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कैबिनेट बैठक में मिला 'लिफाफा', जानिए क्यों Gen-Z के बीच जा रही BJP

'जनपथ' में बड़ा इनसाइड एनालिसिस: Gen-Z के असंतोष को दूर करने के लिए यूनिवर्सिटीज में जाएंगे मंत्री। कैबिनेट में मिले लिफाफे और राहुल गांधी के फैक्टर का सच।


Janpath: देश भर में युवाओं और छात्रों के बीच बढ़ते आक्रोश को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। हाल ही में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं, विशेषकर 'जेन ज़ी' (Gen Z) के बीच अपनी पकड़ दोबारा मजबूत करने के लिए एक बड़े आउटरीच कार्यक्रम (Youth Outreach Program) की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत केंद्रीय मंत्री देश भर के विश्वविद्यालय (Universities) और कॉलेजों में जाकर छात्रों से सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और सरकार की नीतियां व योजनाएं समझाएंगे।

डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के शो 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार के साथ 'द फ़ेडरल' के पॉलिटिकल एडिटर पुनीत निकोलस यादव और 'पुथिया थलईमुरई' के संपादक गणपति सुब्रमण्यम ने सरकार की इस पूरी रणनीति का गहन विश्लेषण किया।

कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को मिला 'लिफाफा' और रिपोर्ट कार्ड

पुनीत निकोलस यादव ने कैबिनेट बैठक से जुड़ी एक अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान सभी केंद्रीय मंत्रियों को एक लिफाफा दिया गया। इस लिफाफे में पिछले एक-डेढ़ महीने के दौरान उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर 'एंगेजमेंट और परफॉर्मेंस का रिपोर्ट कार्ड' था।

सरकार यह बारीकी से ट्रैक कर रही है कि कौन-सा मंत्री डिजिटल स्पेस में युवाओं के साथ कितना एक्टिव है और उनकी पोस्ट्स पर छात्रों व युवाओं की कैसी प्रतिक्रिया आ रही है।

क्यों पड़ी अचानक आउटरीच की जरूरत?

विगत 12 वर्षों से सरकार के इर्द-गिर्द जो यह छवि बनी हुई थी कि वह किसी दबाव में नहीं आती या आलोचनाओं से बेअसर रहती है, वह छवि हालिया छात्र आंदोलनों के कारण काफी हद तक प्रभावित हुई है।

मुद्दों की आंच: पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं के रद्द होने, लटकी हुई भर्तियों और रोजगार के संकट को लेकर जंतर-मंतर से लेकर बिहार और झारखंड तक युवाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

तिलिस्म टूटने का डर: पिछले एक महीने में युवाओं के बीच सरकार की जो छवि प्रभावित हुई है, यह आउटरीच अभियान उसी नुकसान की भरपाई (Damage Control) करने की एक कोशिश है।

'दिमागी नक्सल' बयान और डैमेज कंट्रोल का दबाव

एंकर मनीष कुमार ने ध्यान दिलाया कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए 'दिमागी नक्सल' शब्द को आंदोलित छात्रों से जोड़कर देखा गया, जिससे युवाओं में भारी नाराजगी है।

वरिष्ठ पत्रकार गणपति सुब्रमण्यम के अनुसार, देश भर में 1,000 से अधिक विश्वविद्यालय और 50,000 से अधिक कॉलेज हैं। इन सभी परिसरों तक मंत्रियों की पहुंच बनाना एक बड़ा और चुनौतीपूर्ण कार्य है। सरकार छात्रों को यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उनका भविष्य सुरक्षित है और नेतृत्व उनके साथ खड़ा है।

क्या मंत्रियों का पुराना संवाद फॉर्मूला 'Gen-Z' के आगे टिकेगा?

इस पूरी योजना में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 50-55 साल के मंत्री आज की 'Gen-Z' पीढ़ी की सोच से तालमेल बिठा पाएंगे?

पुनीत निकोलस के मुताबिक, समस्या केवल उम्र की नहीं, बल्कि 'मुद्दों और भाषा' की है:

पुराना नैरेटिव बेअसर: यदि मंत्री परिसरों में जाकर 'विश्वगुरु', 'विकसित भारत' या पुराने राजनीतिक इतिहास की बातें करेंगे, तो आज का छात्र उसे सुनने के मूड में नहीं है।

असली सवाल: आज का युवा रोजगार, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, सस्ती शिक्षा और नौकरियों के ठोस जवाब चाहता है। इन धरातली सवालों पर सरकार के पास फिलहाल तात्कालिक और ठोस उत्तरों का अभाव दिख रहा है।

राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान की काट

विपक्ष भी छात्र राजनीति में आक्रामक रुख अपनाए हुए है। राहुल गांधी देश के 800 शहरों में 'छात्रों की गूंज' नाम से राष्ट्रव्यापी अभियान चला रहे हैं। विपक्ष के इसी सीधे संवाद और आक्रामक घेराबंदी की काट के रूप में केंद्र सरकार ने हर यूनिवर्सिटी में अपने मंत्रियों को भेजने का ब्लूप्रिंट तैयार किया है।

राजनीतिक मायने और आगामी राह

आगामी समय में उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसके बाद आम चुनावों की बिसात भी बिछेगी। सरकार को यह अहसास हो चुका है कि 'युवा वोट बैंक' की नाराजगी मोल लेकर चुनावी राह आसान नहीं होगी। अब देखना यह होगा कि यूनिवर्सिटीज़ का यह दौरा छात्रों का गुस्सा शांत कर पाता है या यह प्रयास बेअसर साबित होता है।

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