जनपथ: सोना क्यों हो रहा है महंगा? जानें डी-डॉलराइजेशन का पूरा खेल
जनपथ में एंकर अभिषेक रावत के साथ जानिए सोने की बढ़ती कीमतों के पीछे अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और आम ग्राहकों के लिए खास सलाह।
Janpath: सोना और चांदी हमेशा से ही आम भारतीय परिवारों की पहली पसंद और सुरक्षित निवेश का सबसे पसंदीदा जरिया रहे हैं। हाल के दिनों में सोने की कीमतों में एक बार फिर तेज़ उछाल देखा गया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। 'द फ़ेडरल देश' के खास शो जनपथ में एंकर अभिषेक रावत ने बाजार विशेषज्ञों SEBI के रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट अनुज गुप्ता और ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स मार्केट एसोसिएशन कूचा महाजनी के अध्यक्ष योगेश सिंघल से सोने की बढ़ती कीमतों, अंतरराष्ट्रीय कारणों और 'डी-डॉलराइजेशन' पर विस्तार से चर्चा की।
1. क्या है 'डी-डॉलराइजेशन' (De-dollarisation) और यह सोने को क्यों महंगा कर रहा है?
शो के दौरान एंकर अभिषेक रावत ने वैश्विक स्तर पर हो रहे डी-डॉलराइजेशन को लेकर जब सवाल पूछा, तो विशेषज्ञों ने बहुत ही सरल और आसान भाषा में इसका गणित समझाया:
अमेरिकी डॉलर का दबदबा खत्म करने की होड़: 'डी-डॉलराइजेशन' का सीधा अर्थ है दुनिया के देशों (विशेषकर चीन, रूस और BRICS देशों) द्वारा व्यापार और अपने रिजर्व में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करना या खत्म करना।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उपजा डर: जब अमेरिका ने रूस के लगभग $300 बिलियन डॉलर के बॉन्ड और संपत्ति को फ्रीज (Freeze) कर दिया, तब से दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों (Central Banks) में यह डर बैठ गया कि भविष्य में उनके साथ भी ऐसा हो सकता है।
चीन और केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी:
चीन अपनी मुद्रा 'युआन' (Yuan) को वैश्विक स्तर पर मजबूत करना चाहता है। इसलिए वह लगातार अमेरिकी डॉलर से बाहर निकलकर भारी मात्रा में सोने की खरीदारी (Gold Reserve) बढ़ा रहा है।
दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड से ध्यान हटाकर सोने को सबसे सुरक्षित संपत्ति (Safe Asset) मानकर खरीद रहे हैं। जब पूरी दुनिया के बैंक इतने बड़े पैमाने पर बल्क में सोना खरीदेंगे, तो मांग बढ़ने से कीमतें स्वाभाविक रूप से आसमान छूने लगेंगी।
2. अंतरराष्ट्रीय और भू-राजनीतिक (Geopolitical) अन्य कारण
अनुज गुप्ता के अनुसार, सोने और चांदी में आई तेजी के पीछे डी-डॉलराइजेशन के साथ-साथ ये कारण भी प्रमुख हैं:
डॉलर्स इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड में गिरावट: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने और बॉन्ड यील्ड में सुधार से कमोडिटी मार्केट को सीधा सहारा मिला है।
युद्ध और वैश्विक तनाव: अमेरिका-ईरान तनाव, मध्य पूर्व में अस्थिरता और रूस युद्ध की वजह से निवेशक सुरक्षित विकल्प (Safe Haven) के रूप में सोने में निवेश कर रहे हैं।
कच्चा तेल और महंगाई: कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे मुद्रास्फीति को प्रभावित करता है, जिससे निपटने के लिए लोग सोने को ढाल बनाते हैं।
3. MCX और सर्राफा बाजार का व्यावहारिक पहलू
पैनिक बाइंग से बचें: योगेश सिंघल ने आम ग्राहकों को चेतावनी दी है कि जब सोना $700 तक की तेजी के साथ अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर हो, तब घबराहट में आकर (Panic Buying) खरीदारी नहीं करनी चाहिए।
MCX और सट्टेबाजी: योगेश सिंघल का कहना है कि MCX जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सट्टेबाजी के कारण दिन में दो-तीन बार सोने के दाम तेजी से बदलते हैं, जिससे आम जौहरी और ग्राहक दोनों परेशान होते हैं। वहीं अनुज गुप्ता का मानना है कि MCX केवल जोखिम प्रबंधन (Risk Management) का साधन है और मुख्य प्रभाव अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का ही होता है।
त्यौहारी सीजन से उम्मीद: बीते 5-6 महीनों से सर्राफा बाजार में मंदी थी, लेकिन आगामी शादी-ब्याह और त्यौहारों को देखते हुए बाजार में दोबारा रौनक लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
4. भविष्य में कहां तक जा सकते हैं दाम? (संभावित स्तर)
विशेषज्ञों के अनुसार, डी-डॉलराइजेशन की रफ्तार और वैश्विक तनाव को देखते हुए सोने-चांदी की कीमतें आने वाले समय में नए रिकॉर्ड बना सकती हैं:
सोने (Gold) के संभावित दाम: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,800 से $5,000 प्रति औंस तक पहुंच सकता है। वहीं भारत के घरेलू बाजार में इसके भाव ₹1,65,000 से ₹1,70,000 प्रति 10 ग्राम तक जाने की संभावना जताई गई है।
चांदी (Silver) के संभावित दाम: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी $75 से $80 प्रति औंस और घरेलू बाजार में ₹2,60,000 से ₹2,65,000 प्रति 1 किलोग्राम का स्तर छू सकती है।
5. आम ग्राहकों और निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह
यदि आप गहने या निवेश के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो विशेषज्ञों की यह सलाह याद रखें:
'डिप पर खरीदारी' (Dips on Buying): एक साथ सारा पैसा लगाने या रिकॉर्ड तेजी में खरीदने के बजाय जब भी बाजार में ₹5,000 से ₹15,000 की गिरावट (Correction) आए, केवल तभी थोड़ी-थोड़ी खरीदारी करें।
बजट के अनुसार कदम उठाएं: त्यौहारों या शादी-ब्याह के लिए बजट फिक्स रखें और पैनिक बाइंग के बजाय समझदारी से चरणबद्ध तरीके से सोना खरीदें।

