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GDP 7.8% लेकिन रोजगार कहां? अर्थशास्त्री विजय सरदाना का खुलासा

7.8% जीडीपी ग्रोथ के बावजूद रोजगार और प्रति व्यक्ति आय पर सवाल क्यों? 'जनपथ' में वरिष्ठ एंकर मनीष कुमार के साथ अर्थशास्त्री विजय सरदाना का खास विश्लेषण।


Janpath: वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.8 फ़ीसदी दर्ज की गई है। इन शानदार आंकड़ों के सामने आने के बाद जहां सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है और प्रधानमंत्री ने देशवासियों को बधाई दी है, वहीं आर्थिक मामलों के जानकारों ने आंकड़ों के भीतर छिपी कई गंभीर चिंताओं की ओर इशारा किया है। 'द फेडरल देश' के खास शो 'जनपथ' में वरिष्ठ एंकर मनीष कुमार ने प्रख्यात अर्थशास्त्री विजय सरदाना से इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।


हेडलाइन ग्रोथ बनाम जमीनी हकीकत

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एंकर मनीष कुमार ने सवाल उठाया कि जब देश और दुनिया मिडिल ईस्ट संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब जीडीपी का 7.8% का आंकड़ा अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर कितनी बयां करता है।

इस पर अर्थशास्त्री विजय सरदाना ने कहा कि 145 करोड़ की आबादी वाले विकासशील देश में बेसिक कंजम्पशन के दम पर इतना डेटा आना स्वाभाविक है, लेकिन केवल हेडलाइन आंकड़ों को देखकर यह मान लेना कि सब कुछ ठीक है, सही नहीं होगा।


मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही, लेकिन कच्चा माल कहां से आ रहा?

विजय सरदाना ने आंकड़ों के विरोधाभास को रेखांकित करते हुए बताया:

  • रॉ मटेरियल सेक्टर में गिरावट: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 10% और सर्विसेज 10% की दर से बढ़ रहे हैं, लेकिन जो सेक्टर इन्हें कच्चा माल देते हैं—एग्रीकल्चर (3.6%) और माइनिंग—वे डी-ग्रोथ और सुस्ती का शिकार हैं।

  • इंपोर्ट पर निर्भरता: जब देश के भीतर कच्चा माल नहीं बन रहा और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही है, तो इसका साफ मतलब है कि हम असेंबलिंग के लिए विदेशी सामान पर निर्भर हैं। उदाहरण के तौर पर, देश में बनने वाले मोबाइल में 80 से 90 फ़ीसदी पार्ट्स इंपोर्टेड होते हैं।


तीन प्रमुख मोर्चों पर डेटा गायब: विजय सरदाना

सरदाना ने जोर देकर कहा कि जब तक सरकार निम्नलिखित तीन बिंदुओं पर स्पष्ट डेटा नहीं देती, तब तक आम जनता के लिए जीडीपी ग्रोथ का कोई खास मतलब नहीं है:

  1. जॉब क्रिएशन (रोजगार): इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी प्रोजेक्ट्स में मशीनरी के इस्तेमाल से सीमेंट और स्टील की खपत तो बढ़ी, लेकिन इससे जमीनी स्तर पर रोजगार पैदा नहीं हुआ।

  2. प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income): आम जनता की वास्तविक आमदनी में कितनी बढ़ोतरी हुई, इसका कोई आंकड़ा सामने नहीं है।

  3. एक्सपोर्ट में इंपोर्टेड कंपोनेंट: हमारे निर्यात में भारत का अपना कितना योगदान है और बाहर से मंगाया गया माल कितना है, यह स्पष्ट नहीं है।


सोना और विदेश यात्रा से परहेज की सलाह क्यों?

एंकर मनीष कुमार के सवाल ‘यदि अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है तो सरकार विदेश यात्रा न करने और सोना न खरीदने की नसीहत क्यों दे रही है?’—का जवाब देते हुए सरदाना ने कहा कि भारत की ग्रोथ बड़े पैमाने पर आयात (Import) पर टिकी है। सोना और विदेशी यात्राएं दोनों ही देश के विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) पर दबाव डालते हैं, जिसकी देश में पहले से कमी है।


आगे की राह और चुनौतियां

आने वाली तिमाहियों में इस रफ्तार के बने रहने पर सरदाना ने कहा कि भविष्य की तस्वीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों, खाड़ी देशों के हालात और वैश्विक व्यापार पर निर्भर करेगी। उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि केवल जीडीपी आंकड़ों से भ्रमित होने के बजाय सरकार और नीति-निर्माताओं को रोजगार सृजन और घरेलू प्राथमिक क्षेत्रों को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।


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