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'जनपथ': CJP का सरकार को नया अल्टीमेटम, चेतावनी या खोखली धमकी?

'जनपथ' में एंकर अभिषेक रावत के साथ चर्चा: CJP का सरकार को अल्टीमेटम। वरिष्ठ पत्रकार नीरज महरे और नवीन निगम ने विश्लेषित किया युवाओं का बदलता आंदोलन।


Janpath: क्या देश एक बार फिर बड़े आंदोलन की आग में तपने वाला है? या फिर ये सिर्फ मुकदमों से बचने की खोखली धमकियां हैं? 'द फ़ेडरल देश' के खास शो 'जनपथ' में आज इसी गरमागरम मुद्दे पर मंथन हुआ। एंकर अभिषेक रावत के साथ जुड़े दो वरिष्ठ पत्रकार नीरज महरे और नवीन निगम। मुद्दा रहा: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का केंद्र सरकार को नया अल्टीमेटम और युवाओं का बदलता मिजाज।



CJP की नई चेतावनी
CJP की फिलहाल एक अहम बैठक चल रही है। पार्टी प्रवक्ता सौरभ दास का कहना है कि सरकार के साथ जो समझौता हुआ था, उसे करीब एक महीना होने वाला है। लेकिन सरकार वादे पूरे करने के मूड में नहीं दिख रही है। दास ने साफ कर दिया है कि अगर ऐसा ही रहा, तो CJP फिर से पूरे देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू करेगी।

अब इस धमकी में कितना दम है, इस पर दोनों पत्रकारों ने अपनी बेबाक राय रखी।

नीरज महरे: "युवाओं को हल्के में लेना सरकार को भारी पड़ेगा"
वरिष्ठ पत्रकार नीरज महरे का मानना है कि सरकार को इस चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मामला अब कोर्ट तक भी पहुंच चुका है, इसलिए टकराव से बचना बेहतर है।

महरे ने एक बड़ी बात कही कि आज के युवा (Gen Z और Gen Alpha) बहुत जागरूक हैं। जंतर-मंतर से लेकर रांची तक युवाओं ने दिखा दिया है कि उन्हें नजरअंदाज करके न तो देश चलाया जा सकता है और न ही राजनीति की जा सकती है। अगर सरकार अपने वादों से मुकरती है, तो CJP जैसी पार्टियां इसी युवा आक्रोश के दम पर फिर से सड़क पर उतरेंगी।

नवीन निगम: "CJP को अब जंतर-मंतर पर परमिशन ही नहीं मिलेगी"
वहीं, नवीन निगम ने CJP की नीयत पर ही सीधे सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कई जमीनी हकीकतें सामने रखीं:

सुविधा की राजनीति: निगम ने कहा कि CJP वहां आवाज उठाती है जहां उसे अपना फायदा दिखता है। जंतर-मंतर पर तो वे खूब गरजे, लेकिन जब झारखंड के रांची में छात्रों का इतना बड़ा आंदोलन हुआ, तो CJP वहां से एकदम गायब थी।

अब नहीं मिलेगी इजाजत: निगम ने साफ दावा किया कि CJP को अब दिल्ली में प्रदर्शन करने की अनुमति किसी हाल में नहीं मिलेगी। पिछली बार जंतर-मंतर पर जो तोड़फोड़ और नुकसान हुआ था, उसके बाद पुलिस और अदालतें बहुत सख्त हो गई हैं।

सिर्फ मुकदमों से बचने का खेल: अगर परमिशन नहीं मिलेगी तो आंदोलन कैसे होगा? निगम का मानना है कि CJP के लोग भी यह बात अच्छे से जानते हैं। वे यह सब हल्ला सिर्फ इसलिए मचा रहे हैं ताकि सरकार पर दबाव बनाकर अपने कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे वापस करवा सकें या चार्जशीट दाखिल होने से रोक सकें।

छोटे बच्चों ने सिखाया असली आंदोलन
चर्चा के आखिर में नवीन निगम ने एक बड़ा ही दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि आजकल राजनीतिक दलों से ज्यादा असरदार तो छोटे बच्चों के आंदोलन हो रहे हैं।

उन्होंने दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा के इलाके का उदाहरण दिया। वहां एक सरकारी स्कूल की बच्चियों ने रास्ते के कीचड़ और गंदगी से परेशान होकर सड़क पर मानव श्रृंखला बना ली थी। उस शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत तरीके का इतना असर हुआ कि बड़े अधिकारियों को दौड़कर वहां आना पड़ा। निगम ने कहा कि असली आंदोलन ऐसे होते हैं जो जनता के मुद्दों से जुड़े हों, न कि अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए किए जाएं। देश भर के युवाओं को भी ऐसे ही असल मुद्दों पर आवाज उठाने की जरूरत है।


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