क है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण सत्ताधारी गठबंधन को लाभ पहुंचा सकता है और इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो सकती है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह योजना 2029 के चुनावों को ध्यान में रखकर सीटों की सीमाओं को अपने अनुसार बदलने की कोशिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यवस्था संवैधानिक सुरक्षा उपायों को कमजोर कर सकती है और अधिक अधिकार सरकार द्वारा नियुक्त आयोग को दे सकती है।
प्रस्तावित बदलावों के तहत परिसीमन के बाद लोकसभा में सीटों की संख्या राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 तक हो सकती है, जबकि वर्तमान में यह संख्या क्रमशः 530 और 20 है।
इस बीच बीजेडी और बीआरएस जैसे क्षेत्रीय दल, जो अक्सर मुद्दों के आधार पर सरकार का समर्थन करते रहे हैं, उन्होंने भी परिसीमन के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है, जिससे सरकार के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
हालांकि, इन तमाम विरोधों के बावजूद सरकार को विश्वास है कि उसे पर्याप्त समर्थन मिलेगा। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सिद्धांत रूप में कोई भी दल महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा है और सभी दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं।

