'जनपथ': क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था?
NEET विवाद और छात्र आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। 'द फेडरल देश' के चैट शो 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार के साथ देखिए कांग्रेस और सपा के प्रवक्ताओं का गहन विश्लेषण।
Janpath: देश भर में नीट (NEET) परीक्षा की गड़बड़ियों, पेपर लीक और जंतर-मंतर पर युवाओं व 'GenZ' के उग्र आंदोलन के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। चौतरफा दबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
'द फेडरल देश' के शो 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार ने प्रमुख राजनीतिक प्रवक्ताओं के साथ इस मुद्दे पर एक गहन विमर्श किया कि क्या मंत्री के इस कदम से देश की शिक्षा व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव आएगा या यह सिर्फ एक राजनीतिक क्षतिपूर्ति है।
अंकशास्त्र और आंदोलन का प्रभाव: क्या बैकफुट पर आई सरकार?
शो की शुरुआत करते हुए एंकर मनीष कुमार ने पूरी स्थिति का ब्योरा रखा। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट साझा कर अपने इस्तीफे की घोषणा की और अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा।
जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के कार्यकर्ताओं के बीच इस खबर के आते ही उत्साह का माहौल बन गया। हालांकि, शो में यह बात साफ की गई कि छात्रों का आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। छात्रों की मांग है कि:
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
नीट विवाद के चलते मानसिक तनाव में अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिले।
'जनपथ'में विमर्श: मेहमानों के प्रमुख तर्क
1. कांग्रेस का पक्ष: "यह नई नस्ल अपनी रक्षा और बगावत दोनों जानती है"
शो में मौजूद कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इसे भारत की युवा शक्ति और छात्रों की सीधी जीत बताया। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा:
"यह नई नस्ल अपनी हिफाजत करना भी जानती है और रिश्तों की बगावत भी। प्रधानमंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिलाकर अपनी कुर्सी बचाने की कोशिश की है। लेकिन सवाल सिर्फ एक चेहरा बदलने का नहीं है, सवाल एनटीए (NTA) की गैर-जवाबदेही और शिक्षा के बाजारीकरण का है। जब तक पूरे ढांचे को ठीक नहीं किया जाता, हमारा विरोध जारी रहेगा।"
सुरेंद्र राजपूत ने यह भी आरोप लगाया कि एनटीए जैसी एजेंसियों में योग्य लोगों के बजाय विचारधारा से जुड़े लोगों को बैठाया गया, जिससे परीक्षाओं की शुचिता खत्म हुई।
2. समाजवादी पार्टी का रुख: "सत्ता के अहंकार का अंत शुरू"
विमर्श को आगे बढ़ाते हुए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मोहम्मद आजम ने इसे संविधान और लोकतंत्र की जीत करार दिया। उन्होंने कहा:
"सरकार लगातार युवाओं के इस स्वतःस्फूर्त आंदोलन को बदनाम करने और दबाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन सड़कों पर उतरे छात्रों और विपक्ष की एकजुटता ने सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। बीजेपी के अहंकार और उनके बुरे दिनों की शुरुआत आज से हो चुकी है।"
गहन विश्लेषण: व्यवस्थागत कमियों पर उठे गंभीर सवाल
'जनपथ' के इस विशेष सत्र में सिर्फ राजनीतिक इस्तीफे तक बात सीमित नहीं रही, बल्कि शिक्षा प्रणाली के मूलभूत ढाँचे पर चर्चा हुई:
एनटीए (NTA) की स्वायत्तता और ढांचा: शो में रेखांकित किया गया कि एनटीए को 'सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट' के तहत बनाया गया, जिससे वह सीधे तौर पर संसद या आरटीआई (RTI) के प्रति उस तरह जवाबदेह नहीं रही जैसे यूपीएससी या अन्य संस्थाएं होती हैं।
निजीकरण और महंगी शिक्षा: मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए महंगी होती शिक्षा और घटते रोजगार के अवसरों को लेकर भी शो में चिंता जताई गई।
संशोधन विधेयक और देर से उठाए गए कदम: पब्लिक एग्जाम एक्ट में संशोधन और जुर्माने के प्रावधानों पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह कदम बहुत पहले उठाए जाने चाहिए थे।
'जनपथ' शो में हुए विमर्श का लब्बोलुआब यह रहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भले ही सरकार के बैकफुट पर आने का संकेत हो, लेकिन देश की परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए अभी लंबे और कड़े प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता है।

