आकाशवाणी भवन से घसीटकर ले गई पुलिस: 8 घंटे तक बरगद के पेड़ के नीचे अड़े रहे राहुल-प्रियंका
बैरिकेडिंग और पुलिस कार्रवाई के बीच राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और वरिष्ठ सांसदों के साथ सीधे आकाशवाणी भवन परिसर में दाखिल होकर करीब 8 घंटे तक बरगद के पेड़ के नीचे धरने पर बैठे रहे।
राजधानी दिल्ली की सड़कों पर मंगलवार को विपक्षी दलों के 'वोट चोरी' और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ निकाले गए मार्च के दौरान एक ऐसा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जिसकी उम्मीद शायद दिल्ली पुलिस या गृह मंत्रालय के खुफिया तंत्र को भी नहीं थी। संसद भवन के मकर द्वार से शुरू हुआ मार्च जब नीति आयोग के पास रोक दिया गया, तो माहौल काफी हिंसक और तनावपूर्ण हो गया। अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर बसों में बिठा लिया। लेकिन इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक ऐसा रणनीतिक दांव खेला, जिसने पूरी पुलिस व्यवस्था और सत्ता के गलियारों को सकते में डाल दिया। राहुल गांधी की इस आउट-ऑफ-द-बॉक्स और आक्रामक रणनीति पर 'द फेडरल' के राजनीतिक विश्लेषक और पॉलिकटल एडिटर पुनीत निकोलस यादव के साथ हमारे खास कार्यक्रम 'जनपथ' में गहन चर्चा हुई।
अचानक आकाशवाणी भवन में एंट्री और 8 घंटे का ऐतिहासिक धरना
पुलिस की हिरासत वाली घेराबंदी को चकमा देकर राहुल गांधी अचानक पास ही स्थित प्रसार भारती के मुख्यालय 'आकाशवाणी भवन' परिसर के भीतर दाखिल हो गए। उनके साथ प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और पार्टी के अन्य सांसद भी अंदर चले गए। आकाशवाणी भवन के परिसर में बने एक बड़े बरगद के पेड़ के नीचे राहुल गांधी जमीन पर बैठ गए और सीधे ऐलान कर दिया कि वे जब तक चुनाव आयुक्तों से खुद मिलकर अपनी बात नहीं रख लेते, तब तक वहां से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।
देखते ही देखते लुटियंस दिल्ली का सबसे हाई-सिक्योरिटी ज़ोन माने जाने वाला आकाशवाणी भवन विरोध प्रदर्शन का नया केंद्र बन गया। करीब 8 घंटे तक राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वहीं डटे रहे। इस दौरान दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों और डीसीपी सचिन शर्मा ने उन्हें समझाने-बुझाने और परिसर खाली करने के लिए काफी मान-मनौव्वल की, लेकिन राहुल अपनी मांग पर अडिग रहे।
पुनीत निकोलस यादव के अनुसार, राहुल गांधी ने इस बार रक्षात्मक राजनीति छोड़कर पूरी तरह से आक्रामक और सरप्राइज (चकाचौंध कर देने वाले) दांव का इस्तेमाल किया है। आमतौर पर पुलिस जब किसी प्रदर्शन को रोकती है, तो नेता हिरासत में चले जाते हैं। लेकिन राहुल गांधी का आकाशवाणी भवन के भीतर जाकर बैठ जाना पुलिस के लिए प्रशासनिक और कानूनी रूप से एक बड़ा संकट बन गया। आकाशवाणी भवन एक संवेदनशील सरकारी और सूचना प्रसारण का केंद्र है, जहाँ जबरन पुलिसिया बल प्रयोग करना सरकार के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत का कारण बन सकता था। इसी वजह से पुलिस को 8 घंटे तक बातचीत का रास्ता अपनाना पड़ा।
घसीटकर हिरासत में लिए गए राहुल-प्रियंका, पर रणनीति की हो रही तारीफ
लगभग 8 घंटे के लंबे गतिरोध के बाद, जब यह साफ हो गया कि राहुल गांधी खुद से नहीं हटेंगे, तो दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। पुलिस बल ने भारी मशक्कत के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को जबरन और घसीटते हुए वहां से हटाया और पुलिस वैन में बिठाकर हिरासत में लिया।
हालांकि, इस घटनाक्रम के बाद देश भर के राजनीतिक हलकों में राहुल गांधी के इस तेवर की जमकर तारीफ हो रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रदर्शन से राहुल गांधी ने न केवल विपक्षी गठबंधन (INDIA Block) में अपने नेतृत्व को और मजबूत किया है, बल्कि चुनाव आयोग और सरकार के सामने यह संदेश भी दे दिया है कि वे बैकफुट पर जाने वाले नहीं हैं।
चुनावी निष्पक्षता की लड़ाई में नया मोड़
इस 8 घंटे के ड्रामे ने 'वोट चोरी' और चुनाव आयोग की गिरती साख के मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। 'जनपथ' में हुई चर्चा के अनुसार, राहुल गांधी का यह कदम सीधे तौर पर जनता और कैडर को यह भरोसा दिलाने की कोशिश है कि विपक्ष सड़कों पर लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब देखना यह होगा कि इस राजनीतिक गतिरोध और राहुल गांधी के आक्रामक तेवरों का असर आने वाले दिनों में देश की राजनीति और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कितना पड़ता है।

