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'जनपथ': बांकीपुर-दतिया उपचुनाव पर घिरी BJP, प्रशांत किशोर की एंट्री से बढ़ा BP!

'दे फ़ेडरल देश' के शो 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार व पत्रकार दीपक कोचगवे की रिपोर्ट: बांकीपुर में PK का प्रभाव, दतिया का कलह और बैकफुट पर केंद्र सरकार।


Janpath: देश में दो अति-महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों बिहार की बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया पर हो रहे उपचुनावों ने राष्ट्रीय राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। बांकीपुर विधानसभा सीट, जो भाजपा के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने और इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है, भारतीय जनता पार्टी का दशकों पुराना अभेद्य किला मानी जाती रही है।


'दे फ़ेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार ने बिहार के वरिष्ठ पत्रकार दीपक कोचगवे के साथ बांकीपुर के सियासी रण, प्रशांत किशोर (PK) की एंट्री, छात्रों पर हुए पुलिसिया एक्शन और दतिया के अंदरूनी कलह पर गहराई से पड़ताल की।

1. बांकीपुर में प्रशांत किशोर की एंट्री से बढ़ा बीजेपी का 'बीपी'
वरिस्थ पत्रकार दीपक कोचगवे ने विश्लेषण करते हुए बताया कि बांकीपुर का चुनाव भले ही महज एक सीट का उपचुनाव हो, लेकिन इसके सियासी संदेश पूरे देश में जाएंगे।

पीके का आक्रामक प्रचार और विपक्ष की जगह: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के प्रबुद्ध वर्ग, वकीलों और युवाओं को सीधे अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। विपक्ष के मुख्य चेहरा तेजस्वी यादव के विदेश दौरे पर होने की वजह से शुरुआती दौर में पीके ने ही बीजेपी के खिलाफ मुख्य विपक्षी की खाली जगह को भर दिया।

नितिन नवीन की विरासत का लिटमस टेस्ट: 2006 से लगातार इस सीट पर काबिज रहे नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बीजेपी ने टिकट बंटवारे में विशेष सावधानी बरती। अजय आलोक, रणवीर नंदन और ऋतुराज सिन्हा जैसे बड़े दावों को दरकिनार कर एक साधारण कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को प्रत्याशी बनाया गया। हालांकि, 40 स्टार प्रचारकों की पूरी फौज और केंद्रीय मंत्रियों को झोंकने से यह साफ है कि बीजेपी अपने इस गढ़ को लेकर कितनी आशंकित है।

जातिगत समीकरण और कोर वोट: बांकीपुर (पुराना पटना पश्चिम) में कायस्थ (13-15%) और वैश्य (8-10%) मतदाता पारंपरिक रूप से बीजेपी का मजबूत कोर वोट बैंक रहे हैं। इसके अलावा भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत मतदाताओं के बीच वोटों का बंटवारा ही अंतिम नतीजों को तय करेगा।

2. 1.10 लाख युवा वोटर, छात्र आंदोलन और AK-47 का मुद्दा
शो में एंकर मनीष कुमार ने बिहार में नीट (NEET) पेपर लीक आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा छात्रों की पिटाई, सीवान की तस्वीरें और पुलिसकर्मियों द्वारा AK-47 तानने जैसी गंभीर घटनाओं से भाजपा-जेडीयू सरकार पर पड़ रहे असर का सवाल उठाया।

तीन दिग्गजों की साख दांव पर: बिहार के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब बीजेपी के मुख्यमंत्री (सम्राट चौधरी), पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (नितिन नवीन) और प्रदेश अध्यक्ष—तीनों के संयुक्त नेतृत्व में यह चुनाव लड़ा जा रहा है। यदि यहां नतीजे विपरीत आते हैं, तो बिहार बीजेपी के कई बड़े विकेट गिर सकते हैं।

युवा मतदाताओं का रुख: बांकीपुर क्षेत्र में 18 से 34 वर्ष के युवाओं की संख्या 1,10,000 से अधिक है। नीट पेपर लीक विवाद, लाठीचार्ज और एफआईआर की वजह से बिहार के युवाओं का एक बड़ा वर्ग सरकार से नाराज है, जो चुनाव परिणाम का मुख्य डिसाइडिंग फैक्टर बन सकता है।

3. दतिया उपचुनाव और केंद्र में बीजेपी का 'डिफेंसिव मोड'
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की नाराजगी और पार्टी के भीतर जारी खिलाफत ने बीजेपी के लिए नई मुसीबतें खड़ी कर दी हैं।

आंतरिक कलह से गिरता राजनीतिक वोल्टेज: वरिष्ठ पत्रकार दीपक कोचगवे ने रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश और बिहार दोनों ही जगह ब्राह्मण मतदाताओं की नाराजगी और अंदरूनी डिस्प्यूट बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

12 साल में पहली बार बैकफुट पर सरकार: नीट आंदोलन के भारी दबाव में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से लेकर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों और छात्र मांगों के आगे झुकने तक, पिछले 12 वर्षों में पहली बार केंद्र सरकार और बीजेपी पूरी तरह रक्षात्मक (डिफेंसिव) मोड में नजर आ रही है।

'दे फ़ेडरल देश' के शो 'जनपथ' की इस विस्तृत चर्चा से स्पष्ट है कि बांकीपुर और दतिया के उपचुनाव सिर्फ दो विधानसभा सीटों का भाग्य तय नहीं करेंगे, बल्कि यह 'GenZ' और छात्र आंदोलनों के बाद जनता के मूड का पहला बड़ा नेशनल लिटमस टेस्ट साबित होंगे। यदि बांकीपुर के बीजेपी के इस पुराने किले में कोई सेंध लगती है, तो यह 2027 के आगामी चुनावों से पहले भारतीय राजनीति के सारे स्थापित समीकरणों को बदल कर रख देगा।


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