x

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दा गरमाया, सपा और भाजपा के बीच घमासान

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा गरमाया, द फ़ेडरल देश के शो में सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा और पत्रकार सुनील शुक्ला ने उठाए सवाल।


Janpath: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की कथित चोरी का मामला राजनीतिक गलियारों में पूरी तरह गरमा गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) जहां इस मुद्दे पर सीधे केंद्र और राज्य सरकार को घेर रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 1990 के कारसेवक गोलीकांड का जिक्र कर पलटवार करने में जुटी है। इस संवेदनशील और बड़े राजनीतिक मुद्दे पर 'द फ़ेडरल देश' के शो 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार ने सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा और वरिष्ठ पत्रकार सुनील शुक्ला के साथ गहन और विश्लेषणात्मक चर्चा की।


'40 दिनों में 70 बार हुई चोरी, हाईकोर्ट के जज से हो जांच' - रविदास मेहरोत्रा
चर्चा की शुरुआत करते हुए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर एक सोची-समझी साजिश के तहत बड़े पैमाने पर गबन और चोरी को अंजाम दिया गया है।

मेहरोत्रा ने कहा:

"अयोध्या राम मंदिर में पिछले काफी समय से चढ़ावे की लूट और डकैती हो रही थी। जब इस महापाप का खुलासा हुआ और वो रंगे हाथों पकड़े गए कि वहां 40 दिनों में 70 बार चोरी हुई है, तो भाजपा अपने गुनाहों को छिपाने के लिए विपक्ष पर झूठे आरोप लगा रही है।"

सपा नेता ने मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की सुरक्षा में 400 कर्मी तैनात होने और सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद इतनी बड़ी लूट कैसे हो गई? उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर सीसीटीवी कैमरे बंद किए गए थे। मेहरोत्रा ने मांग की कि इस पूरे घोटाले की जांच एसआईटी से न कराकर सीधे सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए।

भाजपा का '1990 नैरेटिव' और सरकार की जवाबदेही
शो के दौरान जब एंकर ने वरिष्ठ पत्रकार सुनील शुक्ला से सवाल किया कि विपक्ष के इस आक्रामक रुख के जवाब में भाजपा द्वारा बार-बार 1990 के कारसेवक गोलीकांड और अखिलेश यादव को 'राम विरोधी' बताने के नैरेटिव का चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?

इस पर विश्लेषण करते हुए सुनील शुक्ला ने कहा कि भाजपा का यह पुराना पैंतरा अब इस नए मुद्दे को दबा नहीं पाएगा। शुक्ला ने कहा:

"1990 में जो कुछ हुआ, वह उस समय की सरकार का संवैधानिक दायित्व था। लेकिन आज भाजपा सत्ता में है, इसलिए वो इस चोरी की जवाबदेही से भाग नहीं सकती। आरोप का जवाब पलटकर आरोप लगाना नहीं, बल्कि स्पष्टीकरण देना होता है।"

वरिष्ठ पत्रकार ने यह भी रेखांकित किया कि मंदिर ट्रस्ट के गठन के समय अयोध्या के जिलाधिकारी और यूपी के गृह सचिव जैसे वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को पदेन ट्रस्टी बनाया गया था ताकि पारदर्शिता रहे। ऐसे में अगर मंदिर के दानपात्रों, सोने-चांदी के आभूषणों और भक्तों की मूल्यवान वस्तुओं में हेराफेरी हुई है, तो केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें अपनी निगरानी की विफलता से मुंह नहीं मोड़ सकतीं।

'यह राम में आस्था का नहीं, जनता की श्रद्धा से खिलवाड़ का मामला है'
पत्रकार सुनील शुक्ला ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह मुद्दा अब किसी राजनीतिक दल का न रहकर आम जनता का मुद्दा बन चुका है। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक और राजनीतिक दल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान किया था, इसलिए इसे 'राम विरोधी' का रंग देना गलत है। यह सीधे तौर पर उन करोड़ों हिंदुओं की आस्था और गाढ़ी कमाई के पैसे के साथ खिलवाड़ है, जिन्होंने श्रद्धापूर्वक मंदिर में अपनी संपत्ति दान कर दी थी।

2027 चुनाव को लेकर सपा का बड़ा दावा
चर्चा के अंत में सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और राज्य में चल रहे एनकाउंटर्स को 'फर्जी' करार दिया। उन्होंने दावा किया कि साल 2027 के विधानसभा चुनावों में जनता इस 'महापाप' का बदला लेगी और प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। मेहरोत्रा ने संकल्प दोहराया कि सपा सरकार आते ही राम मंदिर चंदा चोरी और फर्जी एनकाउंटर्स के सभी दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट आने से पहले इस राजनीतिक घमासान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में राम मंदिर के प्रबंधन और पारदर्शिता का यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति का मुख्य केंद्र बिंदु रहने वाला है।


Read More
Next Story