'जनपथ' में गहन चर्चा : क्या 2-3% वोट खिसकने से बिगड़ेगा बीजेपी का गणित?
'द फ़ेडरल देश' के शो 'जनपथ' में एंकर मनीष के साथ देखिए सपा की नई सोशल इंजीनियरिंग, जनेश्वर मिश्र जयंती पर ब्राह्मण सम्मेलन और 2027 के यूपी चुनाव का गणित।
Janpath: 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने चर्चित 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का दायरा बढ़ाते हुए ब्राह्मणों पर डोरे डालना शुरू कर दिया है। लखनऊ में 'छोटे लोहिया' जनेश्वर मिश्र की जयंती पर सपा दफ़्तर में जुटे ब्राह्मणों के भारी हुजूम ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खेमे में हलचल तेज़ कर दी है।
'द फ़ेडरल देश' के खास राजनीतिक कार्यक्रम 'जनपथ' में एंकर मनीष ने इसी गर्मा-गर्मी पर सपा प्रवक्ता शौर्या सिंह और वरिष्ठ पत्रकार नितिन श्रीवास्तव के साथ गहन चर्चा की।
सपा प्रवक्ता शौर्या सिंह का हमला: "बीजेपी ने सनातन और सवर्णों को बंधक समझ लिया है"
चर्चा में सपा का पक्ष रखते हुए शौर्या सिंह ने योगी सरकार और भाजपा पर तीखे प्रहार किए:
बीजेपी की 'बापौती' नहीं है सनातन: शौर्या सिंह ने कहा कि भाजपा यह गलतफ़हमी पाल कर बैठी है कि सनातन धर्म और सवर्ण समाज उसकी व्यक्तिगत 'बापौती' हैं। बीजेपी सवर्णों का इस्तेमाल सिर्फ़ वोट बैंक के रूप में करती है और सत्ता में आते ही उन्हें दरकिनार कर देती है।
सपा का पुराना नाता: उन्होंने याद दिलाया कि सपा ने हमेशा जनेश्वर मिश्र, माता प्रसाद पांडेय और शिवाकांत ओझा जैसे कद्दावर ब्राह्मण नेताओं को बड़ा मंच और सम्मान दिया है।
'फ्रीबीज' के खोखले वादे: उन्होंने योगी-मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 5 किलो राशन और मुफ़्त सिलेंडर की 'फ्रीबीज' की आड़ में जनता को ठगा गया है। आज वही सिलेंडर 4 गुना महंगा हो चुका है और लोग दोबारा चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं। युवाओं को मुफ़्त का राशन नहीं, बल्कि सम्मानजनक नौकरी, अच्छे अस्पताल, कॉलेज और खेल के स्टेडियम चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार नितिन श्रीवास्तव का गणित: "3% ब्राह्मण भी खिसके तो ढह जाएगा बीजेपी का किला"
वरिष्ठ पत्रकार नितिन श्रीवास्तव ने यूपी के इस नए जातिगत समीकरण (Caste Equations) का बारीक विश्लेषण किया:
यूपी का जातिगत ढांचा: उन्होंने बताया कि यूपी में लगभग 40% ओबीसी, 20% सवर्ण (अपर कास्ट) और 20% एससी/एसटी मतदाता हैं। 2014 के बाद से बीजेपी ने मोदी-योगी फैक्टर के दम पर इस धर्म और जाति के गठबंधन को साध कर रखा था।
2-3% वोट का खेल: नितिन श्रीवास्तव के अनुसार, अखिलेश यादव को अच्छी तरह पता है कि उन्हें बीजेपी को हराने के लिए पूरे 100% सवर्ण वोट नहीं चाहिए। अगर सपा की इस सोशल इंजीनियरिंग से बीजेपी का 2 से 3 प्रतिशत असंतुष्ट ब्राह्मण या सवर्ण वोट बैंक भी सपा के पाले में आता है या छिटक जाता है, तो 2027 में भाजपा का चुनावी गणित पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
विकास नहीं, जाति और धर्म की जंग: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर चुनाव सिर्फ़ 'विकास' पर होते, तो शीला दीक्षित देश की प्रधानमंत्री होतीं। यूपी में आज भी चुनाव धर्म और जाति के संतुलन पर ही लड़े जाते हैं, और अखिलेश इसी कमजोरी पर चोट कर रहे हैं।
2027 की घेराबंदी शुरू
'जनपथ' की इस गहन चर्चा से साफ़ है कि अखिलेश यादव अब सिर्फ़ 'एम-वाइ' (मुस्लिम-यादव) या केवल पिछड़ों के नेता की छवि से बाहर निकलकर 'सर्वजन' की ओर बढ़ रहे हैं। 'PDA' के 'P' में पिछड़ों के साथ-साथ 'पंडित' यानी ब्राह्मणों को जोड़ने का यह प्रयास अगर ज़मीन पर रंग लाता है, तो 2027 में योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी कुर्सी बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होगा।
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